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उपचुनाव पर लगाया कांग्रेस ने दांव

लगातार कई चुनावों में आम आदमी पार्टी के हाथों अपना सब कुछ गवां चुकी कांग्रेस मई में होने वाले नगर निगमों के 13 सीटों के उपचुनाव में संजीवनी तलाशने में लगी हुई है।

Author नई दिल्ली | March 18, 2016 3:56 AM
(भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस)

लगातार कई चुनावों में आम आदमी पार्टी के हाथों अपना सब कुछ गवां चुकी कांग्रेस मई में होने वाले नगर निगमों के 13 सीटों के उपचुनाव में संजीवनी तलाशने में लगी हुई है। कांग्रेस को लगता है कि अगर चुनाव में उसे कुछ सीटें मिलती हैं तो उसे अपने वोटरों को आप से अपने पाले में लाने में आसानी होगी। इसका असर दिल्ली में अगले साल होने वाले निगमों के आम चुनाव के साथ अगले साल पंजाब में होने वाले विधानसभा चुनावों में दिखेगा।

आप अपने सभी 13 उम्मीदवारों के नाम घोषित कर चुकी है। कांग्रेस का आरोप है कि आप चुनाव के बारे में गंभीर नहीं है। उपचुनाव हाई कोर्ट के आदेश से हो रहा है और हाई कोर्ट ने जनवरी के अपने आदेश में दिल्ली सरकार से चुनाव करवाने के लिए बीस करोड़ रुपए चुनाव आयोग के पास जमा करवाने का आदेश दिया था। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय माकन का आरोप है कि अभी तक चुनाव के लिए पैसा न जमा करवाने का मतलब है कि दिल्ली सरकार चुनाव टालने में लगी है।

वैसे दिल्ली के मुख्य चुनाव आयुक्त राकेश मेहता पहले से ही मानते हैं कि तीस मार्च तक बजट पास होने के बाद ही उन्हें पैसे मिलेंगे, इसलिए वे अप्रैल के पहले हफ्ते में उपचुनाव की अधिसूचना जारी करने और मई के दूसरे हफ्ते तक चुनाव करवाने की जानकारी देते हैं। लगातार दो विधानसभा चुनावों और एक लोकसभा चुनाव में आप ने कांग्रेस को दरकिनार करके दिल्ली की राजनीति आप बनाम भाजपा बनाने की कोशिश की है। अगर कांग्रेस इन चुनावों में बेहतर करने लगी तो परेशानी भाजपा से अधिक आप को होने लगेगी। कांग्रेस का आरोप है कि इसी के डर से आप इन चुनावों को लगातार टालती जा रही थी। इसी कारण कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय माकन ने इस मुकदमे में पक्षकार बनाने के लिए अदालत में अर्जी दी थी। अब वे अवमानना का मुकदमा दायर करने की बात करते हैं।

फरवरी 2015 में विधानसभा के मध्यावधि चुनाव में सात और पार्षद के विधायक बनने से सात और सीटें खाली हो गर्इं। तब से चुनाव आयोग और सरकार में उपचुनाव करवाने के लिए जिरह चल रही है। विधान में यह भी है कि अगर आम चुनाव में छह महीने से कम का समय हो तो उपचुनाव को टाला जा सकता है। लेकिन अभी आम चुनाव में डेढ़ साल से ज्यादा का समय है, इसलिए उपचुनाव जरूरी है। इसी आधार पर अदालत ने उपचुनाव करवाने के आदेश दिए।

2012 के आम चुनाव में तीनों निगमों में भाजपा की जीत हुई थी। 2013 के विधानसभा चुनाव में निगम के छह पार्षदों के विधायक बनने से ये सीटें खाली हुई थीं। अब दिल्ली के तीनों निगमों की सीटों की संख्या 272 हो गई है। उस लिहाज से 13 सीटों के चुनाव का ज्यादा महत्त्व नहीं है। लेकिन ये 13 सीटें दिल्ली के हर इलाके की हैं, इसलिए चुनाव एक तरह से विधानसभा चुनाव के बाद और 2017 के निगम चुनाव से पहले शक्ति प्रदर्शन का प्रतीक बनने वाला है।

जिन तेरह पार्षदों के विधायक बनने से ये सीटें खाली हुई हैं उनमें छह भाजपा के और सात आप के विधायक बने। आप के विधायक बने नेता अलग-अलग दलों से आप में आकर चुनाव लड़ कर विधायक बने। इस लिहाज से इस चुनाव का ज्यादा मतलब नहीं है कि जुलाई में परिसीमन होने के बाद ये सीटें खत्म हो जाएंगी। लेकिन इन सीटों से विधायक बने नेताओं के लिए भी इम्तिहान साबित होगा कि उनके अपने इलाके में कितनी लोकप्रियता है।

अपनी जमीन वापस पाने के लिए कांग्रेस चुनाव की तैयारियों में जुट चुकी है। कांग्रेस इन 13 वार्डों में 20 मार्च से 30 मार्च के बीच में स्थानीय लोगों से मिलकर उनकी राय लेकर हर वार्ड के लिए अलग-अलग घोषणापत्र बनाएगी। कार्यकर्ता घर-घर जाकर लोगों की समस्याएं सुनेंगे। अजय माकन ने बताया कि हम कोई अभियान नहीं चला रहे हैं। जो सात सवाल पूछे जा रहे हैं वे ज्यादातर आप के चर्चित नारों से जुड़े हैं। कांग्रेस वही तरीका अपना रही है जो आप अब छोड़ रही है। वह हर काम जनता से पूछ कर करना चाह रही है। कांग्रेस पिछले दस सालों से इन सीटों पर चुनाव नहीं जीती है, इसलिए जो भी मिलेगा वह उसके लाभ के खाते में जाएगा।

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