उत्तर प्रदेश में साल 2027 में विधानसभा चुनाव होना है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल है कि क्या फिर से कांग्रेस और समाजवादी पार्टी में गठबंधन होगा? अगर होता है तो कांग्रेस को कितनी सीटें मिलेंगी। यह सवाल इसलिए खड़े होने लगे हैं क्योंकि यूपी कांग्रेस के नवनियुक्त कांग्रेस प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने कांग्रेस की सीटों को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने 28 जून को कहा कि कांग्रेस गठबंधन के तहत 170 सीटों की मांग रखेगी। लेकिन सवाल यह है कि क्या समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव उनकी इस मांग पर कहां तक सहमत होते हैं।
हालांकि, कांग्रेस को अगर इस मोलभाव में 120-130 सीटें तक मिलती हैं, तब भी वह इस पर सहमत हो जाएगी। लेकिन कांग्रेस के इस मोलभाल को लेकर समाजवादी पार्टी सतर्क है और वह कांग्रेस को 60-80 से ज्यादा सीटें देने के पक्ष में नहीं है। ऐसे में सीट बंटवारे के लेकर आने वाले वक्त में समाजवादी पार्टी और कांग्रेस में खींचतान देखने को मिल सकती है।
कांग्रेस और समाजवादी पार्टी दोनों लोकसभा चुनाव 2024 में मिली सीटों को लेकर उत्साहित हैं। क्योंकि 2019 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को जहां एक भी सीट हासिल नहीं हुई थी। वहीं, 2024 के लोकसभा चुनाव में उसने उत्तर प्रदेश में 6 सीटों पर जीत हासिल की है। जबकि समाजवादी पार्टी को जहां 2019 के लोकसभा चुनाव में 5 सीटें हासिल हुईं थीं तो वहीं 2024 के लोकसभा चुनाव में 37 सीटों पर जीत हासिल की। ऐसे में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी दोनों उत्तर प्रदेश में अपनी खोई जमीन को हासिल करने की कोशिश में हैं।
लेकिन कांग्रेस इस बार यूपी में किसी एक पार्टी के गठबंधन के भरोसे नहीं बैठना चाहती है। क्याोंकि नए प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम समाजवादी पार्टी के साथ-साथ बहुजन समाज पार्टी को भी अलायंस में शामिल करने की वकालत कर रहे हैं।
| वर्ष और चुनाव | गठबंधन दल | सीट बंटवारा | सीटें जीतीं |
|---|---|---|---|
| 1996 विधानसभा चुनाव | बसपा | BSP 299, कांग्रेस 126 | BSP 67, कांग्रेस 33 |
| 2009 लोकसभा चुनाव | महान दल | कांग्रेस 69 (अन्य सीटों पर मित्र दल व निर्दलीय), महान दल 4 | कांग्रेस 21, महान दल 0 |
| 2012 विधानसभा चुनाव | RLD | कांग्रेस 357, RLD 46 | कांग्रेस 28, RLD 9 |
| 2017 विधानसभा चुनाव | समाजवादी पार्टी | सपा 298, कांग्रेस 105 | सपा 47, कांग्रेस 7 |
| 2019 लोकसभा चुनाव | महान दल | कांग्रेस 77, महान दल 3 | कांग्रेस 1, महान दल 0 |
| 2024 लोकसभा चुनाव | समाजवादी पार्टी | सपा 62, कांग्रेस 17, TMC 1 | सपा 37, कांग्रेस 6 |
राजेंद्र पाल का कहना है कि मैं गठबंधन पर फैसला करने के लिए अधिकृत नहीं हूं, लेकिन जो भी दल संविधान को मानते हैं, उन्हें उचित हिस्सेदारी मिलनी चाहिए। जब भी बहनजी (मायावती) कहेंगी, हम उनसे मुलाकात करने के लिए तैयार हैं। बता दें, यह वही, राजेंद्र पाल गौतम हैं, जो 19 मई को बिना अपॉइंटमेंट के सीधे मायावती से मिलने पहुंच गए थे। हालांकि, बसपा प्रमुख ने उनसे मुलाकात नहीं की थी।
एक वक्त था जब यूपी में ब्राह्मण, मुस्लिम और दलित वोट कांग्रेस का माना जाता था। लेकिन बदलते वक्त के साथ पिछले 30 सालों पर गौर करें तो पार्टी रायबरेली और अमेठी लोकसभा सीटों तक सिमटकर रह गई।
विधानसभा चुनावों में कांग्रेस का ग्राफ लगातार गिरता गया। हालांकि, 2027 के चुनाव को लेकर जिस पिच कांग्रेस बैटिंग करने की कोशिश कर रही है, वे इसी पुराने सोशल इंजीनियरिंग को फिर से जीवित करने की कोशिश करने की कोशिश कर रहे हैं।
क्योंकि कांग्रेस के यूपी प्रभारी बनाए गए राजेंद्र पाल गौतम दलित समाज से है। माना जाता है कि पश्चिम यूपी में उनकी अच्छी पकड़ है। क्योंकि 2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को दलित वोट का फायदा मिला है।
वहीं, आराधना मिश्रा ‘मोना’ प्रदेश में कांग्रेस का सबसे बड़ा ब्राह्मण चेहरा हैं। आराधना यूपी में कांग्रेस विधानमंडल दल की नेता हैं। वह कांग्रेस के राज्यसभा सांसद प्रमोद तिवारी की बेटी हैं। अल्पसंख्यक विंग के राष्ट्रीय प्रमुख इमरान प्रतापगढ़ी की मुस्लिम वोटबैक पर मजबूत पकड़ मानी जाती है। इमरान, सहारनपुर से लोकसभा सांसद हैं।
2022 का विधानसभा चुनाव
साल 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने किसी भी बड़े राजनीतिक दल से गठबंधन नहीं किया था। कांग्रेस ने राज्य की 399 सीटों पर अकेला चुनाव लड़ा था। चुनाव का प्रचार अभियान प्रियंका गांधी वाड्रा के नेतृत्व में चला था। गांधी ने नारा दिया था “लड़की हूं, लड़ सकती हूं”। कांग्रेस ने इस चुनाव में महिलाओं पर दांव लगाया था। जिसके तहत 40 फीसदी टिकट उनको दिए गए थे। इन सब गुणा-गणित के बावजूद कांग्रेस का प्रदर्शन बेहद कमजोर रहा था और पार्टी 2.33 फीसदी वोटर शेयर पर सिमट गई थी। कांग्रेस के खाते में केवल 2 सीटें ही गई थीं। इसमें प्रतापगढ़ जिले की रामपुर खास विधानसभा सीट से आराधना मिश्रा ‘मोना’ और महाराजगंज जिले की फरेंदा विधानसभा सीट से वीरेंद्र चौधरी ने जीत हासिल की थी। यह उत्तर प्रदेश में कांग्रेस का अब तक सबसे खराब प्रदर्शन है।
2017 का विधानसभा चुनाव
2017 के विधानसभा चुनाव की बात करें तो इस चुनाव में समाजवादी पार्टी और कांग्रेस ने गठबंधन में चुनाव लड़ा था। इस चुनाव में सपा ने 298 सीटों पर और कांग्रेस ने 105 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे। समाजवादी पार्टी ने इस चुनाव में 47 सीटों और कांग्रेस ने 7 सीटों पर जीत हासिल की थी। वहीं, भारतीय जनता पार्टी ने 325 सीटों पर जीत हासिल कर पूर्ण बहुमत से सरकार बनाई थी।
यूपी में कांग्रेस की कितनी बार रही सत्ता
कांग्रेस पार्टी जिसने देश के सबसे बड़े सूबे यूपी में 11 बार सत्ता संभाली है तो वहीं, समाजवादी पार्टी ने राज्य में तीन बार सरकार बनाई है। इस लिहाज से कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश में लंबे वक्त तक राज किया है। उनके मुख्यमंत्रियों ने 11 अलग-अलग कार्यकाल में सरकार चलाई है।
उत्तर प्रदेश में कांग्रेस ने पहली बार 1950 में सरकार बनाई थी और आखिरी बार उसने 1985 में पूर्ण बहुमत से सरकार बनाई। समाजवादी पार्टी ने राज्य में तीन बार सरकार बनाई। जिसमें दो बार मुलायम सिंह मुख्यमंत्री रहे और एक बार उनके बेटे अखिलेश यादव ने राज्य की सत्ता संभाली।
उत्तर प्रदेश भाजपा पूरी तरह से चुनावी मोड़ में आ गई है। विधानसभा चुनाव दहलीज पर है और राज्य में बीजेपी के सबसे बड़े चेहरे योगी आदित्यनाथ पार्टी की विजय पताका फहराने को लोगों के बीच हैं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सियासी आबो-हवा में ध्रुर्वीकरण की गंध रची बसी है, जो भाजपा को खूब रास आती है। पढ़ें पूरी खबर।
