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कोरोना में मरी इंसानियत: शव को अस्पताल ने बनाया बंधक, प्रयागराज में श्मशान में लकड़ी की कालाबाज़ारी, बिहार में मृतक के नाम पर रेमडेवेसिर खरीद रहा था हॉस्पिटल

वहीं, इस दौरान शहर में इंसानियत के कुछ दुश्मन भी सक्रिय हैं। वे संक्रमण से मरने वाले लोगों की लाशों से जेवर चुरा रहे थे।

पंजाब के पटियाला में शुक्रवार को कोरोना से मरने वाले एक मरीज के परिजन विलाप करते हुए। (फोटोः पीटीआई)

Coronavirus/COVID-19 न सिर्फ इंसान के लिए काल बनकर उभरा, बल्कि इसने आक्रामक रूप ले आपदा के दौर में इंसानियत को भी मार डाला।

ऐसा इसलिए, क्योंकि कोरोना काल कई लोग ऐसे भी हैं, जो “आपदा में अपने लिए अवसर” ढूंढ रहे हैं। कोई दवा-बेड और ऑक्सीजन के नाम पर, तो कहीं लाश और लकड़ी के लिए ऐसा किया जा रहा है। महामारी की मार के बीच जरूरी चीजों की कालाबाजारी के साथ उन्हें मुंहमांगे दामों पर बेचा जा रहा है। पैसों के साथ पाप का घड़ा भी भरा जा रहा है। ऐसी घटनाओं से जुड़े अनेक उदाहरण हैं, जिनमें एक उत्तर प्रदेश का भी है। बताया गया कि हापुड़ में अस्पताल का बिल न भरने पर हॉस्पिटल ने मरीज के शव को ही बंधक बना लिया। यह मामला रामा अस्पताल से जुड़ा है। हालांकि, जिलाधिकारी के हस्तक्षेप के बाद 35 हजार रुपए चुकाने के बाद लाश परिजन को मुहैया कराई गई।

इसी बीच, प्रयागराज में अंतिम संस्कार के लिए तय रेट से अधिक पैसे लिए जाने का मामला सामने आया। स्थानीय रिपोर्ट्स के मुताबिक, लोग लकड़ी की कालाबाजी करने से बाज नहीं आ रहे। इस मामले से जुड़ा एक वीडियो भी सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म्स पर वायरल हुआ, जिसके बाद एक व्यक्ति गिरफ्तार किया गया।

वहीं, इस दौरान शहर में इंसानियत के कुछ दुश्मन भी सक्रिय हैं। वे संक्रमण से मरने वाले लोगों की लाशों से जेवर चुरा रहे थे। यह काम कथित तौर पर अस्पताल में फोर्थ ग्रेड के कर्मी ने किया। आरोपी ने मृतका के हाथ से दोनों कंगन निकाल लिए थे, जबकि पर्स में रखे 15 हजार रुपए भी चुरा लिए थे।

इसी बीच, लखनऊ के गोमतीनगर इलाके स्थित एक निजी अस्पताल ने कथित तौर पर ऑक्सीजन की उपलब्धता के बारे में गलत जानकारी दी। साथ ही मरीजों के परिजन से उन्हें दूसरी जगह ले जाने को कहा। मामला पुलिस तक के पास जा पहुंचा, जिसके बाद अस्पताल के खिलाफ के दर्ज हुआ। विभूतिखंड थाने के थानाध्यक्ष चंद्रशेखर सिंह के अनुसार अस्पताल के संचालक अखिलेश पांडेय के खिलाफ आपदा अधिनियम और महामारी अधिनियम के अलावा भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। मामले की जांच फिलहाल जारी है।

वहीं, बिहार के पटना और भागलपुर में इंजेक्शन की कालाबाजी किए जाने की खबर है। वहां आलम यह है कि मृत मरीज के नाम पर अस्पताल के मैनेजर ने रेमडेसिविर इंजेक्शन खरीद लिया। बाद में जब भंडाफोड़ हुआ तो दो लोग गिरफ्तार किए गए। पुलिसिया पूछताछ के दौरान मैनेजर ने माना कि उसने इन्हें ब्लैक में बेचने के लिए खरीदा था।

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