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सीएम योगी का बकरीद को लेकर निर्देश- कुर्बानी के दौरान न लें सेल्फी

उत्तर प्रदेश में बकरीद के दौरान खुले में कुर्बानी, नालियों में खून बहने के साथ-साथ कुर्बानी वाले जानवरों के साथ सेल्फी पर रोक लगा दी गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जिलाधिकारियों के साथ बैठक में ये निर्देश दिए।

उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ। (एक्सप्रेस फोटोः विशाल यादव)

पूरे देश में बुधवार को बकरीद मनाया जा रहा है। इसे ईद उल अजहा या ईद उन जुहा के नाम से भी जाना जाता है। इस बीच बकरीद को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा कई तरह के निर्देश जारी किए गए हैं। खुले में कुर्बानी, नालियों में खून बहने के साथ-साथ कुर्बानी वाले जानवरों के साथ सेल्फी पर रोक लगा दी गई है। दरअसल, पिछले कुछ सालों से कुर्बानी के पहले और कुर्बानी के बाद जानवरों के साथ सेल्फी लेने का ट्रेंड चल चुका है। लोग सेल्फी के बाद इसे सोशल मीडिया पर अपलोड कर देते हैं। इनमें कुछ तस्वीरें देखने में भयावह होती है।

उत्तर प्रदेश के जिलाधिकारियों के साथ वीडियो कांफ्रेंसिंग के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पुलिस और प्रशासन को यह निर्देश दिया कि वे यह सुनिश्चित करें कि बकरे की कुर्बानी खुले में न दी जाए और नालियों में खून न बहे। साथ ही यह कुर्बानी वाले जानवरों के साथ सेल्फी न लेने का निर्देश भी जारी किया गया है। इसके लिए साइबर सेल को सोशल मीडिया पर विशेष तौर पर नजर बनाए रखने का आदेश दिया गया है। नियम तोड़ने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने को कहा गया है। साथ ही मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को बकरीद के दौरान कानून-व्यवस्था को बनाने रखने और बिजली व पानी की सप्लाई सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिए हैं।

बकरीद से पहले सीएम योगी ने सभी जिलाधिकारियों के साथ बैठक में पुलिस-प्रशासन को इस बात का ध्यान रखने को भी कहा गया है कि कहीं प्रतिबंधित जानवरों की कुर्बानी तो नहीं दी जा रही है! शिवभक्तों द्वारा कांवड़ लेकर जा रहे मार्गों व क्षेत्रों में खुफिया तंत्र बनाए रखने को कहा गया है।

 

बता दें कि इस्लामिक मान्यता के अनुसार, हजरत इब्राहिम खुदा के हुक्म पर खुदा की राह में अपने बेटे हजरत इस्माइल की कुर्बानी देने जा रहे थे। अल्लाह ने हजरत इब्राहिम में इस नेक जज्बे को देख और हजरत इस्माइल कर जान बख्श दी और कुर्बानी के जगह पर एक बकरा था। इसके बाद से ही कुर्बानी की परंपरा शुरू हुई। आज के दिन मुसलमान कुर्बानी देते हैं। कुर्बानी के गोश्त (मीट) का बड़ा हिस्सा गरीबों और जरूरतमंदों को तकसीम किया जाता है।

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