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दलाई लामा ने खुद को बताया ‘भारत का सपूत’, कहा- भारत ‘गुरू’ है और लोग चेले

तिब्बती आध्यात्मिक नेता दलाई लामा ने आज स्वयं को ‘भारत का सपूत’ बताते हुए कहा कि भारत ‘गुरू’ है और लोग इसके चेले हैं।

Author बेंगलुरू | May 23, 2017 18:20 pm
तिब्बती आध्यात्मिक नेता दलाई लामा

तिब्बती आध्यात्मिक नेता दलाई लामा ने आज स्वयं को ‘भारत का सपूत’ बताते हुए कहा कि भारत ‘गुरू’ है और लोग इसके चेले हैं। 81 वर्षीय नोबेल पुरस्कार विजेता ने खुद को भारतीय मूल्यों और ज्ञान का दूत भी कहा। पिछले महीने उनकी अरुणाचल प्रदेश की यात्रा पर चीन ने नाराजगी प्रकट की थी। दलाई लामा ने यहां ‘सामाजिक न्याय और डॉ बी आर अंबेडकर’ विषय पर राज्यस्तरीय सेमिनार को संबोधित करते हुए कहा कि सामाजिक न्याय का अभाव जाति के नाम पर होता है, धर्म के नाम पर नहीं। लेकिन यह सामंती व्यवस्था जैसी मौजूदा सामाजिक व्यवस्थाओं के चलते है।

उन्होंने कहा, ‘‘भारत गुरू है और हम चेले हैं। हम विश्वसनीय चेले हैं क्योंकि हमने आपके प्राचीन ज्ञान को सहेज रखा है। उन्होंने कहा, ‘‘मैं खुद को भारत का सपूत भी मानता हूं क्योंकि मेरे मस्तिष्क की हर कोशिका प्राचीन भारतीय ज्ञान से भरी हुई है और मेरा शरीर भारतीय दाल और चावल से चलता है। तिब्बती आध्यात्मिक नेता 1959 से भारत में रह रहे हैं। उन्होंने तिब्बत की राजधानी ल्हासा से 15 दिन तक पैदल चलकर भारत की सीमा में प्रवेश किया था।

दलाई लामा ने कहा कि सांस्कृतिक रूप से यह नकारात्मक पहलू हमारे समाज में विद्यमान है जिसे समाप्त किया जाना चाहिए। धर्म और धार्मिक व्यवस्थाओं के नाम पर कुछ सामंती प्रथाएं हैं जो नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि शिक्षा के माध्यम से जाति से संबंधित अन्याय को समाप्त किया जा सकता है। समाज के कुछ वर्गों में मौजूद असुरक्षा की भावना को शिक्षा के माध्यम से समाप्त किया जाना चाहिए।
दलाई लामा ने कहा, ‘‘जिससे समानता की भावना आए, जिससे आत्मविश्वास का निर्माण हो। आत्मविश्वास, कड़े परिश्रम और शिक्षा से समानता को हासिल किया जा सकता है।

उन्होंने प्राचीन भारतीय मूल्यों और ज्ञान पर कहा कि देश में इन्हें नया रूप दिया जाना चाहिए क्योंकि ये प्राचीन नहीं हैं, बल्कि सर्वाधिक प्रासंगिक हैं। कर्नाटक सरकार के सामाजिक न्याय विभाग द्वारा अंबेडकर की 125वीं जयंती के मौके पर आयोजित सेमिनार में मुख्यमंत्री सिद्धरमैया और लोकसभा में कांग्रेस पार्टी के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने भाग लिया।

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