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अफस्पा कानून निरस्त करे सरकार: CPI

उच्चतम न्यायालय के फैसले कि अफस्पा के तहत सुरक्षाबलों द्वारा अत्यधिक बल प्रयोग मान्य नहीं है का हवाला देते हुए माकपा ने इस कठोर कानून को निरस्त करने की मांग की।

Author नई दिल्ली | July 9, 2016 9:56 PM
भारतीय कम्यूनिस्ट पार्टी। (फाइल फोटो)

उच्चतम न्यायालय के इस फैसले का कि अफस्पा के तहत सुरक्षाबलों द्वारा अत्यधिक बल प्रयोग मान्य नहीं है, हवाला देते हुए माकपा ने आज कहा कि यह अनिवार्य है कि केंद्र इस पर ध्यान दे और इस कठोर कानून को निरस्त करे। मणिपुर में 2000-2012 के दौरान सुरक्षाबलों और पुलिस द्वारा की गयी कथित 1528 न्यायेत्तर हत्याओं पर एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कल शीर्ष अदालत ने कहा था कि इस पूर्वोत्तर राज्य की स्थिति कभी युद्ध जैसी नहीं रही।

माकपा ने कहा कि सशस्त्र बल :विशेषाधिकार: अधिनियम :अफस्पा: पर उच्चतम न्यायालय का फैसला इस बात को रेखांकित करता है कि कैसे यह कठोर कानून नागरिकों के जीवन की सुरक्षा के लिए खतरा है। उसने एक बयान में कहा, ‘‘अदालत ने कहा है कि ऐसी हत्याएं कानून के शासन के लिए विध्वंसक है और स्पष्ट रूप से असंवैधानिक है। ऐसे में यह अनिवार्य है कि सरकार इस फैसले पर ध्यान दे और अफस्पा निरस्त करे। ’’ पिछले साल त्रिपुरा की माकपा सरकार ने यह कहते हुए यह कानून हटा दिया था कि राज्य में उग्रवाद ढलान पर है। राज्य में 1997 से अफस्पा लागू था।

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