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केरल: CM से बोले चीफ जज- कानूनी कार्यवाही कवर करने के लिए HC में मीडिया पर नहीं कोई पाबंदी

केरल उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश मोहन एम शांतानागौदार ने आज मुख्यमंत्री पिनरई विजयन से कहा कि मीडिया और वकीलों के बीच मुद्दे सुलझ गए हैं और पत्रकारों को अदालत की कार्यवाही कवर करने से नहीं रोका जाएगा।

Author तिरूवनंतपुरम | Updated: October 12, 2016 9:55 AM
(File Photo)

केरल उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश मोहन एम शांतानागौदार ने आज मुख्यमंत्री पिनरई विजयन से कहा कि मीडिया और वकीलों के बीच मुद्दे सुलझ गए हैं और पत्रकारों को अदालत की कार्यवाही कवर करने से नहीं रोका जाएगा। कोच्चि में बीती शाम मुख्य न्यायाधीश से मुलाकात करने वाले विजयन ने बाद में संवाददाताआें से कहा कि मुख्य न्यायाधीश ने उन्हें बताया है कि कानूनी कार्यवाही कवर करने के लिए उच्च न्यायालय में मीडियाकर्मियों के प्रवेश पर कोई पाबंदी नहीं है। उन्होंने कहा कि इस संबंध में और कोई मुद्दा नहीं है। गौरतलब है कि मीडिया के एक प्रतिनिधिमंडल ने पांच अक्तूबर को राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से मुलाकात करके इस समस्या का जल्द से जल्द समाधान निकालने का अनुरोध किया था। दरअसल, एक सरकारी वकील द्वारा एक महिला से कथित रूप से दुर्व्यवहार करने संबंधी मीडिया में आई एक खबर से नाराज वकीलों के एक समूह का कुछ मीडियाकर्मियों से झगड़ा हो गया था।

आपको बता दें कि जुलाई में कोझीकोड़ जिला अदालत में आइसक्रीम पार्लर मामले की कार्यवाही को कवर करने आए कम से कम तीन मीडियाकर्मियों को पुलिस ने रोक दिया और वहां से हटा दिया था। इन पत्रकारों का पुलिस थाने तक ले जाया गया था। पुलिस ने बताया कि पुलिस कार्रवाई कथित तौर पर जिला न्यायाधीश के निर्देशों पर की गई है। पुलिस ने अदालत परिसर से समाचार चैनल के वाहन को भी हटा दिया था। पुलिस के मुताबिक उपनिरीक्षक ने कहा था कि न्यायाधीश ने उन्हें अदालत परिसर से मीडियाकर्मियों और उनके वाहनों को हटाने के निर्देश दिए थे। पुलिस ने कहा, ‘‘हमने पत्रकारों से माफी मांग ली है।’’

अदालत परिसर से हटाए गए मीडियाकर्मी बिनू राज ने कहा कि उन्होंने पुलिस को बताया है कि उन्होंने कोई गलती नहीं की है। उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘दूसरों के साथ-साथ मुझे भी धक्का मारकर वहां से हटा दिया गया और पुलिस वाहन में पुलिस स्टेशन ले जाया गया।’’ मीडियाकर्मियों ने बताया कि कार्यवाही का कवरेज करने से उन्हें वकीलों ने नहीं बल्कि पुलिस दल ने रोका था जिसका नेतृत्व शहर का पुलिस उपनिरीक्षक विमोद कर रहा था।

बता दें कि बाद में इस घटना के विरोध में मीडियाकर्मियों ने कोझीकोड़ पुलिस आयुक्त कार्यालय के सामने प्रदर्शन किया था। मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने नई दिल्ली में पत्रकारों से कहा कि वे मामले की जानकारी लेंगे।

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