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हफ्ते भर पहले पीएम ने दुनिया से कराई थी पहचान, फिर गरीबी में लौटा ये चायवाला

देवरापल्ली प्रकाश राव राज्य स्तर पर पहले भी अपने इस नेक काम के लिए कई अवार्ड जीत चुके हैं। इसमें साल 2016 में मिला मानवाधिकार अवार्ड और साल 2015 में मिला एनी बेसेंट अवार्ड प्रमुख हैं।

Author June 3, 2018 1:26 PM
देवरापल्ली प्रकाश राव को कई पुरस्कारों से भी नवाजा जा चुका है। (express photo)

Sampad Patnaik

कटक के बक्शी बाजार इलाके में एक छोटी सी चाय की दुकान चलाने वाले देवरापल्ली प्रकाश राव, हफ्ते भर पहले अचानक ही तब चर्चाओं में आ गए थे, जब पीएम मोदी ने उनसे मुलाकात की थी। दरअसल अपने उड़ीसा दौरे के दौरान कटक के किला पाडिया में हुई अपनी रैली से पहले पीएम मोदी ने देवरापल्ली प्रकाश राव से मुलाकात की थी। बता दें कि देवरापल्ली प्रकाश राव वैसे तो चाय बेचकर अपनी जीविका चलाते हैं, लेकिन ये उनके जज्बे का ही कमाल है कि वह चाय बेचकर होने वाली अपनी 700 रुपए की प्रतिदिन आय में से आधे पैसों से एक स्कूल चलाते हैं, जिसमें झुग्गी-झोपड़ी में रहने वाले बच्चे पढ़ते हैं। प्रकाश राव यह स्कूल साल 2000 से चला रहे हैं। प्रकाश राव की तारीफ करने और उन्हें प्रोत्साहित करने के लिए ही पीएम मोदी ने प्रकाश राव से मुलाकात की थी। इतना ही नहीं पीएम मोदी ने एक ट्वीट भी किया, जिसमें उन्होंने प्रकाश राव और उनके स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों की तस्वीर शेयर की थी। पीएम मोदी के इस ट्वीट को करीब 8000 लोगों ने लाइक किया और 1700 लोगों ने रिट्वीट किया। लेकिन कुछ दिन प्रसिद्धि में रहने के बाद एक बार फिर देवरापल्ली खबरों से गायब हो चुके हैं और वापस अपनी आम दिनचर्या में लौट चुके हैं।

मन की बात कार्यक्रम में भी पीएम मोदी ने प्रकाश राव का जिक्र किया था। हालांकि देवरापल्ली प्रकाश राव राज्य स्तर पर पहले भी अपने इस नेक काम के लिए कई अवार्ड जीत चुके हैं। इसमें साल 2016 में मिला मानवाधिकार अवार्ड और साल 2015 में मिला एनी बेसेंट अवार्ड प्रमुख हैं। देवरापल्ली प्रकाश राव का स्कूल ‘आशा ओ आश्वासन स्कूल’ उनके 2 कमरे के मकान के ठीक पीछे हैं, जहां आर्थिक रुप से कमजोर बच्चे अपना भविष्य संवारने की कोशिशों में जुटे हैं। इस स्कूल में 74 बच्चे और 6 महिला टीचर हैं। अधिकतर बच्चे नजदीकी की झुग्गी झोपड़ियों से यहां पढ़ने आते हैं।

देवरापल्ली प्रकाश का कहना है कि जिस जमीन पर स्कूल चलता है, वह धाराकोटे शाही परिवार की जमीन है। राव का कहना है कि अभी तक शाही परिवार को उनकी जमीन के इस्तेमाल पर कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन वहां से बेदखल होने की संभावना हमेशा रहती है। मार्च 2013 से लेकर 17 महीनों तक स्कूल को नेशनल चाइल्ड लेबर प्रोजेक्ट (एनसीएलपी) के तहत सरकार की तरफ से किताबों और मुफ्त खाने की सहायता मिली, लेकिन 2014 में केन्द्र सरकार ने एनसीएलपी योजना को बंद कर दिया, जिससे फिर से राव पर स्कूल के खर्चों का बोझ बढ़ गया। हालांकि कुछ सामाजिक सरोकार से जुड़े लोगों से कभी कभी आर्थिक सहायता मिल जाती है लेकिन यह नाकाफी होती है। देवरापल्ली प्रकाश राव का यह स्कूल नर्सरी से कक्षा 3 तक है, उसके बाद प्रकाश राव स्कूल के बच्चों को आगे की पढ़ाई के लिए किसी सरकारी स्कूल में दाखिला दिलाने में भी मदद करते हैं।

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