चुनावी राज्यों में कांग्रेस कर्नाटक हिमाचल और तेलंगाना माडल को पेश कर वोट जुटाने में लगी है। तमिलनाडु के किसानों के बीच कांग्रेस यह माडल लेकर पहुंची है और मत्स्य उत्पादन को बढ़ा मुद्दा बना रही है। इसके पीछे हिमाचल में जलाशयों से प्राप्त सौ रुपए किलोग्राम की दर से न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) देने का पूर्ण वादा बताया जा रहा है, जिसे हिमाचल प्रदेश की सरकार ने किसानों के लिए पूरा किया है। माना जा रहा है जिन सीट पर कांग्रेस तमिलनाडु में मैदान में है, उसे इस वादे का लाभ मिल सकता है। अन्य दल भी यहां मत्स्य पालन योजना को लेकर मैदान में है। इसके लिए प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना को आधार बनाया जा रहा है। इस योजना में केंद्र सरकार करीब सौ करोड़ की योजना लेकर आई थी।
तमिलनाडु में लगभग 9.15 लाख मछुआरों की आबादी है, जिनमें से 2.60 लाख से अधिक सक्रिय रूप से मछली पकड़ने के व्यवसाय में शामिल हैं। राज्य के 591 तटीय गांव प्रमुख मत्स्य पालन केंद्र हैं, जो मुख्य रूप से चेन्नई, कांचीपुरम, कुड्डालोर, विलुप्पुरम, तंजावुर और नागपट्टिनम जैसे तटीय विधानसभा क्षेत्रों में केंद्रित हैं।
इसी प्रकार तेलंगाना की महालक्ष्मी मुफ्त बस यात्रा योजना और कर्नाटक की ई वाहन योजना की गूंज तमिलनाडु तक पहुंच रही है ताकि एक बेहतरीन राज्य माडल के आधार मत तय कर सकें। इसके जरिए कांग्रेस महिला व युवा वोट बैंक को साधने की कोशिश कर रही है। बीते विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी ने यहां से 18 विधानसभा सीट जीती थी।
पार्टी ने अपने पुराने विधायकों पर विश्वास जताया है और कई विधानसभा में मतदाताओं को नया चेहरा भी दिया है। इसमें अपनी पुरानी सीट पर आधा दर्जन से अधिक पुराने ही विधायकों को उतारा है और तीन से चार सीट पर नए चेहरे लाकर नए समीकरण साधने की कोशिश की है। बीते चुनाव में यहां पर कांग्रेस पार्टी ने धर्मनिरपेक्ष प्रगतिशील गठबंधन के साथ मिलकर चुनाव लड़ा था।
इस गठबंधन के पास 159 सीट थी। गठबंधन के पास कुल 45.38 फीसद मत बैंक था, जबकि राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंधन के पास 39.71 फीसद मत थे। यहां कांग्रेस को कुल 19,76,527 (4.27 फीसद) मत मिले थे। कांग्रेस के गढ़ वाले क्षेत्र में मुख्य तौर पर अनुसूचित जनजाति (एससी) की सीटें शामिल थी। इन सीटों पर पार्टी ने इस बार भी अपना उम्मीदवार नहीं बदला है। इसमें मुख्यतौर पर पोन्नेरी, वेलाचेरी, श्री पेरुम्बुदुर जैसी सीटें शामिल है। बीते चुनाव में कांग्रेस ने गिने चुने जिले से ही अपने उम्मीदवार उतारे थे।
इस बार भी तमिलनाडु में कांग्रेस ऐसी ही रणनीति के साथ अपना भाग्य अजमा रही है। इस बार 27 सीट में से कांग्रेस के उम्मीदवार 6 अनुसूचित जाति की सीट पर चुनाव लड़ रहे हैं।
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भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) तमिलनाडु विधानसभा चुनाव को बहुत गंभीरता के साथ लड़ रही है। यही वजह है कि पार्टी ने केंद्रीय मंत्री एल मुरुगन को विधानसभा चुनाव में उतारा है। भाजपा ने मुरुगन को तमिलनाडु के तिरुपुर जिले की अविनाशी (एससी) सीट से टिकट दिया है। 23 अप्रैल को होने वाले चुनावों में एक केंद्रीय मंत्री और पहली पीढ़ी के सरकारी डाक्टर के बीच सीधा मुकाबला देखने को मिलेगा। द्रविड़ मुन्नेत्र कषगम (द्रमुक) ने इस क्षेत्र से एक युवा चिकित्सक वी गोकिलामणि को मैदान में उतारा है, जिससे यहां मुकाबला बेहद दिलचस्प हो गया है। 2021 के चुनावों में मुरुगन ने धारापुरम से चुनाव लड़ा था, जहां वे द्रमुक की एन कायलविझी से 1,393 मतों से हार गए थे। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां पर करें क्लिक
