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बीमार आदिवासी महिला की जान बचाने स्ट्रेचर लेकर सात किलोमीटर पैदल चले CRPF के जवान

सीआरपीएफ के जवानों ने देखा कि महिला बुखार से तप रही है और रो रही है। वहां उसकी मदद के लिए पति या रिश्तेदार मौजूद नहीं थे। करीब ही दो माह का बच्चा भी था।

Author रायपुर | September 5, 2017 05:17 am
छत्‍तीसगढ़ के नक्‍सल प्रभावित इलाके में सीआरपीएफ जवान। (PTI Photo)

छत्तीसगढ़ के नक्सल पीड़ित दंतेवाड़ा जिले में नक्सलियों का मुकाबला कर रहे सीआरपीएफ के जवानों ने बीमार आदिवासी महिला की जान बचाने के लिए स्ट्रेचर लेकर सात किलोमीटर का सफर पैदल तय किया। महिला की हालत खतरे से बाहर है।  केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के वरिष्ठ अधिकारियों ने यहां बताया कि दंतेवाड़ा जिले के कटेकल्याण क्षेत्र में अर्धसैनिक बल को गश्त के लिए रवाना किया गया था। जब दल रविवार को शिविर में लौट रहा था तब उन्हें नयनार गांव में एक महिला के बीमार होने की जानकारी मिली। इसके बाद सीआरपीएफ के जवान आदिवासी महिला कोसी (39) के घर पहुंचे। सीआरपीएफ के जवानों ने देखा कि महिला बुखार से तप रही है और रो रही है। वहां उसकी मदद के लिए पति या रिश्तेदार मौजूद नहीं थे। करीब ही दो माह का बच्चा भी था। अधिकारियों ने बताया कि नयनार गांव पहाड़ियों और नदी से घिरा हुआ है। सड़क को नक्सलियों ने क्षतिग्रस्त कर दिया है।

जवानों ने महिला को वहां से अस्पताल पहुंचाने के लिए हेलिकॉप्टर की मदद लेने पर भी विचार किया लेकिन भौगोलिक स्थिति को देखते हुए यह मुश्किल था।
उन्होंने बताया कि इसके बाद सीआरपीएफ के जवानों ने लकड़ी का स्ट्रेचर तैयार किया और उसमें महिला को लेकर पहाड़ी और नदी पार करते हुए सात किलोमीटर गाटम गांव तक लाया गया। यहां से उसे 108 एंबुलेंस की मदद से कटेकल्याण स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया गया। अधिकारी ने बताया कि महिला और उसके बच्चे को अस्पताल में भर्ती करा दिया गया है और वे अभी खतरे से बाहर हैं।

छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित बस्तर क्षेत्र में बड़ी संख्या में अर्धसैनिक बल के जवान तैनात हैं। सीआरपीएफ ने इस इलाके में चार क्षेत्रीय अस्पताल की भी स्थापना की है जहां ग्रामीण इलाज के लिए पहुंचते हैं। वहीं नक्सल विरोधी अभियान में निकले जवान कोशिश करते हैं कि वे ग्रामीण आदिवासियों की मदद कर सकें। इस दुर्गम इलाके में ज्यादातर सड़कों और पुल-पुलियों को नक्सलियों ने क्षतिग्रस्त कर दिया है। ऐसे में बीमार आदिवासियों को अस्पताल तक पहुंचाना मुश्किल कार्य है।

 

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