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MP: वैक्सीन ट्रायल में हिस्सा लेने वाले की मौत, बोले स्वास्थ्य मंत्री- आधे घंटे बाद दिख जाते हैं साइड इफेक्ट्स, पर इस केस में कुछ ना नजर आया

भोपाल में टीला जमालपुरा निवासी दीपक मरावी को 12 दिसंबर को वैक्सीन का पहला डोज लगाया गया था। 21 दिन बाद उनकी मौत हो गई।

prabhu ram choudharyमध्य प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री प्रभु राम चौधरी। (ANI)

देशभर में टीकाकरण की तैयारियों के बीच मध्य प्रदेश से बुरी खबर मिली है। यहां कोविड-19 वैक्सीन ट्रायल के दौरान टीके की खुराक लेने के बाद एक वॉलिंटियर की मौत हो गई। राज्य के स्वास्थ्य मंत्री प्रभुराम चौधरी ने बताया कि ट्रायल में शामिल वॉलिंटियर की कुछ दिनों बाद मौत हो गई। उन्होंने शनिवार को कहा- टीकाकरण के प्रभाव किसी व्यक्ति में तीस मिनट के भीतर नजर आ आने लगते हैं। मगर मृतक को टीका लगाने के 24 से 48 घंटे के भीतर कोई साइड इफेक्ट नजर नहीं दिखे। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का वजह जहर का असर बताई है।

राज्य के सीएम शिवराज चौहान ने इस पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा- मृतक के विसेरा को टेस्टिंग के लिए भेजा है। मैं सभी से मामले को संवेदनशीलता से लेने का आग्रह करता हूं। ताकि टीके को लेकर गैर जरुरी गलतफहमी पैदा ना हो, जिससे टीकाकरण ड्राइव प्रभावित हो। मुझे विश्वास है कि टीके का प्रभाव 24 घंटे या दो-तीन दिन में नजर आ जाता है ना की कई दिनों बाद।

उल्लेखनीय है कि स्वदेशी टीका कोवैक्सीन का ट्रायल 7 जनवरी को पूरा हुआ। इस बीच भोपाल में टीला जमालपुरा निवासी दीपक मरावी को 12 दिसंबर को वैक्सीन का पहला डोज लगाया गया था। 21 दिन बाद उनकी मौत हो गई। परिवार ने उनकी मौत पर सवाल उठाए। उनका कहना है कि किसी को बताए बिना उसने वैक्सीन का डोज लगवाया था और उसके बाद उसकी तबियत बिगड़ गई। बताया जाता है कि उसे 750 रुपए का लालच देकर वैक्सीन के मानव परीक्षण का हिस्सा बनाया गया।

इधर एक नए अध्ययन में पता चला है कि कोविड-19 के इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती एक तिहाई से ज्यादा मरीजों में बीमार पड़ने के छह महीनों तक कम से कम एक लक्षण बना रहता है। ‘लैंसट जर्नल’ में अध्ययन प्रकाशित हुआ है। शोधकर्ताओं ने कोरोना वायरस संक्रमण की चपेट में आए 1,733 मरीजों में संक्रमण से पड़ने वाले दीर्घकालिक असर का अध्ययन किया। अध्ययन में चीन के जिन यिन तान अस्पताल के शोधकर्ता शामिल थे और इन लोगों ने मरीजों में लक्षण और स्वास्थ्य संबंधी जानकारी के लिए एक प्रश्नावली पर आमने सामने बात की।

शोधकर्ताओं के अनुसार सभी में जो एक सामान्य दिक्कत मौजूद थी वह थी मासपेशियों में कमजोरी (63प्रतिशत लोगों में) इनके अलावा एक और बात सामने आई कि लोगों को सोने में दिक्कत हो रही है(26प्रतिशत लोगों को)। उन्होंने कहा कि 23प्रतिशत लोगों में बेचैनी और अवसाद के लक्षण पाए गए। (एजेंसी इनपुट)

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