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लॉकडाउन में चौपट हुआ धंधा, तीन दिन में 400KM साइकिल चला पहुंच गया गांव, ड्राइवर की आपबीती

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 25 मार्च से 14 अप्रैल तक के लॉकडाउन का ऐलान किया है, इस बीच लोगों का पैदल या रिक्शे-ठेले से ही अपने-अपने घर पहुंचना जारी है।

Author Edited By कीर्तिवर्धन मिश्र रांची/पटना | Updated: April 3, 2020 6:06 PM
प्रतीकात्मक तस्वीर।

कोरोनावायरस के बढ़ते खतरे के मद्देनजर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 24 अप्रैल को देश को 21 दिन के लिए लॉकडाउन करने का आदेश दिया था। हालांकि, उनके आदेश के कुछ ही घंटों बाद बड़ी संख्या में अप्रवासी दिहाड़ी मजदूर पैदल ही अपने गृहराज्यों की तरफ जाने लगे। हालात यह हो गए कि हाईवे पर पैदल ही घर जाने वालों की भीड़ लग गई। ज्यादातर अप्रवासियों का कहना था कि लॉकडाउन की वजह से उनके खाने-पीने पर संकट खड़ा हो गया है। ऐसे में उन्हें अपने घरों की तरफ वापस जाना पड़ रहा है। बिहार के गोपालगंज के रहने वाले राजकुमार की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। वह महज एक साइकिल के सहारे रांची से बिहार स्थित अपने घर पहुंच गया।

झारखंड की राजधानी रांची में ड्राइवर का काम करने वाले राजकुमार का धंधा लॉकडाउन के चलते चौपट हो गया। इसके चलते उसकी सामने रोजी-रोटी का जुगाड़ कर पाना भी मुश्किल होने लगा। राजकुमार ने फैसला किया कि वह साधन के न होने के बावजूद अपने घर पहुंचेगा। ट्रेन और राज्य परिवहन पर पूरी तरह बैन लगने की वजह से उसने साइकिल से ही अपने घर पहुंचने की ठानी और रांची से 500 किलोमीटर दूर गोपालगंज के सफर पर निकल पड़ा।

सफर के दौरान राजकुमार को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा, लेकिन उसने हार नहीं मानी। रास्ते में पुलिसकर्मियों ने भी उसकी मदद की और खाने-पीने का सामान मुहैया कराया। रास्ते में भी लोगों ने उसकी काफी मदद की। राजकुमार ने तीन दिन के समय में करीब 500 किमी का सफर पूरा किया और सही सलामत अपने घर पहुंचा।

लॉकडाउन के ऐलान के बाद किसी अप्रवासी के घर पहुंचने का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी कई लोग पैदल, रिक्शे पर और ठेले पर परिवारों को बिठाकर घर पहुंचे हैं। उत्तर प्रदेश में तो योगी आदित्यनाथ सरकार ने मजदूरों को लाने-ले जाने के लिए 1000 बसों की व्यवस्था कर दी थी। हालांकि, दूसरे राज्य के मजदूरों को पैदल या अपने साधन से लंबा सफर कर अपने शहरों-गांवों तक जाना पड़ा है। हाल ही में दिल्ली से 300 किमी दूर अपने घर जा रहे रणवीर नाम के एक युवक की आगरा तक 200 किमी पैदल चलने के बाद ही मौत हो गई थी। उसने अपने परिवार से आखिरी फोन कॉल में कहा था, ‘अगर लेने आ सकता हो तो आ जाओ।’

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