बंद करो, खोलो

दिल्ली में कोरोना बढ़े तो सबसे पहले स्कूल बंद हो। प्रदूषण बढ़े तो भी स्कूल बंद हो।

दिल्ली में कोरोना बढ़े तो सबसे पहले स्कूल बंद हो। प्रदूषण बढ़े तो भी स्कूल बंद हो। स्कूलों को बंद करने और खोलने को लेकर जितनी सख्ती और अजीबो-गरीब रणनीति दिख रही है उससे बच्चे और उनके अभिभावक भी तंग हो गए हैं। पिछले दिनों दिल्ली में प्रदूषण की वजह से स्कूलों पर रोक लगाई गई है। लेकिन हैरानी है कि स्कूल के बंद करने को लेकर प्रदूषण का जो कारण बताया जा रहा है वह गले के नीचे नहीं उतर रहा। क्योंकि जिस समय दिल्ली में वायु गुणवत्ता का स्तर 300 के आसपास दर्ज किया गया था उस समय स्कूल बंद किए गए थे और अब जब यह स्तर कम नहीं हुआ बल्कि 350 के पार है तब सरकार फिर से स्कूल खोल रही है। दिल्ली सरकार का यह काम तो सच में लोगों के सर के ऊपर से जा रहा है। लोग पूछ रहे हैं कि ये स्कूल बंद करने और खोलने का कौन सा फार्मूला है भाई!
मुंह पर उंगली
राजधानी की सुरक्षा संभालने की जिम्मेदारी जिस विभाग के कंधे पर है। उस विभाग के अधिकारी अकसर बड़े और विभागीय लापरवाही से जुड़े मामलों में चुप्पी साध लेते हैं। अब बोलने की जिम्मेदारी भी उन्हीं के कंधों पर है तो ऐसे में उनका मुंह पर उंगली रखना कभी-कभी बड़ी दुविधा पैदा करता है। पिछले दिनों एक जिले की अधिकारी ने पुलिस पोस्ट के अंदर एक शख्स की संदिग्ध अवस्था में मौत के मामले में घंटों तक कुछ नहीं कहा। हालांकि, बाद में अधिकारी ने जो जवाब आया उसने उल्टे मामला सुलझाने के कई सवालों को खड़ा कर दिया। इसके बाद जब सवालों की बौछार हुई तो अधिकारियों को न बोलना ही बेहतर लगा। नीचे के अधिकारी भी सुर-ताल मिलाते हुए बिल्कुल चुप हो गए। तब बेदिल को किसी ने बताया कि बोलने से चुप रहना आखिर क्यों ये ज्यादा सही मानते हैं।
पुराना चावल
दिल्ली नगर निगम के आसन्न चुनाव के मद्देनजर सभी पार्टियां एक दूसरे नेताओं को तोड़ने में लगे हुए हैं। शनिवार को कांग्रेस के पांच बार के निगम पार्षद और विधायकी लड़ चुके एक वरिष्ठ नेता जब आम आदमी पार्टी का थामन थाम रहे थे तभी किसी ने चुटकी ली कि अब किसकी बारी है। तभी एक नेता ने कहा कि पुराना चावल पथ पड़ता है। लोगों ने सोचा कि यह कहावत यहां किसलिए कही जा रही है। लोग इधर-उधर देख ही रहे थे तभी मंच से जबाब आया कि अब गोयल ही अपने साथियों को ‘आप’ में लाएंगे और कांग्रेस की नैया डुबाएंगे। मतलब साफ था कि जो पुराने नेता ‘आप’ में आ रहे हैं, वही दूसरे नेताओं को ला रहे हैं। इसका सबसे बड़ा उदाहरण विधानसभा अध्यक्ष राम निवास गोयल ही हैं। वे कभी भाजपा के कद्दावर हुआ करते थे लेकिन अब ‘आप’ के सबसे पुराने चेहरों में एक हो गए हैं।
भारी पड़ा प्रदूषण
कई बार अपना गुणगान स्वयं करना व्यक्ति या संस्था को भारी पड़ जाता है। कुछ ऐसा ही हुआ बीते दिनों प्रगति मैदान में चल रहे विश्व व्यापार मेले में दिल्ली मंडप के आयोजकों के साथ। दिल्ली सरकार ने यहां लगे अपने मंडप को दिल्ली के विकास को समर्पित किया था। पुनर्विकसित चांदनी चौक को यहां दर्शाया गया था। दिल्ली को विश्वस्तरीय शहर और शिक्षा माडल की प्रस्तुति कर अधिकारी गुणगान कर रहे थे। वे दर्शकों से दिल्ली सरकार के कामकाज से रू-ब-रू होने की अपील कर रहे थे। लेकिन कई लोग उनकी बातें हजम नहीं कर पा रहे थे। उन्हीं में से एक ने सवाल दागा, कहा-भाई, दिल्ली के प्रदूषण नियंत्रण वाली झांकी भी दिखाओं यहां! लोगों को पता तो चले कि दिल्ली को वे व्यर्थ थू-थू कर रहे हैं। कहना न होगा कि उन दिनों दिल्ली वायु प्रदूषण के पैमाने पर रहने के कारण चर्चा में थी। निर्माण कार्य से लेकर स्कूल कालेज सभी बंद करने पड़े थे। सवाल पर दिल्ली मंडप के अधिकारी बगले झांकते नजर आए!
प्रचार का पंगा
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के नजदीक आते ही बरसों से भूमिगत या अपने कारोबार में लगे नेता एकाएक सक्रिय दिखने लगे हैं। दिखने का मतलब यह है कि वे धरती पर नहीं हैं बल्कि बड़े- बड़े होर्डिंग और बैनर पर टंगे हुए हैं। यहां वे अपनी फोटो लगाकर पार्टी में सक्रिय होने का दावा कर रहे हैं। हालांकि जनता सब जानती है। कुछ राजनीतिक जानकारों का मानना है कि ऐसे नेता भले ही अपना कुछ भला नहीं कर पाते लेकिन वे टिकट की दावेदारी की दौड़ में शामिल लोगों के समीकरण को बिगाड़ जरूर देते हैं। ऐसे में लोग टांग खींचने में लग जाते हैं। अब मोदी सरकार से पहले केंद्र में सत्ताधारी रहेराजनीतिक दल के एक पुराने नेता के फोटो लगे होर्डिंग इन दिनों खूब दिख रहे हैं। ये होर्डिंग वैध है या अवैध इसकी तह तक पहुंचने के लिए उन्हीं के दल के लोगों ने प्राधिकरण को सूचित कर दिया है।
-बेदिल

पढें राज्य समाचार (Rajya News). हिंदी समाचार (Hindi News) के लिए डाउनलोड करें Hindi News App. ताजा खबरों (Latest News) के लिए फेसबुक ट्विटर टेलीग्राम पर जुड़ें।

अपडेट