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कांग्रेस ने कहा, सेना और देश से माफी मांगें मोहन भागवत

आनंद शर्मा ने कहा कि गांधी हत्या के बाद प्रतिबंध लगने के कारण संघ ने तत्कालीन गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल को दिए एक हलफनामे में कहा था कि वह एक सामाजिक-सांस्कृतिक संगठन है। उसकी इस स्थिति में कोई बदलाव नहीं आया है।

Author Updated: February 13, 2018 3:28 AM
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत और कांग्रेस प्रवक्ता आनंद शर्मा।

कांग्रेस ने सोमवार को संघ प्रमुख मोहन भागवत से मांग की कि वे सशस्त्र बलों से जुड़े अपने बयान को लेकर देश से माफी मांगे। पार्टी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से यह स्पष्ट करने को कहा कि क्या वे देश की सीमाओं की सुरक्षा की जिम्मेदारी संघ को देने के बारे में सोच रहे हैं। कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता आनंद शर्मा ने संघ प्रमुख के बयान को चौंकाने और देश की जनता को विचलित करने वाला बताया। उन्होंने कहा कि यह सबसे पहले तिरंगे और दूसरा भारत की सेना का अपमान है। उन्होंने भारतीय सेना की तमाम उपलब्धियों को गिनाते हुए कहा कि यह दुनिया की बड़ी सेनाओं में से एक है और यह बयान उसके मनोबल को तोड़ने वाला है।

आनंद शर्मा ने पिछले दो दिन में जम्मू कश्मीर सुंजवां में सेना के शिविर और एक सीआरपीएफ केंद्र पर हुए आतंकी हमले में शहीद होने वाले सैन्य कर्मियों के प्रति शोक जताते हुए कहा कि पूरा देश सेना और हमारे अर्धसैनिक बलों के साथ खड़ा है और उनकी कुर्बानी का पूरा सम्मान करता है। शर्मा ने कहा कि ऐसे समय में जब सेना की छावनियों और अर्धसैनिक बलों के ठिकानों पर हमला हो रहा हो, संघ प्रमुख का यह बयान आपत्तिजनक और चिंताजनक है।

आनंद शर्मा ने कहा कि गांधी हत्या के बाद प्रतिबंध लगने के कारण संघ ने तत्कालीन गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल को दिए एक हलफनामे में कहा था कि वह एक सामाजिक-सांस्कृतिक संगठन है। उसकी इस स्थिति में कोई बदलाव नहीं आया है। यह बात सर्वविदित है कि भाजपा संघ का राजनीतिक संगठन है किंतु सारे निर्णय मूल संगठन में किए जाते हैं। उन्होंने कहा कि भारत के संविधान के अनुसार देश की आतंरिक और विदेशी हमलों से सुरक्षा के लिए सेना और अर्धसैनिक बलों के अलावा किसी अन्य संगठन का स्थान या भूमिका नहीं है। उन्होंने कहा कि हाल के दिनों में हमने देखा है कि जहां भी मिलीशिया बने हैं वे देश तबाह हो गए हैं। विश्व के किसी भी प्रजातंत्र में देश की सुरक्षा के लिए लड़ने वाले निजी मिलीशिया का कोई स्थान नहीं है।

शर्मा ने कहा कि इस बारे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। उन्हें यह बताना चाहिए कि क्या वे भारत की सुरक्षा का काम संघ को देने के बारे में सोचने के बारे में सोच रहे हैं? उन्होंने यह भी कहा कि संघ मुखिया मोहन भागवत को भारतीय फौज और देश से माफी मांगनी चाहिए। उनके बयान ने सेना की क्षमता और शौर्य पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है।

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