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8वीं में पढ़ने वाले इस लड़के को आता है 20 करोड़ तक का पहाड़ा, मोदी-योगी को दिया गांव आने का न्‍योता

चिराग के पिता नरेंद्र सिंह ने कहा- ''हम गरीब परिवार से हैं, लेकिन बच्चे को वैज्ञानिक बनाने के लिए हम कुछ भी करेंगे, हम दुआ करते हैं कि देश को उस पर गर्व हो।'' चिराग की काबीलियत से उसके घरवाले इलाके के लोग गदगद हैं और उन्हें पूरा यकीन है कि वह जो कह रहा है, उसे पूरा करके दिखाएगा।

8वीं का छात्र चिराग। (फोटो सोर्स- एएनआई)

उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में 8वीं के एक छात्र को 20 करोड़ तक का पहाड़ा आता है। समाचार एजेंसी एएनआई को इस छात्र ने बताया कि वह वैज्ञानिक बनकर देश को गौरवान्वित करना चाहता है। छात्र की तमन्ना है कि एक बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ उसके गांव आएं। चिराग के पिता नरेंद्र सिंह ने कहा- ”हम गरीब परिवार से हैं, लेकिन बच्चे को वैज्ञानिक बनाने के लिए हम कुछ भी करेंगे, हम दुआ करते हैं कि देश को उस पर गर्व हो।” चिराग की तरह पिछले वर्ष हिमाचल प्रदेश के एक छात्र के बारे में पता चला था कि उसे 1100 तक के पहाड़े आते हैं। हिमाचल के सरकाघाट तहसील के पैंटा गांव का रहने वाला संतोष आईटीआई की छात्र है और वह बड़ी रफ्तार से 1100 तक के पहाड़े सुना देता है। ऐसा ही एक मामला छत्तीसगढ़ से सामने आया था, यहां के डोंगरगांव के एक स्कूल में पहली कक्षा के बच्चों को 30 तक के पहाड़े मुंहजबानी याद थे।

बात केवल पहाड़ों तक की नही हैं, पिछले दिनों ऐसे कई बच्चे मीडिया का सुर्खियां बने जिन्होंने अपनी उम्र के हिसाब से कहीं ज्यादा ज्ञान जुटाया है। वाराणसी के कौटिल्य को गूगल ब्वॉय तक कहा गया। कौटिल्य दुनिया के किसी भी देश से जुड़े सामान्य ज्ञान, इतिहास और भूगोल के उत्तर चुटकियों में दे देता है। अपनी इस विलक्षण प्रतिभा के वजह से नन्हा कौटिल्य कई समाचार चैनलों पर नजर आया।

ये सभी बच्चे इस बात की तस्दीक करते हैं कि अगर इन्हें बढ़िया सुविधा और संसाधन मुहैया कराए जाएं तो निश्चित तौर पर ये वैज्ञानिक जैसी शख्सियत बन सकते हैं और देश का नाम रौशन कर सकते हैं। लेकिन पिछले दिनों मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले से आई एक तस्वीर विचलित करने वाली थी। यहां कि राजनगर तहसील के अंतर्गत ग्राम पंचायत सूरजपुरा स्थित स्कूल के बच्चों को पीने का साफ पानी मयस्सर नहीं था। बच्चे खेत से होकर गुजरने वाली नाली से पानी पीते हुए दिखे थे। इस पर स्कूल की तरफ से दलील दी गई थी कि नाली में सिंचाई के लिए पानी जाता है। स्कूस मे पीने के पानी का इंतजाम नहीं हैं। बच्चों को मिलने वाले मिडडे मील में भी शिकायत आई थी कि उन्हों भोजन रोज नहीं मिलता है, मिलता भी है तो रोटी और नमक मिलता है। इस पर राज्य सरकार ने तुरंत जांच के आदेश दिए थे।

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