मायावती ने अम्बेडकर के नाम दलित को ‘हाईजैक’ किया: कांग्रेस

कांग्रेस ने कहा कि अम्बेडकर और कांशीराम जाति प्रथा की व्यवस्था को खत्म करना चाहते थे जबकि मायावती ने इस व्यवस्था को और मजबूत किया।

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बसपा सुप्रीमो मायावती (फाइल फोटो)

कांग्रेस ने बहुजन समाज पार्टी (बसपा) मुखिया मायावती पर बाबा साहेब अम्बेडकर और बसपा संस्थापक कांशीराम के नाम पर दलित समाज को ‘हाईजैक’ करने का आरोप लगाते हुए रविवार (10 अप्रैल) को कहा कि पार्टी ने ‘भीम ज्योति यात्रा’ के जरिये उनके पर्दाफाश की सफल कोशिश की है। उत्तर प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष निर्मल खत्री ने ‘भीम ज्योति यात्रा’ के तीसरे और अंतिम चरण के समापन अवसर पर यहां संवाददाताओं से कहा कि मायावती ने बाबा साहब भीमराव अम्बेडकर और बसपा संस्थापक कांशीराम के नाम पर दलित समाज को ‘हाईजैक’ कर लिया है। लेकिन वह इन दोनों ही दलित नेताओं के बताये रास्ते पर बिल्कुल भी नहीं चलीं, बल्कि उन्होंने विपरीत आचरण किया।

उन्होंने कहा कि अम्बेडकर और कांशीराम जाति प्रथा की व्यवस्था को खत्म करना चाहते थे जबकि मायावती ने इस व्यवस्था को और मजबूत किया। बसपा सम्भवत: देश का ऐसा पहला राजनीतिक दल है। इसने जातियों के आधार पर अपने संगठन की समितियां बनायीं। मायावती ने दलितों को गुमराह किया। भीम ज्योति यात्रा के जरिये कांग्रेस ने उनका पर्दाफाश किया है।

खत्री ने एक सवाल पर कहा कि प्रदेश में अगले साल के शुरू में होने वाले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस सपा और बसपा में से किसी के भी साथ गठबंधन कतई नहीं करेगी। ये दोनों ही दल भाजपा की गोद में खेल रहे हैं। गत लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के सहयोगी रहे राष्ट्रीय लोकदल और बिहार में साथी रहे जनता दल यूनाईटेड के साथ किसी तरह के समझौते की सम्भावना सम्बन्धी सवाल पर कांग्रेस नेता ने कहा कि अगर ऐसी कोई सम्भावना है भी, तो उनका मानना है कि उन्हें उसे मीडिया से साझा नहीं करना चाहिये।

विधानसभा चुनाव के टिकट वितरण के सवाल पर खत्री ने कहा कि इसके लिये कवायद जारी है और आगामी जून तक इस बारे में काम मुकम्मल हो जाएगा। भीम ज्योति योजना के बारे में जिक्र करते हुए खत्री ने बताया कि इस यात्रा का मकसद अम्बेडकर के नाम पर सियासत और खोखली नारेबाजी करने वाले दलों का पर्दाफाश करना तथा इस महान विभूति के विचारों को आम जनता तक पहुंचाना था। उन्होंने बताया कि तीन चरणों की इस यात्रा के तहत प्रदेश के 55 जिलों में 10 हजार किलोमीटर का सफर तय किया गया। इस दौरान एक हजार से ज्यादा नुक्कड़ सभाएं आयोजित की गयीं।

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