ओडिशा के केंद्रपाड़ा ज़िले के नौगांव गांव में 21 वर्षीय शर्मिष्ठा सेठी को आंगनबाड़ी केंद्र में रसोइया के रूप में नियुक्त किया गया है। लेकिन उनकी नियुक्ति के बाद से आंगनबाड़ी केंद्र में बच्चों की संख्या काफी कम हो गई है। कई माता-पिता अपने बच्चों को वहां भेजने से बच रहे हैं।

बताया जा रहा है कि शर्मिष्ठा सेठी दलित समुदाय से आती हैं। इसी वजह से पिछले तीन महीनों से कई अभिभावक अपने बच्चों को आंगनबाड़ी केंद्र नहीं भेज रहे हैं। कुछ मामलों में यह भी देखा गया है कि माता-पिता बच्चों के लिए दिया जाने वाला खाना घर ले जा रहे हैं।

शर्मिष्ठा का क्यों हुआ बहिष्कार?

शर्मिष्ठा एक स्नातक हैं और अपने परिवार में सबसे बड़ी हैं। उन्हें इस नौकरी के लिए प्रति माह ₹5,000 मिलते हैं और वह अपनी नौकरी से संतुष्ट हैं। जब इस मामले में ‘इंडियन एक्सप्रेस’ ने उनसे बात करने की कोशिश की तो उन्होंने मना कर दिया।

एक अन्य आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, लीजा रानी पांडव ने ‘इंडियन एक्सप्रेस’ से बातचीत में बताया कि गांव के कुछ लोग शर्मिष्ठा की रसोइया के रूप में नियुक्ति से खुश नहीं थे। इस आंगनबाड़ी केंद्र में 6 महीने से 3 साल तक के 22 बच्चे और 3 से 6 साल आयु वर्ग के कई बच्चे नामांकित हैं। यहां बच्चों को खाने में सत्तू और अंडा दिया जाता है। वे कहती हैं कि यहां ऐसी व्यवस्था चल रही है कि बड़े बच्चे आंगनबाड़ी आते हैं, जबकि छोटे बच्चों के माता-पिता खाना लेकर घर चले जाते हैं। लीजा रानी के मुताबिक, फिलहाल बड़े बच्चों ने भी केंद्र आना बंद कर दिया है और केवल दो परिवार ही राशन घर ले जा रहे हैं।

क्या अपना रुख बदलेंगे गांव वाले?

उनके अनुसार, बीडीओ और शर्मिष्ठा ने गांव वालों को समझाने की कोशिश की, लेकिन वे नहीं माने। ओडिशा के केंद्रपाड़ा की चाइल्ड डेवलपमेंट प्रोजेक्ट ऑफिसर, दीपाली मिश्रा ने ‘इंडियन एक्सप्रेस’ को बताया कि कुछ माता-पिता ने अब अपने बच्चों को दोबारा आंगनबाड़ी भेजना शुरू कर दिया है, जबकि कुछ ने तीन दिन का समय मांगा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि जल्द ही यह समस्या सुलझ जाएगी।