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कोरोना-काल में इंसानियत की मिसाल: मां-बाप खोने वाले बेटे ने किया प्‍लाज्‍मा दान

Ashna Butani: रोहित गुगलानी (41) परिवार के पहले शख्स थे जिन्हें कोविड-19 की पुष्टि हुई। वो कहते हैं कि मेरी पत्नी और बच्चे सहित मुझे एक जून को संक्रमण की पुष्टि हुई। हमने खुद को क्वारंटाइन कर लिया और माता-पिता से भी खुद को अलग कर लिया। मगर ये बीमारी किसी तरह माता-पिता और भाई तक फैल गई।

Author Translated By Ikram नई दिल्ली | Updated: July 19, 2020 1:01 PM
plasma donation covid-19दिल्ली के कई अस्पतालों में शुरू हो चुकी है प्लाज्मा डोनेशन की सुविधा।

Ashna Butani

कोरोना वायरस महामारी से ठीक हुए 38 वर्षीय मोहित गुगलानी ने शनिवार को गुड़गांव के मेदांता हॉस्पिटल में प्लाज्मा दान कर इंसानियत की मिसाल पेश की। दिल्ली के पश्चिम विहार निवासी गुगलानी के माता-पिता भी कोरोना सें संक्रमित थे और जून में इस खतरनाक बीमारी से उनकी मौत हो गई थी। हालांकि बाद में पिता की रिपोर्ट निगेटिव आई। हरिद्वार में अपने माता-पिता का अनुष्ठान पूरा करने बाद उन्होंने प्लाज्मा दान करने का फैसला लिया। उनके पिता को भी मैक्स हॉस्पिटल (साकेत) में प्लाज्मा दान किया गया था।

उनके बड़े भाई रोहित गुगलानी (41) परिवार के पहले शख्स थे जिन्हें कोविड-19 की पुष्टि हुई। रोहित कहते हैं, ‘मेरी पत्नी और बच्चे सहित मुझे एक जून को संक्रमण की पुष्टि हुई। हमने खुद को क्वारंटाइन कर लिया और माता-पिता से भी खुद को अलग कर लिया। मगर ये बीमारी किसी तरह माता-पिता और भाई तक फैल गई। दस जून से उनमें कोरोना के लक्षण नजर आने लगे। 12 जून को तीनों की टेस्ट हुआ, जिसके बाद मां आयुष्मान (द्वारका) और पिता मैक्स (साकेत) में भर्ती हो गए।

मां (67) को मधुमेह के अलावा अन्य बीमारियां भी थीं जिसके चलते उनकी 17 जून को कोरोना से मौत हो गई। पिता (72) को किडनी संबंधी बीमारी थी और उन्हें मैक्स हॉस्पिटल में वेंटिलेटर पर रखा गया था। दोनों में कोरोना के समान लक्षण थे, जिनमें तेज बुखार, सांस फूलना और ऑक्सीजन का स्तर कम हो जाना शामिल है।

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रोहित कहते हैं कि हमें समझ में नहीं आ रहा था कि पिता को कैसे बताएं कि मां अब नहीं रहीं। दोनों ने एक-दूसरे के जीवन साथी के रूप में काफी लंबा समय एक साथ गुजारा था। हम उन्हें ये जानकारी देकर सदमा नहीं पहुंचाना चाहते थे। आखिरकार हमें उन्हें बताना ही पड़ा और वो टूट गए। हम भाइयों ने अपने पिता के मन में उम्मीद जगाने की कोशिश की। पिता को बताया कि उनके सपने पूरे होने बाकी हैं। उन्होंने कहा कि पिता वृंदावन में विष्णु की 200 फीट की मूर्ति बनाने पर काम कर रहे थे।

इधर मोहित कहते हैं कि पिता की कोरोना रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद भी 28 जून को उनकी मौत हो गई। 26 जून तक हमें उम्मीद थी कि वो ठीक हो जाएंगे। डॉक्टर भी उन्हें नॉन कोविड-19 वार्ड में शिफ्ट करने वाले थे। मगर 27 जून को उनकी हालत काफी खराब हो गई, उन्हें दिल का दौरा पड़ा।

उस रात को याद करते हुए रोहित बताते हैं जब उन्होंने पिता के लिए प्लाज्मा की व्यवस्था करने की कोशिश की। प्लाज्मा की व्यवस्था करने में काफी घंटों लग गए मगर कई अंजान लोगों दान करने के लिए आगे आए। ऐसे में मानवता की इस श्रृंखला को जारी रखना हमारी जिम्मेदारी है। प्लाज्मा दान करते हुए मोहित ने कहा कि 40 मिनट लगे और ये जरूरतमंद मरीज को बचाने में मदद करेगा।

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