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गोवा में मचे सियासी भगदड़ पर बेबस कांग्रेस, पार्टी के नेता ने कहा, “कैसे रोकें? केंद्र में नेतृत्व नहीं और फोकस भी कर्नाटक पर है”

गोवा में कांग्रेस में मची सियासी भगदड़ पर पार्टी के नेता बिल्कुल बेबस नजर आ रहे हैं। पार्टी के एक नेता ने कहां कि शीर्ष नेतृत्व के अभाव और कर्नाटक संकट के कारण वे बहुत कुछ नहीं कर सकते हैं।

Author नई दिल्ली | July 12, 2019 2:40 PM
10 जुलाई को कांग्रेस के 15 में से 10 विधायक भाजपा में शामिल हो गए थे। (फोटोः इंडियन एक्सप्रेस)

कर्नाटक में राजनीतिक संकट का समाधान में जुटी कांग्रेस पार्टी के नेता गोवा संकट के सामने बिल्कुल बेबस नजर आ रहे हैं। राज्य में पार्टी के 15 विधायकों में से 10 विधायक भाजपा में शामिल हो चुके हैं। इससे पहले कर्नाटक में जद सेक्यूलर और कांग्रेस के 16 विधायकों के इस्तीफा देने के बाद से कर्नाटक में सियासी संकट गहराता जा रहा है।

इससे पहले गोवा में पार्टी विधायक दल के नेता अतनासियो मोनसरेट और चंद्रकांत केवलकर के नेतृत्व में 10 विधायकों ने भाजपा का दामन थाम लिया। भाजपा का कहना था कि ये सभी विधायक अपनी शर्तों पर पार्टी में शामिल हुए हैं। कांग्रेस के विधायकों के पार्टी में शामिल होने पर मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत का कहना था कि हम राज्य में स्थिर सरकार के लिए कांग्रेस के विधायकों का स्वागत करते हैं। उन्होंने भाजपा में अपना विलय करा लिया है। हमने इसमें कुछ भी नहीं किया।

सावंत ने बताया कि उन लोगों का कहना था वे भाजपा में शामिल होना चाहते हैं और हमने उन लोगों का स्वागत किया। इस बीच कांग्रेस के एक नेता ने एनडीटीवी से बातचीत में कहा कि भाजपा की बागियों को हवा देने की जानकारी होने के बावजूद हम कुछ नहीं कर सके। उन्होंने बताया कि इसके पीछे केंद्रीय नेतृत्व का अभाव होने के साथ ही कर्नाटक में जारी राजनीतिक संकट बड़ा कारण है। भाजपा ने साधारण रूप से अपना दांव चला और उन्हें किसी भी तरह की बाधा का सामना नहीं करना पड़ा। यह बिल्कुल वैसा ही हुआ जैसा कि कर्नाटक में हुआ।

इसे विडंबना ही कहा जाएगा कि एक तरफ कांग्रेस नेतृत्व कह रहा था कि वे बागी तेवर अपनाने वाले विधायकों के संपर्क में है और विधानसभा के नए सत्र में भाजपा को किनारे लगा देंगे। इसके बावजूद ये प्रतिकूल घटना घटी। कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि पैसों के लालच में और कुछ विधायकों के खिलाफ लंबित मामलों में कार्रवाई का डर दिखाकर इस दलबदल को अंजाम दिया गया है।

अखिल भारतीय कांग्रेस समिति के राज्य प्रभारी ए. चेल्लाकुमार ने एनडीटीवी से कहा, ‘यदि उन्हें पार्टी की कार्यप्रणाली और विचारधारा से कोई मतभेद था तो हम इस संबंध में सुधार संबंधी कदम उठा सकते सकते हैं। यदि कोई अपने व्यक्तिगत फायदे या पैसे के लालच में गया है तो हम उसे कितने समय तक रोके रख सकते हैं।’

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