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राहत में बड़ा घपला: नौ परिवारों का एक पिता, मृत और पक्के घरों के रसूखदार मालिक के भी नाम

आधिकारिक रिकॉर्ड की जांच और हावड़ा के उलूबेरिया में घरों का दौरा करने पर पता चला कि कैसे एक व्यक्ति को एक पंचायत में विभिन्न परिवारों और विभिन्न धर्मों के नौ लाभार्थियों के पिता के रूप में सूचीबद्ध किया गया।

Amphan fundsदिपाली मंडल के पास पक्का घर है। (Express Photo by Partha Paul)

पश्चिम बंगाल के कालीनगर ग्राम पंचायत में चक्रवाती तूफान अम्फान से क्षतिग्रस्त हुए मकानों का मुआवजा पाने के लिए लाभार्थियों की अंतिम सूची में जो तीन नाम है उनके पिता एक ही हैं। ये नाम हैं सुरजीत साधुखन (पिता-कालीपदो दास), दिपाली मंडल (पिता- कालीपदो दास) और उत्तम बेरा (पिता- कालीपदो दास)। द इंडियन एक्सप्रेस की एक जांच में पता चला है कि कालीपदो दास सिर्फ कागज पर ही मौजूद हैं और लाभार्थियों से इनका कोई संबंध नहीं है और तीनों के ही कंक्रीट के घर हैं जो तूफान में खड़े रहे।

आधिकारिक रिकॉर्ड की जांच और हावड़ा के उलूबेरिया में घरों का दौरा करने पर पता चला कि कैसे एक व्यक्ति को एक पंचायत में विभिन्न परिवारों और विभिन्न धर्मों के नौ लाभार्थियों के पिता के रूप में सूचीबद्ध किया गया। कैसे मुआवजे के लिए आधिकारिक रिकॉर्ड में मृतक व्यक्ति जिंदा हो जाता है। बता दें कि उलूबेरिया चक्रवात से सबसे बुरी तरह प्रभावित क्षेत्रों में से एक है।

बुधवार को द इंडियन एक्सप्रेस ने रिपोर्ट कि कैसे इन जिलों में ग्राम पंचायतों, पंचायत समितियों और जिला परिषदों के राजनीतिक रूप से शक्तिशाली सदस्यों के रिश्तेदारों को मुआवजे के लिए मंजूरी दे दी गई। भले ही आवेदकों के घरों को कोई नुकसान ना हुआ हो। जिस तरह से पैसे का भुगतान किया गया है इससे स्पष्ट रूप से अनियमितताओं के बारे में पता चलता है।

उलुबेरिया के कलिनगर सिर्फ एक नाम के बारे में ऐसा नहीं है। लाभार्थियों की आधिकारिक सूची (मसीर रहमान मुल्लिक से लेकर एसके मतलाब) में तरुण परमानिक को उनके पिता के रूप में सूचीबद्ध किया गया है। लिस्ट में शेख नजरुल का भी नाम है जिनकी 49 साल की उम्र में अक्टूबर 1027 में मृत्यु हो चुकी है।

नजरुल के बेटे जहीरुल कहते हैं कि मेरे पिता की तीन साल पहले मौत हो चुकी है। मुझे नहीं पता लिस्ट में उनका नाम कैसे आया। हमने मुआवजे के लिए भी कोई आवेदन नहीं किया है। जहीरुल की मां अजमेरी का कहना है कि उनके पति की पासबुक उनकी मृत्यु के बाद ‘बैंक के पास’ थी। मुआवजे के लिए उनका नाम आने के बाद, पंचायत सदस्य के पति उन्हें बैंक ले गए और पासबुक वापस मिल गई।

दो मिनट की दूरी पर खोदजा बेगम का घर है जो हतप्रभ हैं, कहती हैं कि मेरी बहन सुरैया परवीन को इस पते पर एक लाभार्थी के रूप में सूचीबद्ध किया गया है। जबकि 15 साल पहले उसकी मौत हो चुकी है। वो अपने पति के घर पर रहती थी। ये उसका पैतृक घर है। मुझे नहीं पता क्या हो रहा है। हमने किसी तरह के मुआवजे के लिए सरकार के पास आवेदन नहीं किया। वो कहती हैं, ‘पंचायत से पूछो, उन्होंने ही लिस्ट बनाई है।’

बता दें कि चक्रवात अम्फान 20 मई को पश्चिम बंगाल के एक बड़े हिस्से को बहा ले गया। इसके बाद जून की शुरूआत में राज्य सरकार ने राहत और पुनर्निर्माण फंड जारी किया था। इसमें 2,400 करोड़ रुपए पांच लाख लोगों के घर निर्माण सहायता के लिए जारी किए गए। इसमें 20,000 रुपए डायरेक्ट ट्रांसफर और 100 दिनों के काम के बराबर मजदूरी के रूप में प्रति व्यक्ति 28,000 रुपए की सहायता शामिल है।

इधर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बुधवार को दावा किया कि चक्रवात अम्फान प्रभावित 99 फीसदी क्षेत्रों में लोगों को मुआवजा मिल चुका है और अब केवल कुछ वंचित ही इसे अब तक प्राप्त नहीं कर पाए हैं। उनकी टिप्पणी ऐसे समय आई है जब मुआवजा वितरण में खामी को लेकर लगातार प्रदर्शन हो रहे हैं।

बनर्जी ने कहा कि हो सकता है कि मुआवजा वितरण के समय कुछ ‘छोटी मोटी गलतियां’ हुई हों, इसलिए उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि गलत लोगों को गया धन वापस लिया जाए और इसे असल पीड़ितों को दिया जाए।

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