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दिल्ली मेरी दिल्ली: ‘आप’ की मुसीबत

गठबंधन की पहल कर केजरीवाल ने दिल्ली के लोगों को यह शक करने का कारण मुहैया कराया कि उनकी पार्टी बगैर कांग्रेस के सहयोग के भाजपा को हराने की स्थिति में नहीं है।

Author May 20, 2019 5:59 AM
दिल्ली कांग्रेस चीफ शीला दीक्षित। (फोटोः पीटीआई)

बेदिल

दिल्ली में दशकों तक दो ही पार्टियां मुकाबले में रहीं-कांग्रेस व भाजपा। बीच-बीच में जनता दल या बसपा जैसी पार्टियों ने अपनी उपस्थिति जरूर दर्ज कराई, लेकिन बाद में इनकी अहमियत भी जाती रही। इनमें से कोई भी पार्टी कांग्रेस को तीसरे नंबर पर खिसकाने में कामयाब नहीं हो पाई, लेकिन अरविंद केजरीवाल की अगुआइ वाली आम आदमी पार्टी ने यह करिश्मा कर दिखाया। दिल्ली में लोकसभा से लेकर नगर निगम तक कांग्रेस तीसरे नंबर पर पहुंच गई। इस लिहाज से लोकसभा के ताजा चुनाव बेहद अहम करार दिए जा रहे हैं। दिल्ली की सात संसदीय सीटों पर कांग्रेस ने भाजपा से सीधी लड़ाई लड़ी है और ऐसे कयास लगाए जा रहे हैं कि उसकी स्थिति में काफी सुधार हुआ है। पार्टी की दिल्ली प्रदेश की अध्यक्ष शीला दीक्षित का दावा है कि कांग्रेस तीन से पांच सीटें तक जीत सकती है। उनका यह भी कहना है कि कांग्रेस ने भाजपा विरोधी वोटों का बंटवारा नहीं होने दिया।

मतलब ज्यादातर वोट कांग्रेस को गए। तो क्या आम आदमी पार्टी तीसरे नंबर की पार्टी बनने जा रही है। लोकसभा चुनाव से जुड़ा यह सवाल दिल्ली में चारों ओर पूछा जा रहा है। गठबंधन की पहल कर केजरीवाल ने दिल्ली के लोगों को यह शक करने का कारण मुहैया कराया कि उनकी पार्टी बगैर कांग्रेस के सहयोग के भाजपा को हराने की स्थिति में नहीं है। परिणाम यह हुआ कि कांग्रेस अपने दमदार प्रत्याशियों के दम पर अकेले चुनाव मैदान में उतर गई और उसने आम आदमी पार्टी के लिए बड़ी मुसीबत खड़ी कर दी। आम आदमी पार्टी के नेता अब भी दावे कर रहे हैं कि इस चुनाव के बाद कांग्रेस एक बार फिर से तीसरे नंबर की पार्टी बनकर उभरेगी, लेकिन जमीनी हकीकत बता रही है कि यह खतरा आम आदमी पार्टी के सिर पर कहीं ज्यादा मंडरा रहा है।

बीरबल की खिचड़ी
सीबीएसई और सीआइएससीई के परिणाम आने के बाद भी दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) स्नातक और स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों की प्रवेश प्रक्रिया शुरू नहीं कर पाया है। बोर्ड की परीक्षाएं चल ही रही थीं कि डीयू के अधिकारियों की ओर से उत्साह दिखाते हुए 15 मार्च को घोषणा की गई कि प्रवेश प्रक्रिया 15 अप्रैल से शुरू हो जाएगी। इतना ही नहीं डीयू की ओर से स्नातक पाठ्यक्रमों के दाखिलों के लिए कटऑफ का कार्यक्रम भी जारी कर दिया गया लेकिन मई के तीसरे सप्ताह तक भी प्रवेश प्रक्रिया शुरू नहीं हो पाई है। बेदिल को पता चला है कि डीयू के अधिकारी दरअसल प्रवेश प्रक्रिया को बीरबल की खिचड़ी की तरह बेहतर बनाने में लगे हैं। अब इस ‘खिचड़ी’ का स्वाद तो दाखिला लेने वाले विद्यार्थी ही बता पाएंगे।

नहीं मिली राहत
शहर में गर्मी बढ़ते ही बिजली विभाग की करोड़ों रुपए की तैयारियां नाकाम साबित हुई हैं। बिजली विभाग ने पिछले आठ-दस महीने से लोगों को बिजली कटौती से राहत देने के दावे कर बिजली घरों के निर्माण, ट्रांसफामर्रों और फीडरों पर लोड बढ़ाने पर 200 करोड़ रुपए खर्च कर दिए। तमाम वादों, तैयारियों और करोड़ों खर्च करने के बाद निवासियों को न तो कटौती और न ही वोल्टेज की लुपझुप से राहत मिल सकी है, जबकि नोएडा को कटौती मुक्त क्षेत्र घोषित करने के बाद ऊर्जा मंत्री से लेकर विभाग के प्रबंध निदेशक तक दौरे और बैठकें कर चुके हैं, लेकिन स्थिति में सुधार नहीं हो सका है। इतनी रकम खर्च होने के बाद लगातार कटौती का ठीकरा पुरानी लाइनों पर फोड़ा जा रहा है। जिसे एकसाथ बदल पाना संभव नहीं है।

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