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Coronavirus: क्वारंटाइन सेंटर में बना रिश्‍ता, दिव्यांग दोस्‍त को 350 KM पैदल धक्का दे पहुंचाया गांव

Coronavirus Lockdown in India: दोनों को कोविड-19 का संदिग्ध होने के चलते 14 दिनों के लिए क्वारंटाइन किया गया। क्वारंटाइन सेंटर में दो सप्ताह तक साथ रहने के दौरान दोनों की दोस्ती हो गई। नियमों के तहत जब दोनों ने 14 दिनों का समय पूरा कर लिया तो दोनों ने अपने-अपने गांव लौटने का फैसला लिया।

covid-19तस्वीर का इस्तेमाल केवल प्रतीकात्मक रूप से किया गया है।

Coronavirus Lockdown in India: कोरोना वायरस महामारी के बीच पूर्व में यात्रा इतिहास होने के चलते जोधपुर में 14 दिनों के लिए क्वारंटाइन किए गए दो लोगों की दोस्ती सुर्खियों में बनी हुई है। इनमें एक शख्स का नाम अनिरुद्ध (28) है जो महराष्ट्र से जोधपुर घूमने आए थे और लॉकडाउन के चलते दूसरे राज्य में फंस गए। दूसरे हैं चालीस वर्षीय मुजफ्फरनगर निवासी गय्यूर अहमद। दोनों को ही कोविड-19 का संदिग्ध होने के चलते 14 दिनों के लिए क्वारंटाइन किया गया। क्वारंटाइन सेंटर में दो सप्ताह तक साथ रहने के दौरान दोनों की दोस्ती हो गई। नियमों के तहत जब दोनों ने 14 दिनों का समय पूरा कर लिया तो दोनों ने अपने-अपने गांव लौटने का फैसला लिया।

इस बीच दिव्यांग गयूर को अपनी तिपहिया साइकिल से घर लौटने में परेशानी होता देख अनिरुद्ध ने अपने घर लौटने का फैसला रद्द कर दिया और पहले दिव्यांग दोस्त को उसके घर पहुंचाया। 8 मई को क्वारंटाइन सेंटर से बाहर निकलने के बाद एक बस के जरिए दोनों को चालीस किलोमीटर दूर यूपी बॉर्डर के पास छोड़ दिया गया। यहां से दोनों अपने-अपने रास्ते निकलने लगे। इस बीच अनिरुद्ध ने गौर किया उनके दोस्त गय्यूर को तिपहिया साइकिल के जरिए जाने में परेशानी हो रही थी। ऐसे में उन्होंने खुद घर तक दोस्त के साथ जाने का निर्णय लिया।

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अनिरुद्ध अगले पांच दिनों तक गय्यूर के तिपाहिया वहान के साथ चलता रहा। मथुरा, अलीगढ़, बुंलदशहर, हापुड़ और मेरठ होते हुए दोनों 12 मई को मुजफ्फरनगर पहुंच गए। पांच दिनों के सफर में सड़क ही उनका बिस्तर थी। बीच रास्ते में दोनों को जो खाने को मिला उससे पेट की आग बुझाई। 350 किलोमीटर के सफर के दौरान अनिरुद्ध पूरे रास्ते तिपहिया साइकिल के पीछे-पीछे चलते रहे। गय्यूर कहते हैं, ‘पूरे रास्ते वो मेरे साथ रहा। उसने कभी मेरा साथ नहीं छोड़ा।’

दूसरी तरफ अनिरुद्ध कहते हैं कि सबसे पहले हम इंसान हैं और इसके बाद हिंदू-मुसलमान। गय्यूर की मदद करके मुझे बहुत खुशी महसूस हो रही है। इस वक्त में उसके परिवार के साथ रह रहा हूं। ये लोग बहुत अच्छे हैं और इनके साथ रहना अपने परिवार के साथ रहने जैसा ही है।

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