मैदानी इलाके की फिजा बदल देगा कांग्रेस का दलित दांव

किसान आंदोलन ने उत्तराखंड के मैदानी क्षेत्रों की राजनीति की दिशा ही बदल दी है।

कांग्रेस का दलित दांव कारगर सावित होगा।

किसान आंदोलन ने उत्तराखंड के मैदानी क्षेत्रों की राजनीति की दिशा ही बदल दी है। इससे कुमाऊं के सबसे बड़े दलित नेता यशपाल आर्य और उनके विधायक बेटे संजीव आर्य को भाजपा छोड़ने और कांग्रेस में आने पर विवश कर दिया। यशपाल आर्य राज्य की भाजपा सरकार में कैबिनेट मंत्री थे वे उत्तराखंड की दलित राजनीति में भारी भरकम नेता माने जाते हैं। उनके बेटे संजीव आर्य भाजपा के टिकट पर नैनीताल से विधायक हैं जबकि यशपाल आर्य कुमाऊं मंडल के सिख और किसान बाहुल्य तराई क्षेत्र बाजपुर से विधायक हैं।

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राज्य की दलित राजनीति में उनका दखल बहुत मजबूत है। कांग्रेस यशपाल आर्य के मार्फत उत्तराखंड के दलितों को साधना चाहती है। उनके राजनीति गुरु नारायण दत्त तिवारी थे। तिवारी की 2002 में जब उत्तराखंड की पहली निर्वाचित सरकार बनी थी तब तिवारी ने उन्हें विधानसभा का अध्यक्ष बनाया था। उसके बाद यशपाल का राजनीतिक कद बढ़ता चला गया। 2002 से वे लगातार उत्तराखंड विधानसभा के विधायक चुने जाते रहे। 2017 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले वे तब के मुख्यमंत्री हरीश रावत के मतभेद होने के कारण भाजपा में चले गए थे। तब भाजपा ने उन्हें और उनके बेटे को विधानसभा का टिकट दिया था। दोनों विधानसभा का चुनाव जीते और भाजपा सरकार में यशपाल आर्य को महत्त्वपूर्ण विभाग दिया गया।

राजनीतिक विश्लेषक डॉ अवनीत कुमार घिल्डियाल का मानना है कि दलित नेता यशपाल आर्य के भाजपा छोड़ने और कांग्रेस में आने से राज्य की राजनीति के चुनावी समीकरण एकदम बदल गए हैं। उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र के पर्वतीय और मैदानी क्षेत्रों में भाजपा का दलित वोट बैंक यशपाल आर्य के कांग्रेस में जाने से भाजपा को छोड़ कर कांग्रेस की ओर जाएगा विधानसभा चुनाव में यशपाल आर्य के कारण दलित मतदाता भाजपा में चला गया था। इसका नुकसान कांग्रेस को झेलना पड़ा कांग्रेस सत्ता से बाहर हो गई थी।

उत्तराखंड के मैदानी जिलों हरिद्वार, ऊधम सिंह नगर, देहरादून और नैनीताल के मैदानी क्षेत्रों में किसान आंदोलन का अत्यधिक प्रभाव है। इस क्षेत्र का किसान बड़ी संख्या में किसान आंदोलन से जुड़ा है। किसान आंदोलन ने इस क्षेत्र की राजनीति की दिशा ही बदल दी है। यशपाल आर्य कुमाऊं के जिस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं वहां पर किसान आंदोलन बहुत उग्र है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी तराई के इसी क्षेत्र खटीमा से विधायक हैं। इस तरह मुख्यमंत्री के तराई क्षेत्र से यशपाल आर्य का कांग्रेस में जाना मुख्यमंत्री के लिए भी बड़ा झटका है।

भाजपा के दिग्गज नेता कैबिनेट मंत्री अरविंद पांडे, पूर्व मुख्यमंत्री भाजपा नेता विजय बहुगुणा के बेटे शेखर बहुगुणा भी इसी तरह क्षेत्र के सितारगंज विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं। कांग्रेस के दिग्गज नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश के निधन के बाद कुमाऊं में कांग्रेस के पास हरीश रावत के अलावा कोई अन्य जाति का बड़ा नेता नहीं था। इंदिरा हृदयेश ब्राह्मण थी और हरीश रावत राजपूत समुदाय के हैं। ऐसे में यशपाल आर्य के कांग्रेस में आने से पार्टी को एक बड़ा दलित चेहरा मिल गया है। वैसे कांग्रेस के पास राज्यसभा सदस्य प्रदीप टम्टा दलित चेहरा है परंतु उनका प्रभाव कुमाऊं में इतना नहीं है जितना यशपाल आर्य का है।

उत्तराखंड में मैदानी क्षेत्रों के अलावा दलित समुदाय अल्मोड़ा, पिथौरागढ़, चमोली, पौड़ी और उत्तरकाशी क्षेत्र में भी प्रभावशाली है। आर्य के कांग्रेस में आने से इस पर्वतीय क्षेत्र का दलित मतदाता भी भाजपा छोड़कर कांग्रेस की ओर रुझान करेगा। आर्य को कांग्रेस में लाने का श्रेय नेता प्रतिपक्ष प्रीतम सिंह को है क्योंकि प्रदीप टम्टा हरीश रावत खेमे के माने जाते हैं। 2016 में हरीश रावत ने मुख्यमंत्री रहते हुए प्रदीप टम्टा को राज्यसभा का टिकट दिया था जिससे यशपाल नाराज होकर भाजपा में चले गए थे। रावत से नाराजगी के कारण ही कांग्रेस के दिग्गज नेता रहे विजय बहुगुणा, सतपाल महाराज, हरक सिंह रावत, सुबोध उनियाल, उमेश शर्मा काऊ, प्रदीप बत्रा, कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन ने कांग्रेस छोड़कर भाजपा का दामन थामा था।

अब यशपाल आर्य के कांग्रेस में से वापस आने से सतपाल महाराज ,उमेश शर्मा काऊ, प्रदीप बत्रा, हरक सिंह रावत के कांग्रेस में फिर लौटने की चचार्एं गर्म हो गई हैं। माना जा रहा है कि आर्य ने इन सब को कांग्रेस में वापस आने की राह दिखा दी है। जिस तरह कांग्रेस ने पंजाब में चरणजीत सिंह चन्नी को मुख्यमंत्री बना कर दलित कार्ड खेला वैसा ही यशपाल आर्य को कांग्रेस में शामिल करके दलित कार्ड खेला गया। इससे दलित मतदाता के कांग्रेस की और फिर से विधानसभा चुनाव में लौटने की संभावना है।

पिछले दिनों मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को जब यह भनक लगी कि वे भाजपा छोड़ कांग्रेस में जा रहे हैं तब मुख्यमंत्री धामी आर्य को बिना बताए अचानक उनके घर सुबह नाश्ता करने चले गए और उन्हें मनाने की कोशिश की थी। पर आर्य ने कांग्रेस में जाने का इरादा पक्का कर लिया था।यशपाल आर्य कुमाऊं के जिस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं वहां पर किसान आंदोलन बहुत उग्र है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी तराई के इसी क्षेत्र खटीमा से विधायक हैं। इस तरह मुख्यमंत्री के तराई क्षेत्र से यशपाल आर्य का कांग्रेस में जाना मुख्यमंत्री के लिए भी बड़ा झटका है।

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