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कोरोना से ऐसे निपट रहा नीतीश का बिहार- अस्पताल को टारगेट नहीं मिला तो टेस्ट ही कर दिया बंद

जांच केन्द्रों के बाहर लोगों की लंबी कतारें हैं लेकिन लोगों के टेस्ट नहीं हो पा रहे हैं और कई कई दिनों में जांच का नंबर आ रहा है। ऐसे में यदि कोई कोरोना मरीज है तो उससे संक्रमण फैलने का खतरा बना हुआ है।

Coronavirus Spread in Bihar: एक महिला का कोरोना टेस्ट के लिए सैंप लेता हुआ स्वास्थ्यकर्मी। (फोटोः पीटीआई)

बिहार में कोरोना के खिलाफ लड़ाई में घोर लापरवाही सामने आयी है। दरअसल बिहार के भागलपुर जिले में कोरोना मरीजों की जांच के लिए 8 सेंटर तो बनाए गए हैं लेकिन यहां सिर्फ 350 मरीजों की जांच ही हो पा रही है। ऐसे में पूल सैंपलिंग की बात तो दूर है जिले में कोरोना मरीजों के संपर्क में आए लोगों की भी जांच नहीं हो पा रही है। इससे जिले में कोरोना का संक्रमण व्यापक रूप से फैलने का खतरा पैदा हो गया है।

जांच केन्द्रों के बाहर लोगों की लंबी कतारें हैं लेकिन लोगों के टेस्ट नहीं हो पा रहे हैं और कई कई दिनों में जांच का नंबर आ रहा है। ऐसे में यदि कोई कोरोना मरीज है तो उससे संक्रमण फैलने का खतरा बना हुआ है। राज्य में कोरोना के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, इसके बावजूद बिहार स्वास्थ्य विभाग की यह लापरवाही पूरे सिस्टम पर ही सवाल खड़े कर रही है।

स्थिति ये है कि जिले में कोरोना की जांच के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन की सुविधा भी नहीं मिल रही है। जिसके कारण लोगों को कोविड जांच सेंटर्स जाकर कतार में लगना पड़ रहा है। कोरोना संदिग्धों को जांच के लिए एक सप्ताह बाद तक का नंबर मिल रहा है। ऐसे में यदि कोई संदिग्ध कोरोना पॉजिटिव निकलता है तो इस बात से समझा जा सकता है कि इस दौरान वह कोरोना का करियर बनकर कितने लोगों को संक्रमित कर सकता है।

जिला अस्पताल के सिविल सर्जन का कहना है कि सरकार ने रोजाना 350 लोगों की जांच का लक्ष्य दिया है। इससे ज्यादा हम नहीं कर सकते हैं। बिना लक्षण वाले मरीजों का सैंपल नहीं लेना है और उन्हें खुद ही होम आइसोलेशन में रहना है।

बता दें कि भागलपुर जिले में 8 केन्द्रों पर कोरोना की जांच हो रही है। इन केन्द्रों में सदर अस्पताल, मायागंज अस्पताल, मोहद्दीनगर, हुसैनाबाद, रिकाबगंज, नवगछिया, कहलगांव और सुल्तानगंज अस्पताल शामिल हैं।

कोरोना माहमारी में बिहार की स्वास्थ्य सेवाएं किस तरह से चरमरा गई है। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि बिहार के पीएमसीएच में तैनात एक डॉक्टर की पत्नी ने अस्पताल में बेड नहीं मिलने के चलते इलाज के अभाव में दम तोड़ दिया। डॉक्टर द्वारा कई अस्पतालों में चक्कर काटे गए लेकिन किसी भी अस्पताल में मरीज को भर्ती नहीं किया गया। पटना पीएमसीएच में तैनात डॉ.रंजीत की पत्नी शुगर और बल्ड प्रेशर की मरीज थी। उनका कोरोना टेस्ट भी कराया गया था लेकिन उसकी रिपोर्ट निगेटिव आयी थी। इसके बावजूद उन्हें कई अस्पतालों में भर्ती करने से इंकार कर दिया गया।

अमेरिका की स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं का दावा है कि बिहार में कोरोना के डाटा की खराब रिपोर्टिंग की जा रही है। रिपोर्ट में कहा गया है कि बिहार में आंकड़े पारदर्शिता के साथ नहीं जुटाए गए हैं। बता दें कि इससे पहले विपक्षी नेता तेजस्वी यादव भी सरकार पर ऐसा ही आरोप लगा चुके हैं।

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