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गोवध विरोधी कानून लाएगी कर्नाटक सरकार, मंत्री बोले- गाय हमारे परिवार के सदस्य जैसी, इसकी हत्या अपराध है

प्रदेश के चिकित्सा शिक्षा मंत्री के. सुधाकर ने रविवार (30 अगस्त, 2020) को कहा कि गाय परिवार के सदस्य की तरह है और उन्हें मारना एक 'अपराध' है।

cow slaughterतस्वीर का इस्तेमाल केवल प्रतीकात्मक रूप से किया गया है। (Express Photo by Amit Mehra)

कर्नाटक की भाजपा सरकार राज्य में गोवध विरोधी कानून फिर से लाने पर विचार कर रही है। प्रदेश के चिकित्सा शिक्षा मंत्री के. सुधाकर ने रविवार (30 अगस्त, 2020) को कहा कि गाय परिवार के सदस्य की तरह है और उन्हें मारना एक ‘अपराध’ है। उन्होंने कहा कि गाय का गोबर कीटाणुनाशक के तौर पर काम करता है। उन्होंने कहा कि उनके परिवार के पास पूर्व में कई गायें थीं। गोहत्या को ‘पाप’ करार देते हुए मंत्री ने कहा कि वह मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा से अनुरोध करेंगे कि राज्य में पशु को मारने पर प्रतिबंध लगाएं। उनके कार्यालय की तरफ से जारी एक विज्ञप्ति में कहा गया कि चिक्कबल्लापुरा में एक गौशाला के उद्घाटन के अवसर पर सुधाकर ने कहा, ‘गाय परिवार के एक सदस्य की तरह है और गोवध एक अपराध है।’

उन्होंने कहा कि गोवध के खिलाफ लोगों को जागरुक करने के लिए एक जनआंदोलन की जरूरत है। उन्होंने आगे कहा, ‘भारतीयों के तौर पर, सभी राज्य सरकार को गोवध पर प्रतिबंध लगाना चाहिए।’ सुधाकर ने कहा कि गाय की ‘हमारी संस्कृति में पूजा होती है।’ मवेशियों के मांस के निर्यात पर प्रतिबंध के लिए विधानसभा के दोनों सदनों में चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने कहा, ‘हमारी पार्टी मवेशियों के मांस पर प्रतिबंध के लिए प्रतिबद्ध है और जल्द ही इस पर फैसला लिया जाएगा।’

Unlock 4.0 Guidelines

इससे पहले पशुपालन मंत्री प्रभु चव्हाण ने हाल में कहा था कि अन्य राज्यों की तर्ज पर प्रदेश में भी गोवध, तथा उनके मांस की बिक्री व उपभोग पर प्रतिबंध लगाया जाएगा। उन्होंने कहा कि एक कोरोना वायरस महामारी संकट कम होने के बाद इस मामले को देखने के लिए एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया जाएगा और अगर जरूरत पड़ी तो वह गुजरात और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों का दौरा करेंगे ताकि प्रतिबंध को लागू किया जा सके। भाजपा ने 2018 के विधानसभा चुनाव के लिए अपने घोषणा पत्र में गोहत्या पर प्रतिबंध का वादा किया था।

दरअसल साल 2010 में बीएस यूदियुरप्पा के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार ने पशु वध की रोकथाम और मवेशी संरक्षण विधेयक पारित कर दिया था। हालांकि सत्ता में लौटने के बाद साल 2013 में सिद्धारमैया के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार इस बिल को वापस ले लिया जो राष्ट्रपति के पास लंबित था। अब भाजपा के एक बार फिर सत्ता में लौटने के बाद कई पार्टी ने एक बार फिर गोहत्या विरोधी कानून लाने की मांग करने लगे हैं। (एजेंसी इनपुट)

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