Solapur News: धनाश्री पवार अपनी कक्षा 10 की बोर्ड परीक्षा देने ही वाली थीं कि परीक्षा के पहले दिन सुबह ही उनके पिता का दुखद निधन हो गया। लीवर की बीमारी से पीड़ित भीकाजी पवार का 12 फरवरी को डायलिसिस का पहला सेशन हुआ था। 20 फरवरी को उनका निधन हो गया।
धनाश्री ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया, “मेरी हालत मराठी परीक्षा देने की नहीं थी। मेरा परिवार मुझे परीक्षा देने के लिए मनाने की कोशिश कर रहा था, लेकिन मैंने कहा कि मैं दोबारा परीक्षा में पास हो जाऊंगी। हालांकि, मेरे स्कूल (सोलापुर के शरद चंद्र पवार स्कूल) के प्रधानाचार्य तानाजी माने ने मुझे समझाया कि अगर मैं परीक्षा नहीं दूंगी तो मेरा पूरा साल बर्बाद हो जाएगा।”
मेरे पिता की इच्छा थी उनकी बेटी पढ़े-लिखें- धनाश्री
धनाश्री ने कहा, “उन्होंने कहा कि मेरे पिता की इच्छा थी कि उनकी बेटी पढ़े-लिखे, इसलिए मैं परीक्षा देने चली गई। मैं उनके साथ परीक्षा केंद्र तक गई और उन्होंने ही मुझे वापस छोड़ा। जब मैंने परीक्षा दी तब शव घर पर था और मेरे वापस आने के बाद अंतिम संस्कार किया गया।”
मैंने सिर्फ डेढ़ घंटे में परीक्षा दी- धनाश्री
उसने आगे कहा, “मैंने सिर्फ डेढ़ घंटे में परीक्षा दी और 65 अंक प्राप्त किए। मुझे बहुत खुशी हो रही है। मेरे पिताजी भी बहुत खुश होते।” धनाश्री के बड़े भाई विजय पवार ने कहा, “उसकी बहन भी उसी समय 12वीं कक्षा की परीक्षा दे रही थी। मुझे पता था कि दोनों परीक्षा पास कर लेंगी। घर पर पिताजी के अंतिम संस्कार की तैयारियां चल रही थीं। मेरी बहन की पहली परीक्षा उसी दिन थी और उसके प्रधानाचार्य माने सर को पता चला कि पिताजी का निधन हो गया है। ताकि उसका एक साल बर्बाद न हो, उन्होंने उसे परीक्षा देने के लिए भेज दिया।”
कक्षा 9 में ही छोड़ दिया था स्कूल
यह कहानी उत्तर प्रदेश के सहारनपुर की रहने वाली 24 साल की उद्यमी हर्षिता अरोरा की है। जिसने सहारनपुर से सिलिकॉन वैली का तक का सफर तय किया। हर्षिता को सिलिकॉन वैली के सबसे प्रभावशाली स्टार्टअप एक्सेलरेटर में से एक वाई कॉम्बिनेटर (वाईसी) में सबसे कम उम्र की जनरल पार्टनर नामित किया गया है। पढ़ें पूरी खबर…
