पंजाब के एक छोटे से गांव में रहने वाले दो किसान भाइयों ने नौ महीने पहले एक बड़ा सपना देखा। परिवार के सहयोग और कुछ उधार लेकर उन्होंने करीब 1 करोड़ की लागत से एक ऑटोमैटिक मिल्क प्रोसेसिंग प्लांट शुरू किया। उनका सपना था कि वे अपना एक भरोसेमंद डेयरी ब्रांड बनाएं। आज उनकी मेहनत रंग ला रही है। एक साल से भी कम समय में उनके डेयरी उत्पादों की मासिक बिक्री लगभग 4 लाख से बढ़कर 27 लाख से ज्यादा हो गई है।
बरनाला जिले के हमीदी गांव के रहने वाले दो भाइयों, जसवीर और सुखदेव सिंह, ने न सिर्फ अपने पूरे संयुक्त परिवार और लगभग एक दर्जन अन्य लोगों के लिए रोजगार पैदा किया, बल्कि कई किसानों को पारंपरिक खेती से हटकर कुछ नया करने के लिए प्रेरित भी किया।
एक करोड़ रुपये इन्वेस्ट किए
जसवीर ने कहा, “पंजाब के हजारों परिवारों की तरह, हमारे बच्चे भी स्कूल की पढ़ाई पूरी करने के बाद आगे की पढ़ाई के लिए विदेश जाना चाहते थे। हमने हिसाब लगाया कि चारों बच्चों को विदेश भेजने के लिए शुरू में ही 1 करोड़ से ज्यादा की जरूरत होगी। हमने उन्हें समझाया कि विदेश में भी अपनी पढ़ाई और रहने-सहने का खर्च उठाने के लिए उन्हें कड़ी मेहनत करनी ही पड़ेगी। इसलिए, हमने सोचा कि क्यों न उतनी ही रकम यहीं इन्वेस्ट करें, परिवार के साथ रहें, कड़ी मेहनत करें और अपना खुद का कुछ बनाएं।”
जसवीर का मानना है कि इस फैसले ने उनकी जिंदगी बदल दी। इन दोनों भाइयों के अलावा, परिवार के सभी सदस्य भी इस कारोबार में सक्रिय रूप से हिस्सा लेते हैं। इनमें उनकी मां जसविंदर कौर, जसवीर की पत्नी करमजीत कौर, सुखदेव की पत्नी सिमरनजीत कौर, बेटे बलराज सिंह, सुखराज सिंह और गुरजोत सिंह और बेटी हरमनजोत कौर शामिल हैं। परिवार की नई पीढ़ी पढ़ाई के साथ-साथ कारोबार के अलग-अलग कामों की जिम्मेदारियां भी संभालती है।
लेकिन, यह कहानी प्रोसेसिंग प्लांट बनने से बहुत पहले ही शुरू हो गई थी। परिवार के पास सिर्फ दो एकड़ जमीन थी, जिस पर उनके पिता सब्जियां उगाते थे और उनके बड़े बेटे उपज बेचने में उनकी मदद करते थे।
जसवीर ने 17 साल तक भारतीय सेना में सेवा की
जसवीर ने 17 साल तक भारतीय सेना में सेवा की और 2015 में रिटायर हुए। जसवीर ने बताया, “घर लौटने के बाद हमने कुछ अलग करने के बारे में सोचा और चार भैंसों के साथ एक छोटी डेयरी शुरू की, क्योंकि सुखदेव ने डेयरी फार्मिंग की ट्रेनिंग ली थी। हमने भैंसों की संख्या चार से बढ़ाकर आठ की और धीरे-धीरे इसे 25 से 30 तक पहुंचा दिया। प्रोसेसिंग प्लांट लगाने से पहले, हमारा मुख्य ध्यान दूध के उत्पादन पर था।”
बदलाव तब आया जब दोनों भाइयों ने अपने गांव और बाद में लुधियाना में डेयरी डेवलपमेंट सेमिनार में हिस्सा लिया। वहां उनकी मुलाकात डेयरी एक्सपर्ट्स से हुई, जिनमें गुरु अंगद देव वेटरनरी एंड एनिमल साइंसेज यूनिवर्सिटी की प्रोफ़सर गोपिका तलवार भी शामिल थीं। उन्होंने भाइयों को सलाह दी कि वे सिर् कच्चा दूध बेचने के बजाय ज्यादा मुनाफे के लिए डेयरी से जुड़े दूसरे प्रोडक्ट्स (वैल्यू-एडेड प्रोडक्ट्स) बनाने पर ध्यान दें।
इसके बाद जसवीर ने एक हफ्ते की ट्रेनिंग ली और मॉडर्न डेयरी ऑपरेशन्स को समझने के लिए वेरका प्लांट समेत कई डेयरी प्रोसेसिंग यूनिट्स का दौरा किया। उन्होंने कहा, “ट्रेनिंग ने हमारा नजरिया पूरी तरह बदल दिया। डेयरी प्रोसेसिंग की संभावनाओं को देखते हुए परिवार ने एक बड़ा कदम उठाने का फैसला किया।”
उन्होंने ऑटोमैटिक मिल्क प्रोसेसिंग यूनिट लगाने में लगभग 1 करोड़ का निवेश किया, जिसमें शुरुआती प्रोजेक्ट कॉस्ट के तौर पर करीब 90 लाख शामिल थे। भाइयों ने प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP) के तहत पांच साल के लिए 40 लाख का लोन लिया और इस स्कीम के तहत उन्हें 10 लाख की सब्सिडी भी मिली। बाकी निवेश का इंतजाम रिश्तेदारों, दोस्तों और गांव वालों से उधार लेकर किया गया, जिन्हें परिवार की सोच पर भरोसा था।
डेयरी प्लांट अगस्त 2025 में शुरू हुआ
डेयरी प्लांट अगस्त 2025 में शुरू हुआ और इसे ‘मिल्को फोर्ट’ ब्रांड नाम से रजिस्टर किया गया। इस प्लांट में आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर है, जिसमें लेबोरेटरी, बल्क मिल्क कूलर (BMC), डंप टैंक, होमोजेनाइजर, होल्डिंग सिस्टम, हॉट रूम और कोल्ड रूम जैसी सुविधाएं शामिल हैं।
शुरुआत में, यह यूनिट रोजाना मुश्किल से 200 लीटर दूध प्रोसेस करती थी, लेकिन अब यह बढ़कर लगभग 1500 लीटर हो गई है, क्योंकि मांग लगातार बढ़ रही है। प्लांट की क्षमता रोजाना 8000 लीटर दूध प्रोसेस करने की है, जिससे भविष्य में विस्तार की काफी गुंजाइश दिखती है। यह डेयरी कई तरह के पारंपरिक उत्पाद बनाती है, जिनमें दही, क्रीम, पनीर, देसी घी, मक्खन, खोया और पंजीरी शामिल हैं।
लगभग 800 से 900 लीटर दूध से दही बनाया जाता है
हर दिन, लगभग 800 से 900 लीटर दूध से दही बनाया जाता है। इसके अलावा, काफी मात्रा में दूध का इस्तेमाल लगभग एक क्विंटल पनीर और दूसरे वैल्यू-एडेड उत्पाद बनाने में भी होता है। पनीर 300-350 रुपये प्रति किलोग्राम, दही लगभग 60 रुपये प्रति किलोग्राम और देसी घी लगभग 800 प्रति किलोग्राम के भाव से बिकता है। रोजाना की बिक्री 90000 से 1 लाख के बीच होती है।
परिवार हर महीने लोन की किश्त के तौर पर लगभग 75,000 चुकाता है और साथ ही अपने कारोबार को भी बढ़ाता जा रहा है। जसवीर ने कहा, “शुरुआत में, हम सिर्फ अपनी भैंसों के दूध का इस्तेमाल करते थे। बाद में, हमने गांव वालों और आस-पास के गांवों के लोगों से दूध इकट्ठा करना शुरू किया, लेकिन इस शर्त पर कि दूध में कोई मिलावट नहीं होनी चाहिए।” प्लांट में आने वाले दूध की पहले लैब में जांच की जाती है और फिर उसे स्वीकार किया जाता है। यह प्लांट पूरी तरह से रजिस्टर्ड है।
वे कहते हैं, “हमने पहले दिन ही तय कर लिया था कि क्वालिटी से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। ग्राहक शायद उत्सुकता में आ जाएं, लेकिन वे तभी दोबारा आते हैं जब उन्हें प्रोडक्ट पर भरोसा होता है।” हालांकि, मंथली सेल 27 लाख से ज्यादा हो गई है और खर्च निकालने के बाद बिजनेस 10 परसेंट से ज्यादा के प्रॉफिट मार्जिन पर चल रहा है, फिर भी परिवार की पहली प्राथमिकता पर्सनल फाइनेंशियल फायदे के बजाय कर्ज चुकाना और बिजनेस को बढ़ाना है।
बिजनेस ने डिजिटल मार्केटिंग को भी अपनाया
बिजनेस ने डिजिटल मार्केटिंग को भी अपनाया है। आधे दर्जन जिलों में डीलर्स और व्हाट्सएप के जरिये ऑर्डर तेजी से आ रहे हैं, जबकि जिले के बाहर प्रोडक्ट पहुंचाने के लिए कूरियर सर्विस का इस्तेमाल किया जा रहा है। सुखदेव ने कहा, “सर्दियों के मौसम में, कई एनआरआई ने पंजीरी, देसी घी और खोया जैसे पारंपरिक प्रोडक्ट के लिए ऑर्डर दिए, जिससे परिवार को पंजाब से बाहर भी अपना कस्टमर बेस बढ़ाने में मदद मिली।”
सेल में तेजी से हुई बढ़ोतरी के साथ-साथ लॉजिस्टिक्स में भी काफी इन्वेस्टमेंट किया गया है। सुखदेव के बेटे गुरजोत ने कहा, “हमने दूध इकट्ठा करने और प्रोडक्ट डिस्ट्रीब्यूशन के लिए पहले ही चार कमर्शियल गाड़ियां खरीद ली हैं।” हालांकि, परिवार आज भी आत्मनिर्भर ग्रामीण जीवनशैली अपनाए हुए है।
यह भी पढ़ें: पंजाब में हाई-रिस्क डिलीवरी और नवजात शिशु देखभाल को मिला बड़ा सहारा
पंजाब में भगवंत मान सरकार की ‘मुख्यमंत्री सेहत योजना’ के माध्यम से हाई-रिस्क गर्भावस्था एवं नवजात शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को विशेष रूप से मज़बूती मिल रही है। यह योजना जटिल प्रसव और गम्भीर रूप से बीमार नवजात शिशुओं के इलाज को परिवारों के लिए बिना किसी आर्थिक बोझ के सुलभ बना रही है। यहां क्लिक कर पढ़ें पूरी खबर…
