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दही-हांडी के आयोजकों को झटका, सुप्रीम कोर्ट का संशोधन से इनकार

न्यायमूर्ति एआर दवे, न्यायमूर्ति यूयू ललित और न्यायमूर्ति एल नागेश्वर राव की पीठ ने मुंबई के एक संगठन की याचिका को खारिज करते हुए कहा- नहीं, हम फिलहाल इसमें संशोधन नहीं करने जा रहे हैं।

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प्रसिद्ध ‘दही-हांडी’ के आयोजकों को झटका देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने अपने उस आदेश में संशोधन करने से बुधवार को इनकार कर दिया, जिसमें जन्माष्टमी के अवसर पर समूचे महाराष्ट्र में आयोजित किए जाने वाले ‘दही-हांडी’ के कार्यक्रम में मानव पिरामिड की अधिकतम ऊंचाई 20 फुट निर्धारित कर दी गई थी। न्यायमूर्ति एआर दवे, न्यायमूर्ति यूयू ललित और न्यायमूर्ति एल नागेश्वर राव की पीठ ने मुंबई के एक संगठन की याचिका को खारिज करते हुए कहा- नहीं, हम फिलहाल इसमें संशोधन नहीं करने जा रहे हैं।

संगठन ने दावा किया था कि मानव पिरामिड की ऊंचाई की सीमा निर्धारित कर दिए जाने से त्योहार से रोमांच खत्म हो जाएगा। यह पश्चिमी महानगर में लोकप्रिय और प्रतिस्पर्धी खेल बन गया है। 17 अगस्त को शीर्ष अदालत ने हाई कोर्ट द्वारा लगाई गई शर्तों में ढील देने से मना कर दिया था। हाई कोर्ट ने महाराष्ट्र में ‘दही-हांडी’ के कार्यक्रम में 18 साल से कम आयु के व्यक्ति की भागीदारी पर रोक लगा दी थी। साथ ही मानव पिरामिड की अधिकतम ऊंचाई 20 फुट निर्धारित की थी।

शुरुआत में पीठ ने इस दलील से सहमति नहीं जताई कि इस कार्यक्रम ने लोकप्रिय खेल का रूप ले लिया है और इस तथ्य के मद्देनजर पिरामिड की ऊंचाई पर रोक नहीं लगाई जानी चाहिए कि अदालत ने पहले ही इसमें 18 साल से कम आयु के युवकों के हिस्सा लेने पर रोक लगा दी है। न्यायमूर्ति दवे ने कहा- क्या यह (कार्यक्रम ने) ओलंपिक में कोई पदक लाया है। मैं शहर का रहने वाला हूं, अगर यह कोई पदक लाया होता तो मैं खुश होता।

न्यायमूर्ति दवे ने कहा कि इसकी वजह से कई प्रतिभागियों को कई बार गंभीर चोट आई है। खासतौर पर मेरूदंड जैसे अंगों में गंभीर चोट आई है। जोगेश्वरी के ‘जय जवान क्रीड़ा मंडल गोविंदा पाठक’ के वकील ने कहा कि 43.79 फुट ऊंचे मानव पिरामिड का गिनीज बुक आॅफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में सर्वोच्च मानव पिरामिड के तौर पर उल्लेख किया गया है और इसकी ऊंचाई निर्धारित करना अनुचित होगा। उन्होंने कहा कि 1500 से अधिक संगठन इस अदालत की ओर देख रहे हैं, क्योंकि अधिकतम ऊंचाई तय कर देने से खेल की प्रतिस्पर्धात्मकता खत्म हो जाएगी।

पीठ ने संगठन के वकील से पूछा- आप 1499 अन्य संगठनों की तरफ से आश्वासन नहीं दे सकते कि उचित खयाल रखा जाएगा। इसके अलावा, यह दावा किया गया है कि पिछले साल इस कार्यक्रम में 1500 लोग घायल हो गए। क्या यह सही है। पिछले साल कितने लोग घायल हुए थे। महाराष्ट्र सरकार की तरफ से अतिरिक्त महान्यायवादी तुषार मेहता ने कहा कि जोखिम हर खेल में है और घायल लोगों के संबंध में कोई आंकड़ा रिकॉर्ड में नहीं है।

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