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Rajasthan Election: BJP के गढ़ हाड़ौती में सेंधमारी की कोशिश में कांग्रेस, संघ संभाल सकता है मोर्चा

हड़ौती बीजेपी ही नहीं बल्कि राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ का मजबूत गढ़ रहा है। राजस्थान में संघ अपने कार्य को बड़े पैमाने पर हड़ौती से जोड़ता है। संघ प्रचारकों का दौरा और अधिकारियों की बैठक होते रहती है। एक जमाने में यह इलाका जनसंघ के लिए भी अहम था। लेकिन बीजेपी के खस्ताहाल को देखकर संघ भी काफी ज्यादा चिंता में हैं।

December 3, 2018 3:59 PM
वसुंधरा राजे सिंधिया ने झालरापाटन सीट से किया नामांकन। (PTI Photo)

हाड़ौती क्षेत्र के अंदर राजस्थान के चार मुख्य जिले बारां, बूंदी, कोटा और झालावाड़ आते हैं। इस क्षेत्र को शुरु से ही राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ का गढ़ माना जाता है। साल 2013 में हुए चुनावों में बीजेपी ने यहां 17 में से 16 सीटें जीती थी और कांग्रेस को महज एक सीट पर संतोष करना पड़ा था। लेकिन कांग्रेस ने यहां समझदारी दिखाते हुए दूरगामी परिणामों के लिए काफी मेहनत की और यहीं कारण है कि हाड़ौती में अब वसुंधरा सरकार की जमीन दरक रही हैं। खबरें आ रही हैं की हाड़ौती को बचाए रखने के लिए अब संघ इस क्षेत्र में चुनाव प्रचार की कमान संभाल सकता है।

दरअसल,हाड़ौती क्षेत्र की झालरापाटन सीट से वसुंधरा राजे लगातार चुनाव जीतती हुई आ रही हैं। इसके अलावा उनके बेटे दुष्यंत यहां की झालावाड़ सीट का लोकसभा में प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। लेकिन लंबे समय से बीजेपी को मौका दे रहे इस क्षेत्र के लोग सरकार से नाखुश है। वहीं कांग्रेस की जनसंपर्क यात्राओं ने यहां लोगों को वसुंधरा सरकार की नाकामी का एहसास और भी गहराई से करवाया है। 2013 में बुरी तरह हारने के बावजूद भी कांग्रेस ने इस क्षेत्र में जमकर प्रचार किया है और बेरोजगारी, गरीबी, फसलों का सही मूल्य ना मिलने और किसानों की समस्या आदि परेशानियों की तरफ जनता का ध्यान खींचा है। ऐसे में लोगों को कांग्रेस एक विकल्प के रूप में नज़र आने लगी हैं। वहीं कांग्रेस ने प्रत्याशी भी ऐसे खड़े किए हैं जिनके कारण बीजेपी को वोट ना मिलने का खतरा बढ़ गया है।

झालरापाटन विधानसभा वसुंधरा राजे के सामने बीजेपी के ही बागी नेता और वसुंधरा राजे के धुर विरोधी जसवंत सिंह के बेटे मानवेंद्र सिंह को कांग्रेस में ने मैदान में उतार दिया है। वसुंधरा से राजपूतों की नाराज़गी का फायदा उठाकर मानवेंद्र राजपूती वोट बैंक में सेंध लगा सकते हैं। वहीं बारां जिले की अंता सीट से कृषि मंत्री प्रभुलाल सैनी चुनाव लड़ रहे हैं जिन्हें कांग्रेस के दिग्गज नेता प्रमोद कुमार भाया से कड़ी टक्कर मिल रही है। गौरतलब है कि मोदी लहर के बावजूद 2013 में सैनी इस सीट पर बड़ी मुश्किल से जीत पाए थे इसलिए वे इस सीट पर चुनाव नहीं लड़ना चाह रहे थे लेकिन उनको बीजेपी ने यहीं से टिकट दिया है। कोटा के सांगोंद में बीजेपी के हीरालाल नागर और कांग्रेस के भरत सिंह कुंदनपुर के बीच भी कांटे की टक्कर है। साल 2008 के विधानसभा चुनाव में भरत सिंह हीरालाल नागर को हरा भी चुके हैं। इसके अलावा अन्य सीटों पर भी कांग्रेस ने बीजेपी उम्मीदवारों के सामने तगड़े उम्मीदवारों को खड़ा किया।

हड़ौती बीजेपी ही नहीं बल्कि राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ का मजबूत गढ़ रहा है। राजस्थान में संघ अपने कार्य को बड़े पैमाने पर हड़ौती से जोड़ता है। संघ प्रचारकों का दौरा और अधिकारियों की बैठक होते रहती है। एक जमाने में यह इलाका जनसंघ के लिए भी अहम था। लेकिन बीजेपी के खस्ताहाल को देखकर संघ भी काफी ज्यादा चिंता में हैं।संघ कभी नहीं चाहेगा कि उसका एक आदर्श इलाका बीजेपी के हाथ से जाए। जानकारी के मुताबिक, चुनाव प्रचार के अंतिम दिनों में संघ की ओर से एक टीम इन इलाकों में विशेष रूप से काम कर सकती है।

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