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एयरपोर्ट अडाणी को देने का विरोध कर रही केरल सरकार, पर ली अडाणी के रिश्तेदार की सर्विस

एक आरटीआई के जवाब में सामने आया है कि एयरपोर्ट के लिए बोली लगाने वाले केरल राज्य औद्योगिक विकास निगम ने अडाणी से जुड़ी लॉ फर्म को सलाहकार नियुक्त किया था।

Author Edited By कीर्तिवर्धन मिश्र तिरुवनंतपुरम | August 23, 2020 11:10 AM
Kerala, IMD, Pinarayi Vijayanकेरल के मुख्यमंत्री पिनरई विजयन। (एक्सप्रेस आर्काइव फोटोः निर्मल हरिंदरन)

केरल में एयरपोर्ट के निजीकरण का ठेका अडाणी ग्रुप को दिए जाने का विरोध कर रही मुख्यमंत्री पिनरई विजयन की सरकार अब खुद ही घिर गई है। हाल ही में एक आरटीआई में सामने आया है कि केरल राज्य औद्योगिक विकास निगम (KSIDC) ने तिरुवनंतपुरम एयरपोर्ट की नीलामी पर कानूनी सलाहकार के तौर पर गौतम अडाणी के परिवार से जुड़े एक व्यक्ति की लॉ फर्म की सर्विस ली थी। इसे लेकर भाजपा और कांग्रेस ने केरल सरकार पर निशाना साधा है।

दरअसल, विजयन सरकार लगातार तिरुवनंतपुरम एयरपोर्ट को अडाणी एंटरप्राइजेज को लीज पर दिए जाने का विरोध कर रही है। इसी पर विपक्ष के नेता रमेश चेन्नीथाला ने कहा कि एक राज्य नीलामी प्रक्रिया में अडाणी के ही करीबी से कानूनी सलाह ले रहे हैं, जो कि चिंता की बात है। अगर यह सच है तो इससे राज्य सरकार और अडाणी ग्रुप की मिलीभगत का पता चलता है। कांग्रेस नेता ने कहा कि अडाणी के करीबी को बोली में शामिल कर के सरकार नीलामी से जुड़े दस्तावेजों को गुप्त बनाए रखने में असफल हुई है।

वहीं भाजपा के अध्यक्ष के सुरेंद्र ने मुख्यमंत्री विजयन को घेरा। उन्होंने कहा कि एक तरफ सीएम अडाणी की पार्टी एयरपोर्ट मुद्दे को लेकर विरोध प्रदर्शन की योजना बना रही है और दूसरी तरफ वे अडाणी के करीबी की लॉ फर्म से कानूनी सलाह ले रहे हैं।

आरटीआई एक्टिविस्ट गोविंदन नमपोथ्री की याचिका के जवाब में जो जवाब आया है। उसके मुताबिक, KSIDC जिसने राज्य की तरफ से एयरपोर्ट की नीलामी प्रक्रिया में हिस्सा लिया था, उसने कानूनी सलाहकार के तौर पर मुंबई स्थित साइरिल अमरचंद मंगलदास नाम की लॉ फर्म की सर्विस ली। इस फर्म को बोली लगाने के लिए 55 लाख रुपए की फीस भी दी गई। इस फर्म की एक पार्टनर पारिधि अदाणी हैं, जो कि गौतम अदाणी के बेटे करन अदाणी की पत्नी हैं।

KSIDC के एक अधिकारी के मुताबिक, यह लॉ फर्म सरकारी आदेश के तहत ही चुनी गई थी। अफसर ने बताया कि फर्म ने सिर्फ दस्तावेजों में सुधार का कार्य किया और इसका बोली लगाने से कोई संबंध नहीं था। इसे पहले ही मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली कमेटी की तरफ से तय कर दिया गया था।

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