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गैरसैण को राजधानी बनाने के मुद्दे पर दोनों रावत आमने-सामने

गैरसैण को उत्तराखंड की स्थायी राजधानी बनाने के मुद्दे पर कांग्रेस दो फाड़ हो गई है। मुख्यमंत्री हरीश रावत और कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत इस मुद्दे पर आमने-सामने आ गए हैं।

Author देहरादून | January 20, 2016 11:22 PM
उत्तराखंड ते मुख्यमंत्री हरीश रावत। (फाइल फोटो)

गैरसैण को उत्तराखंड की स्थायी राजधानी बनाने के मुद्दे पर कांग्रेस दो फाड़ हो गई है। मुख्यमंत्री हरीश रावत और कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत इस मुद्दे पर आमने-सामने आ गए हैं। जहां एक ओर हरक सिंह रावत ने गैरसैण को उत्तराखंड की स्थायी राजधानी बनाने के मामले में अपनी ही सरकार की घेराबंदी की है, वहीं मुख्यमंत्री हरीश रावत ने हरक सिंह रावत की खिल्ली उड़ाते हुए कहा कि कुछ लोगों के गले में खुजली हो रही है, इसलिए कुछ लोग अपने गले की खराश मिटाने के लिए बहुत कुछ उगल रहे हैं। जबकि हरक सिंह रावत बोले- मेरे तो हाथों खुजली हो रही है और मैं राज्य के विकास में लगा हूं।

हरीश रावत के इस बयान से तमतमाए हरक सिंह रावत ने मुख्यमंत्री रावत से सवाल किया कि जब देहरादून को स्थायी राजधानी बनाना ही नहीं था, तो देहरादून में 18 करोड़ रुपए की लागत से मुख्यमंत्री आवास करोड़ों रुपए खर्च करके राजभवन और सचिवालय क्यों बनाये गए। हरक सिंह ने हरीश रावत पर कटाक्ष करते हुए कहा कि अगर कोई यह कहता है कि गैरसैण अस्थायी या स्थायी राजधानी बनेगी तो यह सबसे बड़ा झूठ है। मैंने तो विजय बहुगुणा के मुख्यमंत्री रहते हुए भी गैरसैण में मंच से ही कह दिया था कि गैरसैण को स्थायी राजधानी बनाने का मामला झूठ है। जब देहरादून में ही सब कुछ खड़ा कर दिया गया है, तो फिर गैरसैण को राजधानी बनाने की बात कह कर पहाड़ की जनता से मजाक नहीं किया जाना चाहिए।
तल्खी भरे अंदाज में अपनी ही पार्टी की सरकार के मुखिया हरीश रावत से आर-पार की लड़ाई के मूड में हरक सिंह ने कहा कि वे किसी के बूते राजनीति नहीं करते हैं। और न ही किसी की मेहरबानी पर रहते हैं। वे अपने बूते चुनाव जीतते हैं और अपने बूते ही राजनीति करते हैं।

हरक सिंह बोले- चाहे कांग्रेस पार्टी के कर्ताधर्ता उन्हें पार्टी से बाहर निकाल दें। हरक को नही पड़ता किसी की बात से कोई फर्क। वे सच कहने से कभी पीछे नहीं हटेंगे। इस तरह हरक ने कांग्रेस पार्टी और मुख्यमंत्री को सीधे-सीधे चुनौती दी है।
मुख्यमंत्री रावत ने हरक की बात का दो-टूक जवाब देते हुए कहा कि ‘खाता न बही जो हरीश रावत इस मामले में कहे वही सही’। हरीश बोले-टिप्पणी करने वाले गैरसैण के मामले में जो भी टिप्पणी करते रहें। परंतु मुझे मालूम है कि मुझे इस मामले में क्या करना है। मेरे पास राजधानी के लिए स्पष्ट रोडमैप है।

हरीश रावत के खासमखास विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल ने गैरसैण के मुद्दे पर हरक सिंह रावत की घेराबंदी करते हुए कहा कि गैरसैण को ही उत्तराखंड स्थायी राजधानी बनाया जाना चाहिए। कुंजवाल ने हरक सिंह रावत से सवाल किया कि अगर पहाड़ी राज्य की राजधानी पहाड़ में नहीं होगी तो कहां होगी। पहाड़ में राजधानी बनने से पहाड़ों से बेरोजगार युवकों का पलायन रुकेगा, क्योंकि पहाड़ में ही राजधानी बनने से पहाड़ी इलाकों के विकास का रास्ता खुलेगा। पहाड़ों में रोजगार के अवसर बढेंÞगे।

वहीं कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय ने यह कह कर यह मामला और गरमा दिया कि मुख्यमंत्री से उनके कैबिनेट मंत्री के बारे में कोई शिकायत आने पर पार्टी अनुशासनहीनता की कार्रवाई कर सकती है। उन्होंने कहा कि हरक सिंह को गैरसैण के मामले में ऐसा नहीं बोलना चाहिए था। यह निंदनीय है और पार्टी लाईन के खिलाफ है। उपाध्याय ने कहा कि यदि हरक सिंह को राजधानी के मामले में सीधे व्यक्तिगत रूप से मुख्यमंत्री को या पार्टी के मंच पर बोलना चाहिए था। यदि हर मंत्री इसी तरह अपनी बातें मीडिया के मंच से बोलने लगे तो यह एक गंभीर सवाल है। इस मामले में पार्टी कड़े कदम उठाएगी।
वहीं मुख्यमंत्री रावत के राजनीतिक सलाहकार रंजीत रावत ने कहा कि गैरसैण तो स्थायी राजधानी बन चुकी है। हरीश रावत के मुख्यमंत्री बनने से पहले ही विजय बहुगुणा की सरकार के समय ही गैरसैण में विधानसभा भवन बनाने का मामला तय हुआ था। यदि हरक सिंह रावत ने बहुगुणा के जमाने में गैरसैण को स्थायी राजधानी बनाने का विरोध किया था तो उन्हें तभी कैबिनेट मंत्री पर से इस मुद्दे पर इस्तीफा दे देना चाहिए था।

दूसरी और भाजपा ने इस मुद्दे पर हरक सिंह रावत की हां में हां मिलाते हुए कहा कि हरीश रावत गैरसैण के मुद्दे पर केवल उछल-कूद कर रहे हैं। भाजपा के राष्ट्रीय सचिव त्रिवेंद्र सिंह रावत और प्रदेश महामंत्री प्रकाश पंत ने कहा कि हरक सिंह ने अपनी अंतर्आत्मा की आवाज पर मुख्यमंत्री हरीश रावत की गैरसैण के मुद्दे पर कलई खोल दी है। मुख्यमंत्री रावत गैरसैण को स्थायी राजधानी नहीं बनाना चाहते हैं, वे इस मुद्दे पर केवल राजनीतिक फायदा लेने के लिए राज्य की जनता की भावनाओं से खिलवाड़ करना चाहते हैं। तभी वे इस मुद्दे पर गोल-मोल जवाब देते हैं और सफेद झूठ बोलते हैं।
चुनावी वर्ष में हरक सिंह रावत ने यह मुद्दा उठा कर मुख्यमंत्री हरीश रावत को परेशानी में डाल दिया है।

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