दिल्ली हाई कोर्ट ने दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) परिसर में जुलूसों और विरोध प्रदर्शनों पर लगे पूर्ण प्रतिबंध पर रोक लगाने से गुरुवार को इनकार कर दिया। साथ ही अदालत ने कहा कि उसकी स्पष्ट राय है कि ऐसा पूर्ण प्रतिबंध उचित नहीं है और इसे जारी नहीं रखा जा सकता। अदालत ने विश्वविद्यालय और दिल्ली पुलिस को प्रतिबंध के खिलाफ कानून के छात्र की याचिका पर जवाब देने को कहा।

मुख्य न्यायाधीश डीके उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की पीठ ने कहा कि यह आदेश कब से लागू है? इसे 10 दिन और लागू रहने दीजिए। पीठ ने इस बात पर जोर देते हुए कहा कि इस मामले में संतुलन बनाए रखना आवश्यक है। पीठ ने कहा कि एक सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करें। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई की तिथि 25 मार्च तय की। अदालत ने इस मामले में केंद्र सरकार और दिल्ली विश्वविद्यालय के अंतर्गत आने वाले दो कॉलेजों को भी नोटिस जारी किया।

दिल्ली विश्वविद्यालय के वकील ने कहा कि प्रॉक्टर का निर्णय दिल्ली पुलिस द्वारा उत्तरी परिसर क्षेत्र में पांच या अधिक व्यक्तियों के एकत्र होने के खिलाफ जारी निषेधाज्ञा पर आधारित था। अदालत ने सुनवाई के दौरान प्रतिबंध लगाने के फैसले पर पुलिस और विश्वविद्यालय दोनों से सवाल किया और कहा कि अदालत की स्पष्ट राय है कि पूर्ण प्रतिबंध उचित नहीं है। अदालत ने कहा कि इस स्वतंत्रता का दुरुपयोग नहीं किया जा सकता। हम केवल अनुच्छेद 19 (भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार) के कारण ही हस्तक्षेप कर रहे हैं।

अदालत ने कहा कि आपको निष्पक्ष व्यवहार करना चाहिए। वह स्थिति क्यों उत्पन्न हुई? प्रॉक्टर भी एक शिक्षाविद हैं। कोई भी शिक्षाविद ऐसा आदेश पारित नहीं करना चाहता… कारण, आप समझते हैं। इसने कहा कि हम विद्यार्थियों के आचरण पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहते। देखिए चुनाव में क्या हुआ। आपके द्वारा पैदा की गई स्थिति के अलावा कोई भी शैक्षणिक संस्थान का प्रमुख ऐसा आदेश क्यों जारी करेगा? पुलिस की ओर से पेश हुए वकील ने कहा कि दो छात्र समूहों के बीच संभावित झड़प की सूचना के बाद निषेधाज्ञा शुरू में एक महीने के लिए जारी की गई थी और इसे फरवरी में 25 अप्रैल तक बढ़ा दिया गया था।

वकील ने कहा कि यह (झड़प) कुछ समय पहले भी हुई थी। उन्होंने पुलिस थाने का घेराव किया था। अदालत ने कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना पुलिस का काम है। अदालत ने दिल्ली विश्वविद्यालय से पूछा कि जब पुलिस पहले ही निषेधाज्ञा जारी कर चुकी थी तो विरोध प्रदर्शनों पर प्रतिबंध लगाने के लिए अलग से आदेश क्यों जारी किया गया।

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आबकारी मामले में आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल की ओर से दिल्ली हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय को बुधवार को पत्र लिखा गया है। इसमें मांग की गई है कि सीबीआई की ओर से दायर की गई याचिका को जस्टिस स्वर्णकांत शर्मा की बेंच से किसी और बेंच के पास भेज दिया जाए। पूरी खबर पढ़ें…