हाल लखनऊ काः बेड के लिए लाइन में लगे हैं पचास कोविड मरीज

केजीएमयू में ट्रॉमा सेंटर के बाहर प्रतीक्षारत रोगियों के लिए 20 बेड का जुगाड़ू इंतज़ाम, सोमवार तक बेड की संख्या में वृद्धि की उम्मीद।

Uttar Pradesh, Coronavirusमार्च के अंत में लखनऊ में कोविड के एक्टिव मरीजों की संख्या 3,138 थी, जो 16 अप्रैल को 40,753 हो गई थी। (एक्सप्रेस फोटो- विशाल श्रीवास्तव)

किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) के ट्रॉमा सेंटर के बाहर, उस जगह, जहां हादसों के शिकार सबसे पहले पहुंचते हैं, वहीं पर लगभग 20 बेड पड़े हैं। डॉक्टरी में काम आने वाले कुछ बुनियादी यंत्र भी रखे हैं। यही वह जगह है जहां मरीज के स्ट्रेचर से उतरते ही कोविड के प्रति आवश्यक सावधानियां हवा में उड़ा दी जाती हैं। आने-जाने पर कोई नियंत्रण नहीं। बुखार है या नहीं—-यह चिंता किसी को नहीं। न कोई पूछता है और न कोई नापने आता है। सोशल डिस्टैंसिंग का कोई मतलब ही नहीं।

यह स्थिति है यूपी में। जहां शनिवार को डेढ़ लाख से ज्यादा एक्टिव कोविड केस थे। केवल महाराष्ट्र ही संख्या में यूपी से आगे है। सच तो यह है कि यूपी का पहले से कमजोर स्वास्थ्य-चिकित्सा ढांचा अब और कमजोर हो गया है। राजधानी लखनऊ में ही लगभग सभी अस्पतालों में आइसीयू यूनिट्स और वेंटिलेटर युक्त बेड्स की कमी है।

केजीएमयू में उपर्युक्त स्थान पर पड़े बेड पर बैठे लखनऊ के ही विकास वर्मा (38) कोरोना पॉज़िटिव हैं। दो दिन से अस्पताल के कोविड वॉर्ड में भेजे जाने का इंतजार कर रहे हैं। वार्ड में 520 बेड हैं। 427 आइसीयू वाले और 133 वेंटिलेटर युक्त। वर्मा कहते हैं, “मैं यहां तब आया जब सांस लेने में दिक्कत होने लगी। तब से मुझे बस यह ऑक्सीजन मास्क मिला है। अधिकारी कह रहे हैं कि जब बेड खाली मिलेगा तब वॉर्ड में भेज दिया जाएगा।”

वर्मा के बगल वाले बेड में सत्तर साल की सरला अवस्थी पड़ी हैं। वे भी कोरोना प़ॉज़िटिव हैं। शहर से सटे मोहनलालगंज में खेती-किसानी करने वाले उनके पुत्र वैभव बताते हैं कि मां को जब सांस में दिक्कत होने लगीं तो वे उनको अस्पताल में भर्ती कराने को निकले। पांच-पांच प्राइवेट अस्पतालों में गए। मगर सभी का एक ही जवाब था कि उनके पास वेंटिलेटर बचे ही नहीं। तब वे मां को केजीएमयू लाए। “उनका ऑक्सीजन लेवल गिर रहा है। उन्हें आइसीयू बेड की तुरंत जरूरत है। समझ में नहीं आता क्या करूं!” वे बताते हैं कि अभी घंटे भर पहले कमरा रोने-सुबकने वालों से भरा था। इस स्थिति में दिल डूबने लगता है।

रजिस्ट्रेशन काउंटर पर बैठे केजीएमयू के एक कर्मचारी ने माना कि बेड के अभाव के कारण हमे साफ निर्देश हैं कि कोरोना के मरीजों को घर, होम आइसोलेशन में रहने के लिए कहा जाए। या फिर उन्हें किसी अन्य अस्पताल में भेजा जाए। उसने कहा, “बेड्स खाली ही नहीं। अगर मरीज को ऑक्सीजन चाहिए तो अगर हमारे पास होती है तो दे देते हैं।” उसने कहा कि दो दिन के भीतर पचास लोग बेड की लाइन में आ गए हैं।

मार्च के अंत में लखनऊ में कोविड के एक्टिव मरीजों की संख्या 3,138 थी, जो 16 अप्रैल को 40,753 हो गई थी। यह पूरे राज्य के एक्टिव मरीजों की संख्या का 27 प्रतिशत है। यही नहीं 48,014 लोग पिछले 16 दिन में पॉज़िटिव निकले हैं।

एक सरकारी अधिकारी का कहना है कि लखनऊ में मरीजों की संख्या बढ़ने का कारण उच्च टेस्टिंग दर है। दूसरी वजह है अन्य शहरों के मरीजों का आना। इस बीच मुख्यमंत्री ने अफसरों से कहा है कि केजीएमयू और बलरामपुर अस्पताल को सिर्फ कोविड के लिए घोषित किया जाए और साथ ही सिर्फ कोविड को समर्पित अस्पतालों की संख्या बढ़ाई जाए। सीएम ने एक हजार बेड का नया अस्पताल भी खड़ा करने की घोषणा की है। केजीएमयू के प्रवक्ता सुधीर सिंह ने भी कहा कि सोमवार तक कोविड बेड की संख्या बढ़ा दी जाएगी।

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