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जनता फ्लैट में मयखाना, दिल्ली सरकार को कोर्ट का नोटिस; दक्षिणी दिल्ली के मदनगीर इलाके के लोगों ने छेड़ा शराब की दुकान के खिलाफ आंदोलन

डीडीए आवासीय कल्याण समिति के महासचिव वेद प्रकाश कनौजिया ने बताया कि शराब की दुकान को नियमों को दरकिनार करते हुए लाइसेंस दिया गया है। उनका कहना है कि मामले पर उच्च न्यायालय में न्याय के लिए हम लोगों की ओर से याचिका दायर की गई है।

गजेंद्र सिंह

दक्षिणी दिल्ली के मदनगीर इलाके में दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) निर्मित जनता फ्लैट है। यह एक रिहाइशी इलाका है और आसपास मंदिर, अस्पताल, कोचिंग केंद्र और लोगों के घर भी हैं। लेकिन इन्हीं के बीच दो घर ऐसे हैं, जहां शराब की बिक्री हो रही है। जानकारी के मुताबिक, लाइसेंस मिलने के बाद एक माह पहले ही इसे खोला गया है। शराब की दुकान को लेकर आसपास के लोगों ने आवासीय कल्याण समिति (आरडब्लूए) की मदद से आंदोलन छेड़ रखा है और अब मामला अदालत तक पहुंच गया है। शुक्रवार को मामले में दिल्ली उच्च न्यायालय की ओर से दिल्ली सरकार को नोटिस भी जारी किया गया है।

मदनगीर स्थित डीडीए के जनता फ्लैट में गली नंबर 19/553 में खुली शराब की दुकान यहां के लोगों के लिए मुसीबत का सबब बन गई है। दिल्ली में अभी तक डीडीए के फ्लैट में सैलून, किराना, क्लीनिक और ब्यूटी पार्लर तो खुलते थे, लेकिन नियमों को दरकिनार कर शराब की दुकान खुलने का यह पहला मामला बताया जा रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि भूतल में जहां शराब की दुकान खोली गई है, वह डीडीए का मकान है। इसके पहले तल पर शराब का गोदाम बनाया गया है।

स्थानीय निवासी जगजीत अरोड़ा का कहना है कि मकान में ही दूसरे तल पर कोचिंग केंद्र है, जहां बच्चे पढ़ने आते हैं। करीब 50 मीटर की दूरी पर एक जच्चा-बच्चा केंद्र भी है। इलाके में करीब 2,500 मकान हैं और इसमें बड़ी संख्या में महिलाओं, बच्चों व बुजुर्गों की आबादी है। उनका कहना है कि उन्होंने जो सूची अदालत में लगाई है, उसके मुताबिक अभी तक डीडीए के किसी भी मकान में शराब की दुकान खोलने की इजाजत नहीं दी गई है, सिवा मदनगीर की इस दुकान को छोड़कर।

एक अन्य स्थानीय निवासी निशांत बताते हैं कि यह सड़क व्यावसायिक हो चुकी है, क्योंकि यहां काफी दुकानें हैं। शराब की दुकान यहां पहली बार खुली है और वह भी किसी मकान में। इस वजह से महिलाओं व बच्चों का चलना दूभर हो गया है। उनका कहना है कि यहां शराब की दुकान को लेकर काफी प्रदर्शन हो चुका है और स्थानीय नेता भी इसे बंद करवाने का आश्वासन दे चुके हैं। जगजीत बताते हैं कि इलाके के अलग-अलग लोगों ने करीब 40 से अधिक शिकायतें सरकारी विभागों में लगाई है। लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है।

कोरोना काल के दौरान नियमों का उल्लंघन करने पर दुकान को सील भी किया जा चुका है। वहीं स्थानीय लोगों का पक्ष रखने वाले एनबे लीगल के अधिवक्ता बृज भूषण ने बताया कि उच्च न्यायालय में अधिवक्ता आशुतोष कुमार मिश्र और मिस्बाहुल-हक मामले में स्थानीय निवासियों का पक्ष कोर्ट में रख रहे हैं।

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