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COVID-19 से ठीक हुआ कारोबारी, तो जागा सेवा भाव, करने लगा अस्पताल में वॉर्डबॉय की नौकरी

व्यवसायी सुभाष बी गायकवाड ने होम आइसोलेशन खत्म होने के बाद अखबार में पीसीएमसी का वॉर्डबॉय के लिए विज्ञापन देखा। गायकवाड ने बताया कि मैं तुरंत भोसरी अस्पताल गया और अपना आवेदन प्रस्तुत किया। मुझे अगले दिन से जॉइन करने के लिए कहा गया।

सुभाष गायकवाड़ कहना है कि मेरा इरादा कठिनाई से गुजर रहे मरीजों और मानवता की सेवा करना है। (फोटोः इंडियन एक्सप्रेस)

कुछ महीने पहले तक 35 वर्षीय सुभाष बबन गायकवाड एक सिक्योरिटी एजेंसी में बिजनेस पार्टनर के रूप में प्रति माह लगभग 60,000 रुपये कमाते थे। अब, वह अस्पताल के वार्डबॉय के रूप में काम करते हुए सिर्फ 16,000 रुपये का वेतन कमा रहे हैं। लेकिन उन्होंने अपनी पसंद से अपना पिछला काम छोड़ दिया।

दरअसल गायकवाड़ को कुछ दिनों पहले कोरोना संक्रमण हुआ था। इस बीमारी से ठीक होने के बाद वे मरीजों की सेवा करना चाहते थे। खासकर ऐसे मरीज जो कोरोनोवायरस से प्रभावित हैं। व्यवसायी सुभाष बी गायकवाड ने होम आइसोलेशन खत्म होने के बाद अखबार में पीसीएमसी संचालित अस्पताल से जुड़ा वॉर्डबॉय के लिए विज्ञापन देखा। गायकवाड ने बताया कि मैं तुरंत भोसरी अस्पताल गया और अपना आवेदन प्रस्तुत किया। मुझे अगले दिन से जॉइन करने को कहा गया।

गायकवाड वॉर्डबॉय की नौकरी करने के लिए अपने स्कॉर्पियो से आते हैं, जिससे लोगों का ध्यान उनकी तरफ बरबस ही चला जाता है। लेकिन वह अपने काम के लिए लोगों की तारीफ भी बटोर रहे हैं कि उन्होंने बेहतर पैसे वाली नौकरी को छोड़कर खुद को मरीजों की सेवा में लगा दिया है। गायकवाड़ की पत्नी भी भोसरी अस्पताल में नर्स हैं।

गायकवाड कहते हैं मैं एक डर के बाद जिंदा बचा हूं। यदि आप जिंदा ही नहीं रहेंगे तो पैसे का कोई मतलब नहीं है। भगवान ने मुझे एक और मौका दिया है… मेडिकल बिरादरी ने मुझे एक नया जीवन दिया है। मैं इसे रोगियों की सेवा में लगाना चाहता हूं। पिंपरी-चिंचवाड़ के इंद्रायणी नगर इलाके में स्पाइन रोड के निवासी, गायकवाड़ जून में कोरोनावायरस टेस्ट पॉजिटिव आया था।

इसके बाद उन्होंने वाईसीएमएच के आईसीयू में पांच दिन बिताए। गायकवाड़ कहते हैं कि मैं इतना डर गया था कि मैंने अपनी पत्नी को एक संदेश भेजा कि मुझे नहीं लगता कि मैं बचूंगा। हालांकि, पांच दिनों के बाद वह ठीक हो गए। इसके बाद पांच दिनों के लिए उन्हें सामान्य वार्ड में ले जाया गया। गायकवाड ने कहा कि मेरी पत्नी मेरा सबसे बड़ा सहारा थी।

उनकी पत्नी को भी कोरोना हो गया जिसके बाद वह भी होम क्वारंटीन हो गईं। अस्पताल में नौकरी के बारे में गायकवाड कहते हैं कि पहले दिन उन्हें फर्श को साफ करने के लिए कहा गया था। अस्पताल में वहां मरीजों का कोरोनावायरस का टेस्ट किया जाता है। उन्होंने कहा कि मैंने इसे पूरी ईमानदारी से किया। गायकवाड ने बताया कि मैंने उस विभाग में एक महीने तक काम किया, अब मुझे दूसरे विभाग में ट्रांसफर कर दिया गया है।

मुझसे जो भी कहा जाता है … फर्श को साफ़ करना, टेबल व फाइलों को साफ करना, कचरा साफ करना, मैं उसे करता हूं। पीसीएमसी के एडिशनल कमिश्नर संतोष पाटिल ने कहा कि गायकवाड का उद्देश्य सामाजिक कार्य करना है विशेष रूप से कोरोनावायरस रोगियों की सेवा करना क्योंकि वह खुद बुरे सपने से गुजर चुके हैं। वह अपना काम ईमानदारी, समर्पण और प्रतिबद्धता के साथ कर रहे हैं।

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