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नीतीश कुमार के राज में तरक्की कर रहा बिहार! 10 फीसदी से ज्यादा रही विकास दर, राष्ट्रीय दर को भी पछाड़ा

विधानसभा में 15वां आर्थिक सर्वेक्षण 2020-21 पेश करने बाद पत्रकारों को संबोधित करते हुए उपमुख्यमंत्री सह वित्तमंत्री तारकिशोर प्रसाद ने कहा कि स्थिर मूल्य पर बिहार में वर्ष 2018-19 के 9.3 प्रतिशत के अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर के मुकाबले 2019-20 में प्रदेश में आर्थिक वृद्धि 10.5 प्रतिशत रही जो राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर से अधिक है।

Author Edited By Ikram नई दिल्ली | February 20, 2021 8:01 AM
Bihar Chief Ministerबिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार। (पीटीआई फोटो)

बिहार विधान सभा में प्रस्तुत 2020-21 के आर्थिक सर्वे के अनुसार राज्य की वास्तविक आथिर्क वृद्धि दर 2019-20 में प्रदेश में 10.5 प्रतिशत रही जो देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में उस साल दर्ज की गई 4.2 प्रतिशत की वृद्धि से ऊंची है। स्थिर मूल्य पर बिहार राज्य के जीडीपी में वर्ष 2018-19 में 9.3 प्रतिशत वृद्धि हुई थी। विधानसभा में 15वां आर्थिक सर्वेक्षण 2020-21 पेश करने बाद पत्रकारों को संबोधित करते हुए उपमुख्यमंत्री सह वित्तमंत्री तारकिशोर प्रसाद ने कहा कि स्थिर मूल्य पर बिहार में वर्ष 2018-19 के 9.3 प्रतिशत के अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर के मुकाबले 2019-20 में प्रदेश में आर्थिक वृद्धि 10.5 प्रतिशत रही जो राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर से अधिक है।

उन्होंने कहा कि कोविड-19 महामारी ने पूरी दुनिया को प्रभावित किया है और इसलिए इसका भारतीय अर्थव्यवस्था और बिहार पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ा है। सर्वेक्षण जिसमें कुल 13 अध्याय हैं, प्रत्येक अध्याय में कोविड 19 के दौरान सरकार द्वारा की गई पहल पर एक खंड शामिल है। तारकिशोर ने कहा कि कोविड-19 के मद्देनजर लाकडाउन के कारण उत्पादन गतिविधियों पर प्रतिबंध और मांग में कमी के नकारात्मक प्रभाव के बावजूद प्राथमिक, द्वितीय और तृतीयक में तृतीयक क्षेत्र में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। राज्य सकल घरेलू उत्पाद में तृतीयक (सेवा क्षेत्र) 2013-14 के 57.3 प्रतिशत से बढकर 2019-20 में 60.2 प्रतिशत हो गया।

उन्होंने कहा कि वहीं 2013-14 और 2019-20 के बीच सकल राजकीय मूल्यवर्धन में तृतीयक क्षेत्र में दो उप-क्षेत्रों का हिस्सा उल्लेखनीय ढंग से बढ़ा है। पथ परिवहन का हिस्सा 4.4 से 5.9 प्रतिशत और अन्य सेवाओं का 10.5 प्रतिशत से बढ़ कर 13.8 प्रतिशत हो गया। तारकिशोर ने कहा कि राज्य ने एक दशक से भी अधिक समय से लगातार वित्तीय विवेकशीलता दर्शाई है और वित्तीय सूचकों से पता चलता है कि वित्तीय वर्ष 2019-20 में सकल राज्य घरेलु उत्पाद के प्रतिशत में सकल राजकोषीय घाटा 2.0 प्रतिशत था और राजस्व लेखे में अधिशेष बरकरार रहा। प्राथमिक घाटा में भी 2019-20 में गत वर्ष की अपेक्षा कमी आई।

उन्होंने कहा कि 2019-20 में बिहार का सकल राज्य घरेलू उत्पाद वर्तमान मूल्य पर 6,11,804 करोड़ रुपए और 2011-12 के स्थिर मूल्य पर 4,14,977 करोड़ रुपए था। वित्त विभाग के प्रधान सचिव एस सिद्धार्थ ने यह स्पष्ट किया कि 2020-21 के अर्थिक सर्वेक्षण में दिए गए आंकड़े वित्तीय वर्ष 2019-20 के हैं हालांकि कुछ आंकड़े सितंबर 2020 तक के भी ले लिए गए हैं।

राज्य में वृद्धि के वी आकार के होने के कारण चालू वित्त वर्ष की विकास दर के बारे में बताना मुश्किल है। वर्तमान वित्त वर्ष 2020-21 की विकास दर को बाद में अलग से जारी किया जाएगा। सिद्धार्थ ने कहा कि 2004-05 से ही बिहार राजस्व अधिशेष वाला राज्य रहा है। राज्य सरकार का यह राजस्व अधिशेष 2019-20 में बना रहा। सकल राज्य घरेलू उत्पाद के प्रतिशत में राज्य सरकार की उधारी 2018-19 में 3.6 प्रतिशत से बढ़कर 2019.20 में 4.8 प्रतिशत हो गई है।

सर्वेक्षण में कहा गया है कि 2019-20 में सकल राजकोषीय घाटा सकल राज्य घरेलू उत्पाद का 2.0 प्रतिशत था जो 2019-19 के 2.7 प्रतिशत से कम है। 2019-20 में सकल घरेलू उत्पाद में कृषि और संबद्ध क्षेत्र का कुल योगदान 18.7 प्रतिशत रहा । इस वित्तीय वर्ष के दौरान बिहार में 163.80 लाख टन खाद्यान्न उत्पादन का रिकॉर्ड दर्ज किया।

सर्वेक्षण में श्रम, नियोजन और प्रवास के बारे में कहा गया है कि बिहार में 57.6 प्रतिशत पुरुष श्रमिक स्वनियोजित थे जबकि बिहार में नियमित और सवैतनिक पुरुष श्रमिकों का अनुपात सिर्फ 9.7 प्रतिशत था जो देश के सभी राज्यों में सबसे कम था।

सर्वेक्षण में कहा गया है कि बिहार में साख जमा अनुपात काफी कम है। यह 2018-19 के 34 प्रतिशत से बढ़कर 2019-20 में 36-1 हो गया है जो राष्ट्रीय औसत:76.5 फीसदी: से कम है। यह अनुपात बताता है कि बैंक उस क्षेत्र में आर्थिक गतिविधि को बढ़ावा देने के लिए अपने संसाधनों का पूरा उपयोग नहीं कर रहे हैं जहां से उसने जमा राशि जुटाई है।

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