कांग्रेस ने केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव पर उनके चार सहयोगियों को हटाए जाने के मामले में हमला तेज कर दिया है। कांग्रेस के महासचिव जयराम रमेश ने शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा, “जब किसी मंत्री के सबसे करीबी सहयोगियों में से चार को भ्रष्टाचार के आरोपों में बर्खास्त कर दिया जाए, तो मंत्री को नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए स्वयं पद छोड़ने की इच्छा महसूस होनी चाहिए।”

कुछ दिन पहले ही पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के तीन प्रमुख सहयोगियों को एक साथ हटा दिया था। इनमें निजी सचिव, अतिरिक्त निजी सचिव और एक अन्य अतिरिक्त निजी सचिव शामिल हैं।

जयराम रमेश ने कहा, “क्या भारतीय राजनीति में नैतिक जिम्मेदारी की भावना अभी भी जीवित है? ठीक 70 साल पहले तमिलनाडु में एक रेल दुर्घटना के बाद लाल बहादुर शास्त्री ने रेल मंत्री के पद से इस्तीफा देकर नैतिक जिम्मेदारी का सर्वोच्च उदाहरण प्रस्तुत किया था। उनके इस उदाहरण को अक्सर याद किया जाता है और इसकी हमेशा सराहना भी हुई है, लेकिन यदि कभी इसका पालन हुआ भी है, तो वह बेहद विरल है।”

पूर्व केंद्रीय मंत्री जयराम रमेश ने कहा, “यदि उन्हें यह पता था कि क्या हो रहा था, तो वे भी उतने ही दोषी हैं। और यदि वे यह दावा करते हैं कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं थी, तो यह स्थिति और भी गंभीर है तथा उनके पद छोड़ने का कारण और भी बड़ा हो जाता है।”

राजधर्म का पालन करने का समय

रमेश ने कहा कि यह उनके राजधर्म का पालन करने का समय है, जिसकी याद तत्कालीन प्रधानमंत्री ने चौदह वर्ष पहले गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री को दिलाई थी। रमेश ने कहा कि इस राजधर्म में नैतिक जिम्मेदारी और राजनीतिक जवाबदेही दोनों शामिल हैं।

भूपेंद्र यादव के निजी सचिव को प्रशासनिक आधार पर हटा दिया गया था जबकि एक अतिरिक्त निजी सचिव की सेवा खत्म कर दी गई और दूसरे अतिरिक्त निजी सचिव को उनके मूल कैडर में ‘समय से पहले वापस’ भेज दिया गया था।

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