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मुठभेड़ में घायल हुए नक्सली की सीआरपीएफ ने बचाई जान, जरूरत पड़ने पर दिया खून

झारखंड में नक्सलियों की समस्या अब भी जारी है ऐसे में अक्सर सीआरपीएफ के साथ उनकी मुठभेड़ होती रही है। ऐसी ही एक मुठभेड़ 29 जनवरी को 209 कोबरा बटालियन की नक्सलियों के साथ हुई थी जिसमें पांच नक्सली मारे गए जबकि दो घायल हुए।

Author February 5, 2019 8:22 PM
प्रतीकात्मक फोटो, फोटो सोर्स- इंडियन एक्सप्रेस

झारखंड में नक्सलियों की समस्या अब भी जारी है ऐसे में अक्सर सीआरपीएफ के साथ उनकी मुठभेड़ होती रही है। ऐसी ही एक मुठभेड़ 29 जनवरी को 209 कोबरा बटालियन की नक्सलियों के साथ हुई थी जिसमें पांच नक्सली मारे गए जबकि दो घायल हुए। घायल नक्सलियों को रांची के राजेंद्र इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस में भर्ती कराया गया। जहां डॉक्टर ने एक नक्सली सोमोपूर्ति की हालत गंभीर बताते हुए कहा कि यदि इसे खून नहीं मिला तो इसकी मौत हो जाएगी। ये बात सुनते ही  सीआरपीएफ के एक जवान ने उसे अपना खून देकर मदद की।

133 बटालियन के राजकमल ने बचाई जान: जरूरतमंद को खून की जरूरत की बात जैसे ही झारखंड में स्थित 133 बटालियन को पता लगी तो सीआरपीएफ के कांस्टेबल राजकमल एक खूंखार नक्सली की जान बचाने के लिए रक्तदान करने को तैयार हो गए। हालांकि वो भी इस बात को मानते थे कि इस नक्सली ने उसके कितने साथियों यानी सुरक्षाबलों को मारा होगा, लेकिन इसके बावजूद इंसानियत दिखाते हुए वो अस्पताल में खून देने चले गए।

मौके पर शव को नहीं छोड़ते नक्सलीः ऐसा कहा जाता है कि नक्सली अपने किसी घायल साथी या दम तोड़ चुके नक्सली का शव मौके पर नहीं छोड़ते। वे उसे अपने साथ लेकर जाते हैं। इस बार भी कुछ नक्सली अपने घायल साथी को लेकर जा रहे थे। सीआरपीएफ झारखंड सेक्टर के आईजी संजय लाटकर ने बताया कि हमारे जवानों ने जब उस नक्सली की हालत देखी तो उन्होंने फायरिंग के बीच अपनी जान जोखिम में डालकर घायल नक्सली को अपने कब्जे में ले लिया। उसके शरीर से लगातार खून बह रहा था। जिसके बाद घायल को जवानों ने तुरंत अस्पताल पहुंचाया।

सीआरपीएफ नक्सली प्रभावित क्षेत्रों में भी करती है विकास का कामः आईजी संजय लाटकर बताते हैं कि सीआरपीएफ केवल नक्सलियों से लड़ाई ही नहीं करती बल्कि लोगों के विकास के लिए भी काम करती है। पीने के पानी से लेकर , बिजली की जरूरत पूरी करने तक का ध्यान सीआरपीएफ रखती है। यही नहीं स्कूल चलाने से लेकर लोगों के स्वास्थ्य तक का पूरा ख्याल रखा जाता है। इस बार 26 जनवरी के मौके पर सीआरपीएफ ने 1100 यूनिट रक्तदान किया।

पहले भी करते रहे हैं मददः दरअसल ये पहली बार नहीं है जब किसी सैनिक ने मानवता का परिचय देते हुए किसी की जान बचाई है। रांची के राजेंद्र इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस में जब भी डॉक्टरों को किसी जरुरतमंद के लिए खून की आवश्यकता पड़ती है तो वे सीआरपीएफ को संदेश भेज देते हैं। इससे पहले 8 फरवरी 2018 को झारखंड के पलामू जिले में 134 बटालियन के सैनिकों के साथ मुठभेड़ में एक नक्सली महिला मंजू बैगा गंभीर रूप से घायल हो गई। महिला नक्सली को उसी बटालियन के कांस्टेबल गुलज़ार ने खून दिया जिस पर महिला ने हमला किया था। आईजी लाटकर ने कांस्टेबल राजकमल की सराहना करते हुए उन्हें प्रशंसा पत्र भेंट किया और दो हजार रूपये का नकद इनाम देकर पुरस्कृत किया।

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