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केरल में गो वंश की हत्या करने वालों का सिर कलम करने वाले को 51 लाख रुपये इनाम

समाजसेवी श्याम नारायण पाठक ने कहा कि यह सब देखने से तो अच्छा है कि बाकी जिंदगी जेल में गुजार लूं।

केंद्र सरकार ने पशु बाजार में बूचड़खानों के लिए जानवरों को खरीदने और बेचने पर रोक लगा दी है, जिसके बाद केरल में इसका विरोध शुरू हो गया था। (File Photo)

झारखंड के पालमू जिले के एक समाजसेवी ने गो वंश की हत्या करने वालों का सिर कलम करने वाले को 51 लाख रुपये का इनाम देने की घोषणा की है। दरअसल हाल ही में केरल में गो वंश की हत्या करने का एक वीडियो सामने आया था। इसके बाद समाज सेवी श्याम नारायण पाठक ने कहा कि ऐसे लोगों का सिर कलम करने वाले को वह 51 लाख रुपये देंगे। उन्होंने एक बयान में कहा कि अपने सामने ऐसा देखने से बेहतर तो यही होगा कि बाकी की जिंदगी जेल में गुजार लूं। श्याम नारायण पाठक कुछ साल पहले तक राजनीति में सक्रिय थे। वह झारखंड विकास मोर्चा के सक्रिय कार्यकर्ता रहे हैं।

आपको बता दें कि केंद्र सरकार ने पशु बाजार में बूचड़खानों के लिए जानवरों को खरीदने और बेचने पर रोक लगा दी है, जिसके बाद केरल में इसका विरोध शुरू हो गया था। हत्या के लिए पशुओं की बिक्री पर केंद्र द्वारा रोक लगाए जाने के फैसले के विरोध में केरल में यूथ कांग्रेस ने सार्वजनिक रूप से एक बछड़े का कत्ल कर दिया। केरल के कन्नूर में हुए गो वंश हत्या मामले में केरल पुलिस ने कांग्रेस के कार्यकर्ता रिजिल मुकुलटी सहित यूथ कांग्रेस के 16 लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया था। इन पर कन्नूर में सरेआम गाय की हत्या का आरोप है।

इसपर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ ने कहा था कि सरकार का एक आदेश जारी होने के बाद केरल में जिस तरह से बीफ पार्टी दी गई थी, उससे मुझे लगता है कि इस देश के अंदर एक दूसरे की भावनाओं के सम्मान की बात होती है और कई संगठन सेक्युलरिज्म के नाम पर इस प्रकार मांग करते हैं, लेकिन केरल की दुर्भाग्यूपूर्ण घटना पर उसके मुंह क्यों बंद हैं? मुझे यह बात कभी समझ में नहीं आती। वे लोग इस मुद्दे पर मौन हैं।

इस विवाद के बाद केरल की सरकार ने कहा कि वध के लिए पशुओं की बिक्री पर केंद्र के प्रतिबंध के विरोध में वह कानून ला सकती है। केरल के मुख्यमंत्री पिनरायी विजयन ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर केंद्र के निर्णय का विरोध किया था। उन्होंने केंद्र सरकार और आरएसएस पर हमला बोलते हुए कहा था कि राज्य के लोगों को नई दिल्ली या नागपुर से खान-पान की आदतों को लेकर सबक सीखने की जरूरत नहीं है।

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