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महाराष्ट्र: मोदी सरकार का दावा 16,000 गांव सूखा मुक्त कर दिए, विपक्ष ने उठाए सवाल

पीएम मोदी ने अपने एक भाषण के दौरान जिक्र किया था कि महाराष्ट्र के 16000 गांवों को सूखा मुक्त कर दिया गया है। कांग्रेस ने पीएम मोदी के इस दावे को गलत बताते हुए पलटवार किया है।

Draught, Modi Governmentमोदी सरकार ने 16,000 गांव सूखा मुक्त करने का दावा किया है। (फाइल फोटो- PTI)

यूपीए सरकार के दौरान बनाए गए घरों की संख्या पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दावों पर पलटवार करने के बाद महाराष्ट्र कांग्रेस ने शनिवार (20 अक्टूबर) को सूखा मुक्त गांव के दावे को चुनौती दी। साथ ही देवेंद्र फडनवीस सरकार की प्रमुख योजना ‘जलयुक्त शिवर’ पर खर्च किए गए पैसों की जांच की मांग की। महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता सचिन सावंत ने शनिवार को कहा, “शिरडी में शुक्रवार को अपने भाषण के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दावा किया कि महाराष्ट्र के 16000 गांवों को सूखा मुक्त कर दिया गया है। 9000 गांवों को सूखा मुक्त करने की दिशा में काम जारी है। लेकिन राज्य के 201 तालुक्का के कम से कम 20000 गांवों में सूखे की स्थिति है। इससे यह साफ है कि पीएम मोदी झूठ बोल रहे हैं। साथ ही यह भी साफ है कि जलयुक्त शिवर योजना में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार हुआ है।”

राज्य कांग्रेस प्रमुख अशोक चव्हान ने शुक्रवार को यूपीए के शासन काल 2004 से 2013 के बीच बने घरों के आंकड़े जारी किए। जारी आंकड़ों के माध्यम से उन्होंने पीएम मोदी के उस दावे पर पलटवार किया जिसमें कहा गया कि यूपीए सरकार के अंतिम तीन वर्षों में मात्र 25 लाख घरों का निर्माण हुआ, जबकि इतने ही समय में पीएम मोदी के शासनकाल में 1.25 करोड़ घरों का निर्माण हुआ। सावंत ने कहा, “डाटा से यह साफ प्रदर्शित हो रहा है कि 2010 से लेकर 2013 के बीच 75 लाख घरों का निर्माण हुआ।” इसके साथ ही उन्होंने कहा कि जलयुक्त शिवर की संख्या के साथ भी इसी तरह की जादूगरी की जा रही है। सावंत ने कहा, “जलयुक्त शिवर से संबंधित 5.41 लाख काम करते हुए राज्य सरकार ने 7,45 9 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। 20, 420 से अधिक काम प्रगति पर हैं। राज्य सरकार ने घोषणा की है कि गांवों में पानी की आपूर्ति करने वाले टैंकरों की संख्या में लगभग 80 प्रतिशत की कमी आई है। लेकिन अक्टूबर के महीने में भी सैकड़ों टैंकर काम कर रहे हैं।”

सावंत ने भौगोलिक सर्वेक्षण और विकास एजेंसी (जीएसडीए) की हालिया रिपोर्ट भी पेश की, जिसमें कहा गया है कि पिछले पांच साल की तुलना में महाराष्ट्र में कुल 353 ताल्लुका में से 252 ताल्लुका के 13984 गांव में जल स्तर एक मीटर से अधिक नीचे गया है। 3342 गांवों में जल स्तर 3 मीटर से ज्यादा, 3430 गांव में 2 से 3 मीटर के बीच और 7212 गांवों में 1 से 2 मीटर के बीच नीचे गया है। सावंत ने सवालिया लहजे में कहा कि, “यह बहुत ही चिंतनीय विषय है। यह आंकड़ा राज्य में सूखे की गंभीर स्थिति को दर्शाता है। एक व्यक्ति जलयुक्त शिवर कार्यक्रम को सफल कैसे बना सकते हैं, जबकि सरकारी एजेंसियां खुद ऐसी रिपोर्ट दे रही हैं। मेरा कहना है कि इस योजना पर खर्च किए गए पैसे की भी जांच होनी चाहिए।”

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