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निजता विवादः ‘Aarogya Setu ऐप का इस्तेमाल जरूरी बनाना अवैध’, बोले पूर्व SC जज, केंद्र का दावा- 180 दिन में डिलीट होगा डेटा

Aarogya Setu app: एक मई को राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन को बढ़ाए जाने के बाद गृह मंत्रालय ने अपने दिशा-निर्देशों में प्राइवेट और पब्लिक सेक्टर के कर्मचारियों के लिए आरोग्य सेतु ऐप को अनिवार्य बना दिया।

Translated By Ikram नई दिल्ली | Updated: May 12, 2020 8:40 AM
सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस बी एन श्रीकृष्ण। (द इंडियन एक्सप्रेस फाइल फोटो)

Aarogya Setu app: सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस बीएन श्रीकृष्ण ने सरकार द्वारा आरोग्य सेतु ऐप के इस्तेमाल की अनिवार्यता पर जोर देने को अवैध बताया है। जस्टिस श्रीकृष्ण पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन बिल के पहले मसौदे के लिए बनी कमिटी की अध्यक्षता कर चुके हैं। उन्होंने द इंडियन एक्सप्रेस से कहा, ‘किस कानून के तहत आप इसे किसी पर भी अनिवार्य करते हैं? अब तक ये किसी भी कानून द्वारा समर्थित नहीं है।’

एक मई को राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन को बढ़ाए जाने के बाद गृह मंत्रालय ने अपने दिशा-निर्देशों में प्राइवेट और पब्लिक सेक्टर के कर्मचारियों के लिए आरोग्य सेतु ऐप को अनिवार्य बना दिया। स्थानीय अधिकारियों से भी कहा गया कि वो हॉटस्पॉट जोन में ऐप की 100 फीसदी कवरेज सुनिश्चित करें। ये दिशा-निर्देश राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन अधिनियम (NDMA), 2005 के तहत गठित राष्ट्रीय कार्यकारी समिति द्वारा जारी किए गए थे।

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तब नोएडा पुलिस ने कहा था कि आरोग्य सेतु ऐप नहीं होने पर छह महीने की कैद या 1,000 रुपए तक का जुर्माना लगेगा। इस पर जस्टिस श्रीकृष्ण ने कहा कि नोएडा पुलिस का आदेश पूरी तरह गैरकानूनी है। मैं यह मान रहा हूं कि यह अभी भी एक लोकतांत्रिक देश है और इस तरह के आदेशों को अदालत में चुनौती दी जा सकती है।

जस्टिस श्रीकृष्ण ने कहा कि आरोग्य सेतु के उपयोग को अनिवार्य बनाने के लिए दिशा-निर्देशों को पर्याप्त कानूनी समर्थन है, ऐसा नहीं माना जा सकता है। उन्होंने कहा, ‘कानून के ये टुकड़े (राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन अधिनियम और महामारी रोग अधिनियम) एक विशिष्ट कारण के लिए हैं। मेरे विचार में राष्ट्रीय कार्यकारी समिति एक वैधानिक निकाय नहीं है।’

इसी बीच आरोग्य सेतु ऐप पर उपजे विवाद के बाद केंद्र सरकार ने ऐप के उपयोगकर्ताओं की जानकारियों (डेटा) के प्रसंस्करण के लिए सोमवार को दिशानिर्देश जारी किए। इसमें कुछ नियमों का उल्लंघन करने वाले व्यक्तियों को कारावास की सजा का भी प्रावधान किया गया है। नए नियमों के तहत 180 दिनों से अधिक डेटा के भंडारण पर रोक लगाई गई है।

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इसके साथ ही उपयोगकर्ताओं के लिए यह प्रावधान किया गया है कि वे आरोग्य सेतु से संबंधित जानकारियों को मिटाने का अनुरोध कर सकते हैं। इस तरह के अनुरोध पर 30 दिन के भीतर अमल करना होगा। नए प्रावधान केवल जनसांख्यिकीय, संपर्क, स्व-मूल्यांकन और कोरोना वायरस से संक्रमित व्यक्तियों या उन लोगों के स्थान डेटा का संग्रह करने की अनुमति देते हैं जो संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आते हैं।

इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) मंत्रालय के सचिव अजय प्रकाश साहनी ने कहा, ‘डेटा गोपनीयता पर बहुत काम किया गया है। यह सुनिश्चित करने के लिए एक अच्छी गोपनीयता नीति बनाई गई है कि लोगों के व्यक्तिगत डेटा का दुरुपयोग ना हो। अभी तक 9.8 करोड़ लोगों ने आरोग्य सेतु ऐप डाउनलोड किया है।

साहनी ने कहा कि एक गैर-संक्रमित व्यक्ति का डेटा 30 दिन में हटा दिया जाता है। इसके अलावा जांच कराने वाले लोगों का डेटा 45 दिन में और इलाज कराने वाले लोगों का डेटा 60 दिन में हटा दिया जाता है। (एजेंसी इनपुट)

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