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आम लोगों को मनरेगा की खूबियां बताएं कार्यकर्ताः माकन

दिल्ली प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय माकन ने कहा कि दस साल पहले कांग्रेस सरकार ने मनरेगा के रूप में ग्रामीण देशवासियों को रोजगार गांरटी का एक दस्तावेज दिया था।

नई दिल्ली | February 4, 2016 3:11 AM
दिल्ली प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय माकन

दिल्ली प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय माकन ने कहा कि दस साल पहले कांग्रेस सरकार ने मनरेगा के रूप में ग्रामीण देशवासियों को रोजगार गांरटी का एक दस्तावेज दिया था। मनरेगा देश ही नहीं बल्कि विश्व की सबसे बड़ी रोजगार योजना है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस कार्यकर्ताओं का यह दायित्व है कि वे घर-घर जाकर मनरेगा की खूबियों को आम जन को बताएं क्योंकि यह योजना गरीबी उन्मूलन के लिए एक महत्त्वपूर्ण कदम है। मनरेगा के तहत गरीबों को उनके घर के ही पास रोजगार मुहैया कराया गया, जिससे गरीब और दलित भाई-बहनों को उनके ही गांव में रोजगार दिया जा सके।

माकन दिल्ली प्रदेश कांग्रेस की ओर से मनरेगा के दस साल पूरे होने पर हुए कार्यक्रम में शिरकत कर रहे थे। कांग्रेस की यूपीए की प्रथम सरकार ने गरीबी रेखा के नीचे आने वाले लोगों के लिए रोजगार मुहैया कराने के लिए महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गांरटी कानून मनरेगा की शुरुआत की थी। बैठक को दिल्ली प्रभारी पीसी चाको और रणदीप सिंह सुरजेवाला ने भी संबोधित किया और विस्तार से मरनेगा की खूबियां बतार्इं।

रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा कि मनरेगा दुनिया की सबसे बड़ी रोजगार योजना है। जब दस साल पहले सोनिया गांधी ने आंध्र प्रदेश से इसकी शुरुआत की तब भी भाजपा नेताओं ने इस योजना का मजाक उड़ाया था। सुरजेवाल ने कहा कि मनरेगा से कांग्रेस ने देश के गरीबों, पिछड़ों, आदिवासियों, महिलाओं और नौजवानों के रोजगार की लड़ाइयां लड़ीं जबकि दूसरी ओर मोदी सरकार ने इस योजना की हंसी उड़ाने के जबरदस्त प्रयास किए और इसे खत्म करने के गंभीर प्रयास किए। इस योजना को 200 जिलों में लागू किया गया लेकिन दो साल बाद राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री से मिलकर अनुरोध किया और इस योजना को पूरे देश में लागू किया गया।

फिर अप्रैल 2008 में इसे 652 जिलों, 6858 ब्लाकों और 2,57,710 गांवों में इस योजना को पूरी तरह लागू किया और 10 सालों में कांग्रेस सरकार ने 1,986 करोड़ रोजगार के दिन पैदा किए और दलितों, पिछड़ों, महिलाओं व आदिवासियों को रोजगार उपलब्ध कराया। उन्होंने बताया कि 3,14,870 करोड़ रुपए दलितों को रोजगार के माध्यम से उन्हें दिया गया।

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