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कोरोना संकट में बेड की भारी किल्लत, मगर 20-40% मरीजों को ही भर्ती कर रहे निजी हॉस्पिटल, सरकार ने भेजा नोटिस

Covid-19: रिपोर्टिंग के दौरान बरखा दत्त ने घरेलू नौकरानी का काम करने वाली सोनू से बात की, जिन्होंने बीमारी पति के लिए एंबुलेंस की व्यवस्था करने की कोशिश की मगर उनसे बहुत अधिक पैसों की मांग की गई।

COVID-19मुंबई में मरीजों को बेड की भारी कमी का सामना करना पड़ रहा है। (वीडियो स्क्रीन शॉट)

Covid-19: कोरोना वायरस महामारी से बुरी तरह प्रभावित मुंबई के हॉस्पिटलों में बेड कमी की जानकारी सामने आई है। वरिष्ठ पत्रकार बरखा दत्त ने अपनी इन्वेस्टिगेटिंग रिपोर्टिंग में ऐसा दावा किया है। रिपोर्टिंग के दौरान बरखा दत्त ने घरेलू नौकरानी का काम करने वाली सोनू से बात की, जिन्होंने बीमारी पति के लिए एंबुलेंस की व्यवस्था करने की कोशिश की मगर उनसे बहुत अधिक पैसों की मांग की गई। सोनू कहती हैं कि बीमार पति के इलाज के लिए एक जगह से दूसरे जगह जाने में उनकी छोटी सी बचत के सारे पैसे खर्च हो गए, ताकि कोरोना पॉजिटिव पति के इलाज के लिए एक बेड की व्यवस्था हो सके।

बातचीत में सोनू ने बताया कि मेरे पति की एक-दो दिन से तबीयत खराब थी, उन्हें खांसी हो रही थी। दवाई भी ली मगर कोई आराम नहीं हुआ। मैंने उन्हें दूसरी जगह दिखाया, उन्हें सांस लेने में परेशानी हो रही थी। मुझे कूपर हॉस्पिटल जाने के लिए कहा गया। सोनू कहती हैं, ‘हॉस्पिटल पहुंची तो उन्होंने पति का एक्सरे किया, मगर ऑक्सीजन नहीं दिया गया। यहां मुझसे कहा गया कि केईएम या नायर हॉस्पिटल लेकर जाओ।’

सोनू कहती हैं, ‘मैं नानावटी हॉस्पिटल भी गई। वहां कहा गया कि बेड खाली नहीं है।’ पूछने उन्होंने बताया कि पति के इलाज के लिए वो पांच से छह हॉस्पिटलों में गईं। इसमें निजी, नगर निगम के हॉस्पिटल और छोटे क्लीनिक भी शामिल हैं। बस हर जगह सिर्फ यही कहा गया कि बेड खाली नहीं हैं। सोनू कहती हैं कि दूसरे हॉस्पिटल में जाने के लिए मैंने एक हॉस्पिटल में एंबुलेंस के लिए संपर्क किया। वहां मुझसे 5,500 रुपए मांगे गए।

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बरखा दत्त इस बीच नर्मदा से भी बातचीत की जिनकी मां कोरोना पॉजिटिव हैं, और हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है। अन्य लोगों की तरह उन्हें भी एक हॉस्पिटल से दूसरे हॉस्पिटल के चक्कर काटने पड़े। हालांकि बड़ी मुश्किलों के बाद मां के लिए बेड मिल सका। नर्मदा ने बताया कि मां बीमार हुई तो उन्हें निजी हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। दो दिन वो वहां रहीं। कई तरह के टेस्ट किए मगर कोरोना का टेस्ट नहीं हुआ। एक्सरे में फेफड़े में संक्रमण के लक्षण नजर आए तो कहा गया कि मरीज को आईसीयू बेड की जरुरत है और हॉस्पिटल में ये सुविधा नहीं है।

नर्मदा कहती हैं, ‘इसके बाद मुझे दूसरे निजी या सरकारी हॉस्पिटल में जाने के लिए कहा गया। हमने 10 से 15 हॉस्पिटलों में कोशिश की मगर कोई भी बेड देने के लिए तैयार नहीं था।’ बीएमसी की हेल्पलाइन पर फोन किया, जहां जवाब मिला कि अभी बेड नहीं है। बेड खाली होगा तो फोन कर देंगे। पड़ोसी की सलाह पर वो नायर हॉस्पिटल पहुंची, जहां कहा गया कि हॉस्पिटल में कोरोना संदिग्धों के वार्ड फुल हैं सिर्फ पॉजिटिव वार्ड में ही बेड खाली हैं। मां की हालत बहुत खराब थी और उन्हें ऑक्सीजन की जरुरत थी। इसलिए हमने सोचा नहीं कि वार्ड पॉजिटिव मरीजों का है।

बता दें कि बॉम्बे नर्सिंग होम एक्ट के तहत शहर में 1,400 नर्मिंग होम रजिस्टर्ड हैं। इन नर्सिंग होम 20,000 बेड हैं। इसके अलावा अतिरिक्त 5,000 बेड सरकारी हॉस्पिटलों में हैं। मुंबई में अभी 25,000 कोरोना के एक्टिव केस हैं। मगर सरकारी सूत्रों के कहना है कि इनमें से 80 फीसदी मरीजों को हॉस्पिटल में बेड की जरुरत नहीं है। इससे पता चलता है कि करीब 5,000 मरीजों को बेड की जरुरत है। इनमें 1,250 मरीजों की आईसीयू बेड की जरुरत है।

पत्रकार बरखा दत्त कहती हैं कि तो फिर शहर के हॉस्पिटलों में मरीजों के लिए बेड की व्यवस्था क्यों नहीं है? लोग हॉस्पिटलों के बाहर बेड के इंतजार में क्यों बैठे हैं। बरखा दत्त को सरकारी अधिकारियों ने बताया कि जांच में पता चला तो वो हैरान रह गए कि निजी हॉस्पिटल क्षमता से सिर्फ 20 से 40 फीसदी मरीजों को ले रहे हैं। ऐसे चार निजी हॉस्पिटलों को कारण बताओ नोटिस भी भेजा गया है। इसमें जसलोक, हिंदुजा, लीलावती और बॉम्बे हॉस्पिटल शामिल हैं।

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