राज्यसभा में उठी ओबीसी के हक की आवाज - Jansatta
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राज्यसभा में उठी ओबीसी के हक की आवाज

कांग्रेस के हनुमंत राव ने यह मुद्दा उठाते हुए कहा कि दलितों के पैरोकार बाबा साहेब अंबेडकर ने वर्ष 1950 में कहा था कि हम अपने सामाजिक और आर्थिक ढांचे से बराबरी को कब तक दूर रखेंगे क्योंकि आगे बढ़ने के लिए समानता बहुत जरूरी है।

Author नई दिल्ली | March 11, 2016 11:52 PM
राज्य सभा की कार्यवाही। (फाइल फोटो)

अन्य पिछड़ा वर्ग के कई पद रिक्त होने का मुद्दा राज्यसभा में उठा। सांसदों ने मांग की कि देश की आबादी में 16 फीसद का आंकड़ा रखने वाले इस वर्ग के लोगों को उनका जायज हक दिया जाए। शून्यकाल में कांग्रेस के हनुमंत राव ने यह मुद्दा उठाते हुए कहा कि दलितों के पैरोकार बाबा साहेब अंबेडकर ने वर्ष 1950 में कहा था कि हम अपने सामाजिक और आर्थिक ढांचे से बराबरी को कब तक दूर रखेंगे क्योंकि आगे बढ़ने के लिए समानता बहुत जरूरी है। उन्होंने कहा कि आजादी के इतने साल के बाद भी यह समानता नहीं आ पाई है। देश की जनसंख्या में करीब 16 फीसद के आंकड़े के साथ अपनी उपस्थिति दर्शाने वाले अन्य पिछड़ा वर्ग के लोग 27 फीसद आरक्षण मिलने के बावजूद उच्च पदों पर नियुक्तियों से वंचित हैं।

राव ने कहा ‘यहां तक कि विभिन्न सरकारी विभागों में भी ओबीसी के कई पद रिक्त पड़े हैं। मंत्रालय के समूह ए के अंतर्गत आने वाले पद, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में उच्च पद और हाई कोर्ट में शीर्ष पदों पर अन्य पिछड़ा वर्ग के समूहों के लोगों की नियुक्तियां नहीं के बराबर हैं।’ उन्होंने सरकार से इस ओर तत्काल ध्यान देने एवं जरूरी कदम उठाने की मांग की। विभिन्न दलों के कई सदस्यों ने इस मुद्दे से स्वयं को संबद्ध किया।

शून्यकाल में ही कांग्रेस के हुसैन दलवई ने अनुसूचित जाति के लोगों से जुड़ा मुद्दा उठाते हुए कहा कि ये लोग अभी भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। इस वर्ग के लोगों के 19 फीसदी लोगों के घरों में पेयजल की सुविधा है और इनमें शिक्षा का प्रतिशत केवल 47 है। देश में शौचालय निर्माण के लिए अभियान चलाया जा रहा है लेकिन इस वर्ग की बड़ी आबादी को यह सुविधा उपलब्ध नहीं है। चिंताजनक बात यह भी है कि इस वर्ग के लिए वर्ष 2014-15 में 386 करोड़ रुपए का आबंटन किया गया था जो 2015-16 में घटा कर 294 करोड़ रुपए कर दिया गया।’ उन्होंने कहा कि विभिन्न मंत्रालय इस वर्ग के लिए योजना बना रहे हैं लेकिन ठोस कार्रवाई नहीं हो रही है।

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