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राज्‍यसभा चुनाव: रिजॉर्ट भेजे गए गुजरात कांग्रेस के 65 विधायक, हार्दिक पटेल बोले- विश्‍वासघातियों को चप्‍पल मारो

पहले राज्यसभा चुनावों की तारीख मार्च के लिए घोषित की गई थी, हालांकि कोरोना के चलते इन्हें टाल दिया गया था। तब से अब तक कांग्रेस के 8 विधायक इस्तीफा दे चुके हैं।

यह तस्वीर 4 जून की है, जब कांग्रेस के दो विधायकों के इस्तीफे के बाद राज्यसभा चुनावों के लिए पार्टी ने मीटिंग बुलाई थी। (फोटो- एक्सप्रेस)

गुजरात में राज्यसभा चुनाव से पहले ही राजनीतिक उठापटक शुरू हो गई है। 19 जून को होने वाले चुनाव से पहले ही कांग्रेस के तीन विधायक इस्तीफा दे चुके हैं। इसके ठीक बाद कांग्रेस ने अपने बाकी बचे 65 विधायको को एक रिजॉर्ट में भेज दिया, ताकि अन्य विधायकों के इस्तीफे रोके जा सकें और राज्यसभा सीट जीतने के लिए पार्टी की तालिका बरकरार रखी जा सके। बताया गया है कि कांग्रेस ने अपनी विधायकों को तीन समूहों में बांटकर गुजरात के ही अंबाजी, राजकोट और वडोदरा स्थित रिजॉर्ट में छिपाया है।

इस बीच कांग्रेस नेता हार्दिक पटेल ने 2017 के पाटीदार आंदोलन में करीबी सहयोगी रहे विधायक बृजेश मेरजा के इस्तीफे पर नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा, “लोगों को ऐसे विधायकों को चप्पलों से पीटना चाहिए, जो अपने वोटरों के साथ ही धोखा करते हैं। मुझे विश्वास है कि लोग इन धोखेबाज विधायकों को उपचुनाव में अच्छा सबक सिखाएंगे, जैसा जनता पहले भी कर चुकी है।”

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गौरतलब है कि राज्यसभा चुनाव पहले मार्च में होने थे, लेकिन कोरोनावायरस संक्रमण के मामले बढ़ने के बाद इन्हें टाल दिया गया। तब से लेकर अब तक कांग्रेस के 8 विधायक इस्तीफा दे चुके हैं। इस हफ्ते वडोदरा के कर्जन से विधायक अक्षय पटेल, वलसाड के कप्रदा से विधायक जीतू चौधरी और मोरबी के विधायक बृजेश मेरजा ने इस्तीफा दिया है। इसके चलते कांग्रेस की गुजरात से दो राज्यसभा सीटें जीतने की उम्मीदों को झटका लगा है।

विधायकों के इस्तीफे पर हार्दिक का कहना है कि भाजपा राज्यसभा में बहुमत हासिल करने के लिए हरसंभव जुगत लगा रही है। वह चुनाव से पहले ही कांग्रेस विधायकों पर दबाव बनाने में जुटी है। भाजपा के पास लोकसभा में तो संख्या है, लेकिन राज्यसभा में उन्हें बहुमत के लिए संघर्ष करना पड़ता है। इसलिए राज्यसभा चुनाव में वे अपने ज्यादा से ज्यादा नेताओं को जिताना चाहते हैं।

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हार्दिक ने कहा कि अब यह जिम्मेदारी चुनाव आयोग की है कि वह दलबदल करने वाले नेताओं पर अपना पक्ष साफ करे और पलटू नेताओं के खिलाफ कार्रवाई कर उदाहरण पेश करें, ताकि लोगों का लोकतंत्र पर भरोसा फिर से कायम हो। जो भी विधायक अपने वोटर्स का भरोसा तोड़कर पार्टी बदलते हैं, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।

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