1000 रुपये के लिए देहरादून के पोस्ट ऑफिस में खाता खुलवाने उमड़े बिहारी प्रवासी मजदूर, रोजाना खुल रहे 400 अकाउंट

यहां खड़े ज्यादातर लोग बिहार से हैं। ये लोग बिहार सरकार की 1,000 रुपये की नकद हस्तांतरण योजना का लाभ उठाने के लिए उत्तराखंड में डाकघरों के बाहर खाता खुलवाने के लिए पिछले कुछ दिनों से कतार लगा रहे हैं।

Author Edited By सिद्धार्थ राय नई दिल्ली | Updated: May 6, 2020 9:00 AM
जनरल पोस्ट ऑफिस (जीपीओ) के बाहर इंतज़ार करतीं शोभा देवी। (Photo: Lalmani Verma)

टोकन नंबर 72, शोभा देवी देहरादून में घंटाघर के पास जनरल पोस्ट ऑफिस (जीपीओ) के बाहर लोगों को दूर-दूर रखने के लिए बने सफ़ेद निशान पर खड़ी हुई हैं। वहीं उनके परी राजकुमार पासनाथ भी 3 किमी दूर सहारनपुर चौक के एक अन्य डाकघर में कतार में लगे हैं। यहां खड़े ज्यादातर लोग बिहार से हैं। ये लोग बिहार सरकार की 1,000 रुपये की नकद हस्तांतरण योजना का लाभ उठाने के लिए उत्तराखंड में डाकघरों के बाहर खाता खुलवाने के लिए पिछले कुछ दिनों से कतार लगा रहे हैं। बिहार सरकार ने देश भर में फंसे राज्य के प्रवासियों के लिए इस योजना की घोषणा की है।

देहरादून के वरिष्ठ डाक अधीक्षक, अनसूया प्रसाद ने कहा कि देहरादून में हर दिन 400 से अधिक डाक बैंक खाते खोले जा रहे हैं। उन्होंने कहा “कुछ लोग जिन्होंने पिछले हफ्ते खाते खुलवाए थे अब वे पैसे निकालने के लिए आ रहे हैं। बाकी अन्य लोग खाता खुलवाने के लिए कतारों में लगे हैं। प्रतिदिन निकासी की जा रही है।” जीपीओ में भीड़ को देखते हुए लोगों को 30 अन्य डाकघरों में खाते खोलने की अनुमति दी गई है। प्रसाद ने कहा, “अकेले जीपीओ के अंदर पांच काउंटर खोले गए हैं।” उन्होंने कहा कि दूसरे राज्यों के प्रवासियों ने भी इस बात की उम्मीद की है कि उनकी सरकारें भी इसी तरह की नकदी हस्तांतरण योजनाएं शुरू करेंगी।

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प्रसाद ने बताया कि अकेले देहरादून में, प्रवासी मजदूरों के 2,000 से अधिक खाते पिछले एक सप्ताह में खोले गए है। बिहार के प्रधान सचिव, आपदा प्रबंधन, प्रत्यय अमृत ने कहा कि 25 लाख से अधिक प्रवासियों ने इस योजना के लिए पंजीकरण कराया था और सरकार ने अब तक सीएम राहत कोष के तहत लगभग 20 लाख वितरित किया है।

हाथ में आधार कार्ड पकड़े हुए शोभा जीपीओ के बाहर बैठी हैं। शोभा जो लोगों के घरों में काम करती हैं बताती हैं कि लॉकडाउन के बाद से वे काम पर नहीं गई हैं।  शोभा ने कहा “मेरे पति सब्जी बेचते हैं, लेकिन उस से कमाई कम होती है। हमारे घर के पास पुलिस चौकी में आटा और चावल का दिया गया था, लेकिन यह हमारे परिवार के लिए पर्याप्त नहीं है। अगर हम में से किसी एक को भी 1,000 रुपये मिलते हैं, तो यह मददगार होगा।

आज शोभा पांचवीं बार पोस्ट ऑफिस आई है। उन्होंने कहा “मैं पिछले हफ्ते चार बार यहां आई थी, लेकिन पोस्ट ऑफिस के अंदर नहीं जा पाई, क्योंकि वे बहुत कम लोगों को जाने दे रहे थे। इसलिए आज, मैं सुबह 3 बजे उठी। खाना पकाया और 4.30 बजे पहुंचा गई, हालाँकि पोस्ट ऑफिस सुबह 8 बजे ही खुलता है। लेकिन मेरे सामने कतार में पहले से ही कई लोग थे।

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