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गर्भवती पत्नी के पास पहुंचना था, पर श्रमिक ट्रेन में नहीं मिल पाई जगह, 5 दिन में 100 सीसी की बाइक से तय किया 2300 किमी लंबा सफर

COVID-19, Shramik Special Train: पूछने पर कि उन्होंने बाइक से सफर क्यों किया? प्रवासी मजदूर ने कहा कि स्थानीय पुलिस के पास पंजीकरण कराने के बाद भी उन्हें प्रवासी स्पेशल ट्रेन में सीट मिलना असंभव होता जा रहा था।

IRCTCतस्वीर का इस्तेमाल केवल प्रतीकात्मक रूप से किया गया है।

COVID-19, Shramik Special Train: देश में कोरोना वायरस महामारी को फैलने से रोकने के लिए 24 मार्च को राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन की घोषणा की गई। इस बीच केरल में काम कर रहे 27 वर्षीय प्रवासी मजूदर अरका मंडल केंद्र द्वारा दिए गए छोटे से नोटिस पर ही पश्चिम बंगाल के ईस्ट बर्दवान में स्थित कलना अपने घर लौटने के लिए तैयार थे। हालांकि वो केरल में ही रुके रहे। पिछले पांच साल से मलप्पुरण में वेल्डर का काम कर रहे अरका मुस्कुराते हुए कहते हैं कि उनकी पत्नी (22) गर्भवती हैं और अगर उन्हें जरुरत पड़ी तो वो अगली ट्रेन से घर से चले जाएंगे।

मगर उन्होंने कभी नहीं सोचा होगा कि जब घर जाना होगा तो 2,300 किलो मीटर का सफर तय करने के लिए पांच दिन तक 100 सीसी की बाइक चलानी होगी। कलना पुलिस स्टेशल के अंतर्गत केशोबपुर गांव के हाई स्कूल में बनाए क्वारंटाइन सेंटर में मौजूद अरका मंडल ने द टेलीग्राफ को बताया कि मैं शनिवार सुबह करीब छह बजे केशोबपुर पहुंचा। पूछने पर कि उन्होंने बाइक से सफर क्यों किया? उन्होंने कहा कि स्थानीय पुलिस के पास पंजीकरण कराने के बाद भी उन्हें प्रवासी स्पेशल ट्रेन में सीट मिलना असंभव होता जा रहा था।

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अरका मंडल कहते हैं कि मैं चिंतित था कि क्या मैं अपनी पत्नी के डिलिवरी के समय घर पहुंच पाऊंगा। मैंने इस सवाल को दिमाग से निकाला और अपने चचेरे भाई बिकाश दा के साथ दो जून को बाइक से घर जाने के तैयार हो गया। अरका कहते हैं, ‘बिकाश (39) ने बाइक नहीं चलाई मगर पिछली सीट पर बैठे ‘दादा’ का सहयोग खासा महत्वपूर्ण था।’ बिकाश कहते हैं, ‘टोल ब्रिजों और राजमार्गों पर सोए। हमें खुले में नहाए और हाइवे पर भोजनालय और ढाबें खाना खाया। ये खासा कष्टदायक था। सौभाग्य से पेट्रोल पंप खुले थे।’

बता दें कि देश में कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों के बीच कई लोग पूछ रहे हैं कि पीएम मोदी ने 4 घंटे के नोटिस पर देश में लॉकडाउन की घोषणा क्यों की। इस बीच देश के सबसे कमजोर वर्गों को मुश्किलों का सामना करने के लिए छोड़ दिया गया। विभाजन के बाद के भारत में सबसे बड़े संकट के साथ प्रवासी यात्राएं विश्व स्तर पर सुर्खियां बना रही हैं।

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