पंजाब जैसी उथल-पुथल से बचना होगा कांग्रेस को

हिमाचल कांग्रेस में भी पंजाब कांग्रेस की तरह उथल-पुथल मचे, इससे पहले ही कांग्रेस आलाकमान को प्रदेश में पार्टी के मसले सुलझा लेने चाहिए।

सांकेतिक फोटो।

ओमप्रकाश ठाकुर

हिमाचल कांग्रेस में भी पंजाब कांग्रेस की तरह उथल-पुथल मचे, इससे पहले ही कांग्रेस आलाकमान को प्रदेश में पार्टी के मसले सुलझा लेने चाहिए। स्थिति प्रदेश कांग्रेस की भी ठीक नहीं है। कब और कहां लावा फूट पड़े, इस बाबत कुछ नहीं कहा जा सकता। जिस तरह पंजाब में कांग्रेस के दोबारा सत्ता में आने के अवसर थे, उसी तरह प्रदेश में कांग्रेस पार्टी के सता में आने के अवसर है। प्रदेश में जनता हर पांच साल बाद सत्ता बदल देती है। वैसे भी प्रदेश की जयराम सरकार और संगठन में सब कुछ ठीक नहीं है।

पार्टी के भीतर से ही अंदरखाने आए दिन हल्ला मचा दिया जाता है कि मुख्यमंत्री को बदला जा रहा है। मुख्यमंत्री बदले या न बदले लेकिन इस तरह की अटकलें भाजपा के लिए खतरनाक तो हंै ही। ऐसे में कांग्रेस के लिए सत्ता का रास्ता साफ दिखाई दे रहा है लेकिन यह तभी है कि अभी से नेतृत्व को लेकर तस्वीर साफ कर दी जाए। पंजाब की तरह चुनावों से ऐन पहले अगर घमासान मचा तो स्थिति बिगड़ जाएगाी।

वर्ष 2022 के आम चुनाव को लेकर अभी काफी समय बचा हुआ है और कांगेस में आधा दर्जन से ज्यादा नेता मुख्यमंत्री पद के दावेदार माने जा रहे हैं। इनमें नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री, महिला कांग्रेस विधायक आशा कुमारी, कांगड़ा से पूर्व मंत्री गुरमुख सिंह बाली और सुधीर शर्मा, मंडी से कौल सिंह ठाकुर और हमीरपुर से पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष सुखविंदर सिंह सुक्खू के नाम प्रमुख है।

हालांकि प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष कुलदीप सिंह राठौर भी दौड़ में हो सकते हैं लेकिन वे अब तक चुनावी राजनीति में सक्रिय नहीं रहे हंै। नाम तो इनके अलावा भी हंै। लेकिन गांधी परिवार ने जिस तरह पंजाब में कप्तान अमरिंदर सिंह को चलता किया है उससे एक संदेश तो तमाम कांग्रेसियों में चला ही गया है कि जो ज्यादा दबाव की राजनीति करेगा, उसे चलता किया जा सकता है। प्रदेश कांग्रेस में ऐसा न हो, इसलिए बेहतर तो यही रहेगा कि पार्टी के अंदरूनी मामलों को पहले ही सुलझा लिया जाए। ऐसे में अगर किसी को पार्टी से निकलना भी हो तो उसे समय पर ही बाहर चलता किया जाए ताकि पार्टी को होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए समय मिल सके।

कुलदीप राठौर को प्रदेश अध्यक्ष के पद से हटाने के लिए नेता प्रतिपक्ष, सुधीर शर्मा और आशा कुमारी ने मुहिम जरूर छेड़ी थी लेकिन वह अब खत्म होती नजर आ रही है। हॉलीलाज कांग्रेस को लेकर भाजपा की ओर से लगातार अटकलें लगवा दी जाती हैं कि यह परिवार भाजपा के साथ लगातर संपर्क में है। मुख्यमंत्री जयराम तो पहले से ही हॉलीलाज परिवार से नजदीकियां सार्वजनिक करते रहे हैं ताकि जनता में संदेश जाता रहे।

यह कांग्रेस के कार्यकर्ता व दूसरे छोटे नेता भी मानते हैं कि नेतृत्व को लेकर तस्वीर साफ होनी चाहिए ताकि वह खुलकर जमीन पर काम कर सकें। अगर ऐसा नहीं होता तो यह साफ होना चाहिए कि जीत के लिए पर्याप्त सीटें हासिल करने के बाद कांग्रेस की ओर से मुख्यमंत्री कौन होगा इस बाबत आलाकमान खुद फैसला करेगा और वह फैसला सभी को मान्य होगा। बहरहाल, पंजाब कांग्रेस में जिस तरह से आलाकमान ने फैसला किया है उससे प्रदेश के बड़े कांग्रेस नेताओं में संदेश तो चला गया है कि पत्ता तो किसी का भी कट सकता है। जब कैप्टन अमरिंदर सिंह को जमीन पर लाया जा सकता है तो नकेल किसी पर भी कसी जा सकती है।

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