हरियाणा में राज्यसभा की दो सीटों के लिए 16 मार्च को होने वाले चुनाव के बीच शुक्रवार को कांग्रेस के विधायकों को हिमाचल प्रदेश भेज दिया गया है। हरियाणा में राज्यसभा की दो सीटों पर तीन उम्मीदवार मैदान में हैं। विधायक मतदान से ठीक पहले लौट आएंगे। हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस की सरकार है।
इस कदम को पार्टी विधायकों को एकजुट रखने के प्रयास के तौर पर देखा जा रहा है।
हरियाणा की विधानसभा में 37 विधायक होने की वजह से कांग्रेस अपने एक उम्मीदवार को चुनाव जिता सकती है लेकिन ‘क्रॉस-वोटिंग’ की स्थिति में पार्टी को मुश्किल पेश आ सकती है। राज्यसभा चुनाव के लिए बीजेपी के संजय भाटिया, कांग्रेस के करमवीर सिंह बौद्ध और निर्दलीय उम्मीदवार सतीश नांदल चुनाव मैदान में हैं।
कांग्रेस के विधायक सीएलपी के नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा के आवास पर एकजुट हुए, जहां एक बैठक हुई और बाद में अधिकतर विधायक दो टेम्पो ट्रैवलर में सवार होकर रवाना हो गए। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह और पार्टी महासचिव व हरियाणा मामलों के प्रभारी बीके हरिप्रसाद भी विधायकों के साथ थे। हालांकि, कुलदीप वत्स समेत कम से कम पांच विधायक पारिवारिक व्यस्तताओं के कारण नहीं गये। हुड्डा भी यहीं रुके हुए हैं।
हरियाणा से राज्यसभा की दो सीट खाली हो रही हैं। राज्यसभा के सदस्य के तौर पर बीजेपी सांसद किरण चौधरी और राम चंद्र जांगड़ा का कार्यकाल नौ अप्रैल को समाप्त हो रहा है। हरियाणा विधानसभा में सत्ताधारी बीजेपी के 48 विधायक, कांग्रेस के 37, इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) के दो विधायक हैं और तीन विधायक निर्दलीय हैं।
हुड्डा को है जीत का भरोसा
हरियाणा से राज्यसभा के लिए दोनों उम्मीदवारों में से प्रत्येक को जीत के लिए 31-31 वोटों की जरूरत होगी। हुड्डा का कहना है कि कांग्रेस के पास अपने उम्मीदवार की जीत सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त संख्या में विधायक हैं। बीजेपी समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार नांदल द्वारा कांग्रेस विधायकों की ‘क्रॉस-वोटिंग’ से जीत की उम्मीद लगाए जाने को लेकर जब हुड्डा से सवाल पूछा गया था तो उन्होंने कहा था, “ऐसी अटकलें केवल मीडिया में हैं।”
प्रदेश अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह ने भी कहा था कि कांग्रेस के पास 37 विधायक हैं और उनका उम्मीदवार निश्चित रूप से विजयी होगा। नांदल के मैदान में उतरने से राज्यसभा चुनाव दिलचस्प हो गया है।
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