controversy on dwarika Sharda Peeth Shankaracharya Post - Jansatta
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द्वारिका पीठ के नए शंकराचार्य को लेकर उलझे संत

द्वारिका शारदा पीठ के शंकराचार्य पद को लेकर विवाद हो गया है। संतों के एक खेमे ने इस पीठ पर भूमा पीठ हरिद्वार के परमाध्यक्ष स्वामी अच्युतानंद तीर्थ को शंकराचार्य नामित कर दिया है।

स्वामी अच्युतानंद तीर्थ

द्वारिका शारदा पीठ के शंकराचार्य पद को लेकर विवाद हो गया है। संतों के एक खेमे ने इस पीठ पर भूमा पीठ हरिद्वार के परमाध्यक्ष स्वामी अच्युतानंद तीर्थ को शंकराचार्य नामित कर दिया है। इन संतों ने शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती को शंकराचार्य के पदों से हटाने और उन्हें संन्यास परंपरा से अवमुक्त करने का एलान किया है। वहीं अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद, काशी विद्वत परिषद, द्वारिका शारदा पीठ, ज्योतिष पीठ बद्रीनाथ मठ और अखिल भारतीय संन्यासी परिषद ने स्वामी अच्युतानंद तीर्थ को द्वारिका शारदा पीठ का शंकराचार्य मानने से इनकार कर उन्हें फर्जी शंकराचार्य बताया है। बनारस की विद्वत परिषद के कुछ पदाधिकारी और सदस्यों ने देहरादून जिले के हरिपुर कला क्षेत्र में स्थित अद्भूत मंदिर के परिसर में शुक्रवार को आयोजित एक समारोह में स्वामी अच्युतानंद तीर्थ को द्वारिका शारदा पीठ का शंकराचार्य घोषित किया। इस पट्टाभिषेक समारोह की अध्यक्षता सुमेरु पीठ के शंकराचार्य स्वामी नरेंद्रानंद गिरि ने एलान किया की स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती किसी भी पीठ के शंकराचार्य नहीं हैं। वे फर्जी रूप से अपने को ज्योतिषपीठ बद्रीनाथ और द्वारिका शारदा पीठ का शंकराचार्य बताते हैं। उन्होंने कहा कि वे शंकराचार्य क्या संन्यासी बनने के योग्य भी नहीं है। उन्होंने स्वामी स्वरूपानंद को संन्यास के साथ-साथ अन्य सभी पदों से अवमुक्त करने का एलान करते हुए कहा कि स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती आठवीं कक्षा में चार बार फेल हुए थे।

उधर, दूसरी ओर स्वामी शारदा पीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने अच्युतानंद तीर्थ को द्वारिका शारदा पीठ का शंकराचार्य बनाए जाने का विरोध किया। उन्होंने कहा कि कुछ फर्जी संतों की ओर से स्वामी अच्युतानंद तीर्थ को फर्जीवाड़ा करते हुए फर्जी शंकराचार्य बनाया गया है। काशी की विद्वत परिषद के अध्यक्ष पंडित रामयत्न शुक्ल ने कहा कि विद्वत परिषद ने स्वामी अच्युतानंद तीर्थ को शंकराचार्य नामित नहीं किया है। उनके पट्टाभिषेक समारोह में विद्वत परिषद का कोई भी पदाधिकारी या सदस्य नहीं गया। उन्होंने अच्युतानंद तीर्थ को फर्जी शंकराचार्य बताया।

वहीं दूसरी ओर अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष मंहत नरेंद्र गिरि और महामंत्री मंहत हरिगिरि ने कहा कि स्वामी अच्युतानंद तीर्थ और उनके कार्यक्रम में शामिल होने वाले सभी संतों का सामाजिक बहिष्कार किया गया है। इन संतों का संत समाज से हुक्का पानी बंद कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ही ज्योतिष पीठ बद्रीनाथ और द्वारिका शारदा पीठ के असली शंकराचार्य हैं। अखिल भारतीय संन्यासी परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष मंहत रविंद्र पुरी ने भी स्वामी अच्युतानंद तीर्थ को शंकराचार्य मानने से इनकार करते हुए कहा कि भारत में आदिजगतगुरु शंकराचार्य द्वारा स्थापित चार पीठों शृंगेरी के शंकराचार्य स्वामी भारती तीर्थ, पुरी के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद और द्वारिका शारदा पीठ और ज्योतिष पीठ बद्रीनाथ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती हैं।

उन्होंने कहा कि इन तीन शंकराचार्यो के अलावा देश में कोई भी शंकराचार्य नहीं है। यदि इन तीनों शंकराचार्यों के अलावा कोई साधु अपने को शंकराचार्य बताता है तो वह फर्जी शंकराचार्य है। सनातन धर्म महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष स्वामी प्रबोधानंद गिरि, अवधूत मंडल आश्रम हरिद्वार के अध्यक्ष, महामंडलेश्वर स्वामी संतोषानंद और महामंडलेश्वर स्वामी प्रेमानंद ने एक साझा पत्रकार वार्ता में कहा कि स्वामी अच्युतानंद तीर्थ ही द्वारिका शारदा पीठ के असली शंकराचार्य हैं। स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती को उन्होंने द्वारिका शारदा पीठ का शंकराचार्य मानने से ही इनकार कर दिया। इन तीनों संतों का कहना है कि अखाड़ा परिषद को शंकराचार्य नामित करने का कोई अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा कि अखाड़ा परिषद का काम केवल कुंभ के समय मेले की व्यवस्था करने का काम है। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के बहिष्कार के कारण स्वामी अच्युतानंद तीर्थ के पट्टाभिषेक समारोह में कोई भी अखाड़ा शामिल नहीं हुआ। केवल दो महामंडलेश्वर स्वामी प्रेमानंद और स्वामी संतोषानंद को छोड़कर कोई दूसरा महामंडलेश्वर इस समारोह में शामिल नहीं हुआ।

शंकराचार्य स्वामी सरस्वती ने कहा कि इस फर्जी पट्टाभिषेक समारोह ने शंकराचार्य की परंपरा का अपमान किया है। इसलिए इस फर्जीवाड़े के खिलाफ न्यायालय में स्वामी अच्युतानंद तीर्थ के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जाएगा। सरस्वती के प्रवक्ता स्वामी अभिमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा कि गुजरात में स्थित द्वारिकाधीश के पास स्थित चबूतरे में ही द्वारिका शारदा पीठ के शंकराचार्य का अभिषेक किया जाता है। इस चबूतरे पर ही जिस संत का द्वारिका शारदा पीठ के शंकराचार्य के रुप में अभिषेक होगा, उसे ही इस पीठ का शंकराचार्य मना जाएगा। अन्य किसी भी जगह पर किसी भी संत का अभिषेक करके उसे द्वारिका शारदा पीठ का शंकराचार्य घोषित करना अवैध है।

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